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मायावती आखिर यूपी की योगी सरकार से ज्यादा प्रियंका पर हमलावर क्यों है?

BSP supremo Mayawati is more aggressive on Congress leader Priyanka Gandhi nowadays than Yogi government in UP. Know what are the main reasons for this. बसपा सुप्रीमों मायावती यूपी में योगी सरकार से ज्यादा आजकल कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी पर आक्रामक हैं। जानिए इसकी खास वजह क्या हैं।

बेंगलुरु। उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती पिछले कई दिनों से सत्ता पर काबिज भाजपा सरकार के ज्यादा कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के प्रति आक्रामक रुख अख्तियार क‍िए हुए हैं। पिछले कुछ दिनों में वो कई मुद्दों पर वो प्रियंका को घेरती नजर आयी। हाल ही में कोटा के अस्‍पताल में बच्‍चों की मौत को लेकर प्रियंका गांधी पर साधा था। एक के बाद एक ट्वीट कर मायावती ने लोगों को ये समझाने की कोशिश की है कि अगर प्रियंका गांधी कोटा के अस्पताल में जान गंवाने वाले बच्चों की माताओं से जाकर नहीं मिलती तो साफ साफ समझ लो वो यूपी भी महज राजनीतिक फायदे के लिए आती हैं। कहने को तो यूपी में बसपा और कांग्रेस भाजपा की विरोधी पार्टी हैं लेकिन मायावती का यह व्‍यवहार कहीं न कही से विपक्ष को कमजोर कर रहा हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि मायावती का कांग्रेस की महासचिव से हद से खफा होने की वजह क्या है? आखिर यूपी की राजनीति में मायावती को प्रियंका के सक्रिय होने से क्या कोई डर सता रहा हैं ? आइए जानते हैं..

 मायावती को प्रियंका की ये बात अखर रही

मायावती को प्रियंका की ये बात अखर रही

बता दें प्रियंका गांधी यूपी में अंतिम सासें गिन रही कांग्रेस को दोबारा जिंदा करने में जुटी हुई हैं क्योंकि विधानसभा में सिर्फ सात विधायक बचे हैं और एक लोक सभा सांसद। राहुल गांधी की हार के बाद कांग्रेस अमेठी भी गंवा चुकी है। प्रियंका गांधी की सक्रियता भी यही बता रही है कि वो कांग्रेस का खोया हुआ वोट बैंक वापस दिलाना चाहती हैं। प्रियंका गांधी भी मुस्लिम समुदाय के साथ वर्तमान समय में वैसे ही सपोर्ट में खड़ी दिखाने की कोशिश कर रही हैं जैसे राहुल गांधी एक दौर में वह दलितों के साथ खड़े होने का दिखावा करते थे।

मायावती को बुरा लग रहा कांग्रेस का ये रवैया

मायावती को बुरा लग रहा कांग्रेस का ये रवैया

दसअसल मायावती की प्रियंका गांधी से चिढ़ की वजह भी यही है। मायावती भले ही खुद सीएए और एनआरसी के खिलाफ हों, लेकिन कांग्रेस का विरोध बीएसपी नेता को बहुत बुरा लगता है। कांग्रेस के खिलाफ मायावती के ताजा बयान देखें तो कांग्रेस को अगर दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों की फिक्र रहती तो न बीजेपी सत्ता में आ पाती और न ही बीएसपी को ही बनाने की जरूरत पड़ती। कांग्रेस पर यह मायावती ने यह हमला कांग्रेस के भारत बचाओ, संविधान बचाओ कार्यक्रम को लेकर बोला था।

मायावती का इस वजह से धैर्य जवाब दे चुका है

मायावती का इस वजह से धैर्य जवाब दे चुका है

मालूम हो कि मायावती बीएसपी की लगातार हार से त्रस्‍त हो चुकी हैं। बसपा की जीत के लिए पूर्व में अजमाये गए हर प्रयोग फेल हो चुके हैं। मायावती की नयी राजनीतिक चाल भी कामयाब नहीं हो रही। समाजवादी पार्टी से गठगबंधन भी कोई काम नहीं आया जिसके बाद बसपा-सपा गठगबंधन भी तोड़ दिया था। प्रियंका गांधी के साथ भीम आर्मी के चंद्रशेखर से भी बसपा सुप्रीमों मायावती को भय लग रहा हैं। इसीलिए वह हर तरफ से थक हार कर मायावती अपने वोटरों को ये ही संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि वे किसी बहकावे में न आए।

प्रियंका ने अपनायी है ये रणनीति

प्रियंका ने अपनायी है ये रणनीति

ऐसा करके वो प्रियंका गांधी वाड्रा के राजनीतिक मकसद से भी रुबरु करवाने की कोशिश कर रही हैं। इतना ही नहीं वह अपने वोटरों को यह भी समझा रही है कि भीम आर्मी वाले चंद्रशेखर आजाद भी दलितों का कभी भला नहीं कर सकते। बीएसपी और समाजवादी पार्टी नेता पर हमले से परहेज करे हुए प्रियंका गांधी दलित समुदाय और पिछड़ों की नाराजगी नहीं मोल लेना चाहतीं। लेकिन मायावती ने अब अपना आपा खो दिया हैं उनका धैर्य जवाब दे चुका है और चाह कर भी दिल की बात जबान पर आने से नहीं रोक पा रही हैं।

प्रियंका इसलिए कर रही मेहनत

प्रियंका इसलिए कर रही मेहनत

गौरतलब है कि 2019 के आम चुनाव में कांग्रेस को यूपी में मुस्लिम समुदाय से सिर्फ 14 फीसदी वोट मिले थे, जबकि 76 फीसदी सपा-बसपा गठबंधन के खाते में गया था। कांग्रेस के लिए सबसे ज्यादा फिक्र वाली बात तो ये रही कि बीजेपी ने 62 में से 36 सीटें उन इलाकों में जीती जहां 20 फीसदी मुस्लिम आबादी रहती है। यूपी में प्रियंका गांधी की सक्रियता भी यही बता रही है कि वो कांग्रेस का खोया हुआ वोट बैंक वापस दिलाना चाहती हैं। जो मायावती को बर्दास्‍त नहीं हो रहा क्योंकि कांग्रेस बसपा का वोट बैंक साधने की फिराक में हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा की यूपी में सक्रियता 2022 के विधानसभा चुनावों को लेकर ही है और वो इसमें कोई भी राजनीतिक मौका नहीं चूक रही हैं।

प्रियंका यूपी की घटनाओं पर जमकर कर रही राजनीति

प्रियंका यूपी की घटनाओं पर जमकर कर रही राजनीति

प्रियंका गांधी यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार के खिलाफ लोगों के हर गुस्से को भुनाने की कोशिश कर रही हैं। सोनभद्र का नरसंहार से लेकर उन्नाव में बलात्कार समेत अन्‍य घटनाओं को लेकर या फिर नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ पुलिस एक्शन। कानून और व्यवस्था के नाम पर बीजेपी सरकार को घेरने के साथ साथ प्रियंका गांधी भगवा रंग पर कांग्रेस का बदला नजरिया भी पेश कर दिया। कुल मिलाकर प्रियंका जहां कही भी लगता है कि सरकार के खिलाफ लोगों की सहानुभूति बटोरी जा सकती है वहां वो तुरंत पहुंच जाती हैं। लोगों से मुलाकात करती है और फिर मीडिया के सामने आकर यूपी पुलिस की ज्यादती की कहानियां भी बताती हैं।।

बीएसपी ने कांग्रेस से ऐसे बनायी दूरी

बीएसपी ने कांग्रेस से ऐसे बनायी दूरी

बता दें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में 2018 के आखिर में हुए चुनाव में चर्चा थी कि बीएसपी और कांग्रेस में गठबंधन हो सकता हैं। लेकिन मायावती ने छत्तीसगढ़ में अजित जोगी की पार्टी के साथ गठबंधन कर के कांग्रेस को झटका दिया। इसके बाद में मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ चुनाव लड़ीं और राजस्थान में इंकार कर दिया था। बात 2019 के आमचुनाव की करें तो इसमें मायावती ने सपा से गठबंधन किया, लेकिन कांग्रेस को दूर कर दिया और समझाती रही कि बीएसपी के लिए कांग्रेस और बीजेपी में सिर्फ नाम का ही फर्क हैं। 2018 में कांग्रेस से पूरी दूरी बनाते हुए अपने दम पर चुनाव लड़ कर बीएसपी ने विधानसभा की 6 सीटें जीती थीं। लेकिन सितंबर, 2019 आते आते सभी छह विधायकों ने मायावती का साथ छोड़ दिया और सोनिया गांधी की मंजूरी मिलते ही दिल्ली में उन 6 विधायकों ने कांग्रेस की सदस्यता ले ली। फिर तो मायावती का गुस्सा होना स्वाभाविक ही है।

मायावती की गुस्‍से की एक ये भी है वजह

मायावती की गुस्‍से की एक ये भी है वजह

गौरतलब है कि 2019 के आमचुनाव के दौरान मायावती को उस दिन प्रियंका गांधी से सबसे ज्यादा खफा दिखायी दी थी जब प्रियंका भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आजाद से मिलने मेरठ के अस्पताल पहुंच गयी थीं। तब ये भी खबर आयी कि मायावती ने अमेठी और रायबरेली में भी राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ सपा-बसपा गठबंधन का उम्मीदवार खड़ा करने का फैसला कर लिया था और यह फैसला तब बदला था जब अखिलेश यादव ने स्थिति की गंभीरता के बारे में बैठकर बीएसपी नेता से बात की।

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