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ड्रोन का पता लगाना क्यों है चुनौती ? भारत में इसे उड़ाने के नियम जानिए

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नई दिल्ली, 29 जून: जम्मू एयरबेस पर हुए ड्रोन हमले ने हालात की गंभीरता बयां कर दी है। हालांकि, यह समस्या कोई एक दिन में पैदा नहीं हुई है। कई वर्षों से ड्रोन अपने खतरे के प्रति आगाह कर रहा था, लेकिन शायद कभी इसकी चुनौती को उतनी गंभीरता से लिया ही नहीं गया। निश्चित रूप से अब हालात बदलने होंगे। क्योंकि, यह आतंकवाद का कितना बड़ा हथियार हो सकता है, उसका ट्रेलर दिख चुका है। ऐसा नहीं है कि देश में पहले से कोई भी एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी नहीं है। लेकिन, वह शायद इतनी भारी-भरकम है कि कुछ ही मौकों पर इस्तेमाल हो पाता है। यही नहीं देश में ड्रोन उड़ाने के नियम भी तय किए गए हैं, क्योंकि इससे संभावित खतरे की आशंका पहले से ही रही है। लेकिन, अब जान पर बनी है तो हर चीज पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जा रहा है।

ड्रोन क्यों बन गए हैं खतरनाक

ड्रोन क्यों बन गए हैं खतरनाक

ड्रोन सस्ते होते हैं और इसे आसानी से ऑनलाइन कोई भी खरीद सकता है। रिटायर्ड एयर वाइस मार्शल मनमोहन बहादुर ने टीओआई में लिखा है कि इस समय कौन किस वजह से ड्रोन खरीद रहा है यह पता लगाना लगभग नामुमकिन है। जीपीएस का इस्तेमाल करके और छोटे पेलोड के साथ इसे उड़ाने के लिए बहुत ज्यादा तकनीकी जानकारी की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। अगर इसके जरिए दवाइयां और दूसरी छोटी-मोटी चीजों की डिलिवरी की जा सकती है तो छोटे-मोटे विस्फोटक भी ढोए जा सकते हैं। टेंशन की बात ये है कि अगर आतंकवादी जम्मू एयरबेस पर बम गिराने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर सकते हैं तो वह देश में कहीं पर भी घुसकर इसे अंजाम दे सकते हैं और फिर इतनी बड़ी सेना और महंगे वेपन सिस्टम किस काम का रह जाएगा।

    Jammu Drone Attack: Drone का पता लगाना चुनौती, जानें भारत में इसे उड़ाने के नियम | वनइंडिया हिंदी
    ड्रोन का पता लगाना क्यों है चुनौती ?

    ड्रोन का पता लगाना क्यों है चुनौती ?

    इसे रोकने का एक ही उपाय है कि इसका जल्द से जल्द पता लगाकर उसे नीचे आने पर मजबूर कर दिया जाए या फिर आसमान में ही तबाह कर दिया जाए। लेकिन, इसका पता लगाना इतना आसान नहीं है। इसकी वजह ये है कि यह बैटरी से उड़ता है, इसलिए इसमें ज्यादा आवाज नहीं होती। इसे मैन्युअली कंट्रोल किया जा सकता है या फिर इसे बहुत ही कम ऊंचाई पर उड़ान भरने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है, जिससे जवाबी कार्रवाई के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। क्योंकि, पुलिस या सेना के सामान्य रडार में इसके छोटे आकार की वजह से इसका पता चल पाना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए स्पेशल मिलिमेट्रिक वेब रडार, ध्वनि यंत्र, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक और इंफ्रा-रेड सेंसर जैसे उपकरणों के समूह का नेटवर्क तैयार करने की जरूरत पड़ेगी।

    ड्रोन को विफल करना क्यों मुश्किल है

    ड्रोन को विफल करना क्यों मुश्किल है

    अगर ड्रोन का इस्तेमाल रात में होता है या फिर उसे झुंड में भेजा जाता है तो उसके खिलाफ त्वरित कार्रवाई में दिक्कत आ सकती है। यह काल्पनिक नहीं हकीकत है और जम्मू एयरबेस पर इंडियन एयरफोर्स इस चुनौती का सामना कर चुकी है। वहां भारत-विरोधी ताकतों ने एकसाथ दो ड्रोन हमले के लिए भेजे थे, जिसमें से एक तो बिल्डिंग पर विस्फोटक गिरा गया और दूसरा खुली जगह पर। वैसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अपना भी एंटी-ड्रोन सिस्टम तैयार कर रखा है, जिसका इस्तेमाल बड़े राष्ट्रीय पर्व के मौकों पर वीआईपी सिक्योरिटी के लिए किया जाता है। लेकिन,इसे फील्ड में तैनात करने के लिए और रिसर्च एंड डेवलपमेंट की आवश्यकता है। यही वजह है कि अब इजरायली तकनीक के भी इस्तेमाल पर मंथन चल रहा है, जिसका इस्तेमाल बहुत ही आसान है और वह रात में भी काम करता है।

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    भारत में ड्रोन उड़ाने के नियम

    भारत में ड्रोन उड़ाने के नियम

    भारत में ड्रोन को उड़ाने की इजाजत देने के लिए इसे कई श्रेणियों में विभाजित किया गया है। यह श्रेणियां ड्रोन के आकार और उसके वजन पर निर्भर हैं। मसलन, नैनो ड्रोन वे हैं जिनका वजह 250 ग्राम तक होता है। इस श्रेणी में बच्चों के ड्रोन खिलौने आ सकते हैं, जिसके लिए लाइसेंस जरूरी नहीं है। इससे ऊपर और 2 किलो तक के ड्रोन माइक्रो श्रेणी में आते हैं। जबकि, 2 से 25 किलो तक के ड्रोन स्मॉल श्रेणी के होते हैं। इन्हें फ्लाई करवाने के लिए जरूरी मंजूरी लेनी पड़ती है और इसे उड़ाने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेड्योर का पालन अनिवार्य है। इसके बाद मिनी (25 किलो से 150 किलो तक) और मैक्रो या लार्ज ड्रोन (150 किलो से ज्यादा) की श्रेणी तय की गई है। ड्रोन उड़ाने के लिए भारत में दो तरह के लाइसेंस मिलते हैं। एक है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस, जो ड्रोन की उड़ान सीखने के लिए दिया जाता है। दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस। अगर व्यापारिक गतिविधि (मेडिसीन या पिज्जा जैसी डिलिवरी के लिए ) के लिए लाइसेंस लेनी है तो यह लाइसेंस उन्हें दिया जा सकता है, जिनकी 18 से 65 वर्ष के बीच की कामकाजी उम्र हो। यही नहीं डीजीसीए की शर्तों के मुताबिक ड्रोन को उड़ाने से पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोल और एयर डिफेंस कंट्रोल से भी अनुमति लेनी जरूरी है। (कुछ तस्वीरें सांकेतिक)

    English summary
    There are already rules for flying drones in India, it is not easy to detect them in the sky
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