Gandhi Jayanti 2025: 2 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस? क्या है इसका वैश्विक महत्तव
Gandhi Jayanti 2025: 2 अक्टूबर का दिन केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए विशेष महत्व रखता है। यह वह तिथि है जब 1869 में मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म हुआ था। भारत में यह दिन गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है, जबकि 2007 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया।
140 से अधिक देशों के समर्थन से पारित इस प्रस्ताव ने गांधी के विचारों को सीमाओं से परे जाकर वैश्विक पहचान दिलाई। यह दिन न केवल एक महापुरुष को श्रद्धांजलि है, बल्कि मानवता के लिए एक साझा संदेश भी है।

International Day of Non-Violence: भारत से दुनिया में मिली प्रेरणा
भारत में इस दिन की शुरुआत प्रायः राजघाट पर श्रद्धांजलि से होती है। देशभर में सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। स्कूलों में गांधीजी के आदर्शों पर निबंध प्रतियोगिताएँ, सभाएँ और नाटक होते हैं। समय के साथ गांधीजी की शिक्षाएँ सिर्फ स्मृति भर नहीं रहीं, बल्कि राष्ट्रीय अभियानों का हिस्सा बन गईं। स्वच्छ भारत अभियान, खादी का पुनर्जीवन और ग्रामोद्योग जैसे प्रयास सीधे-सीधे उनकी प्रेरणा से जुड़े हैं।
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पर महासचिव का विशेष संदेश जारी किया जाता है। इन संदेशों में बार-बार यह रेखांकित किया जाता है कि गांधी का सत्य और अहिंसा का विश्वास "किसी भी हथियार से अधिक शक्तिशाली" है। बेल्जियम, स्पेन, अमेरिका, थाईलैंड, सर्बिया और नीदरलैंड जैसे देशों में भी इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
दक्षिण अफ्रीका में चला सत्याग्रह आंदोलन
गांधीजी का संघर्ष केवल भारत तक सीमित नहीं था। 1893 में दक्षिण अफ्रीका में उन्हें ट्रेन से उतार दिए जाने की घटना ने उनके जीवन को नया मोड़ दिया। उस रात पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन पर बिताए गए पल उनके विचारों की जन्मस्थली बने। इसी अनुभव से निकला शब्द था "सत्याग्रह" - यानी सत्य के लिए अहिंसक आग्रह।
गांधीजी का मानना था कि नैतिक बल किसी भी हथियार से बड़ा है। उन्होंने इसे भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में प्रयोग कर दिखाया।
- 1930 का दांडी मार्च - जब हजारों लोग नमक कानून तोड़ने समुद्र तक पैदल चले।
- 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन - जब पूरा राष्ट्र अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट खड़ा हुआ।
- उनकी इस सोच ने अमेरिका में मार्टिन लूथर किंग जूनियर और दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला को भी प्रेरित किया।
गांधी और संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र में गांधी की याद में "अहिंसा व्याख्यान श्रृंखला" आयोजित होती है। 2022 के पांचवें व्याख्यान में "मानव उत्थान हेतु शिक्षा" विषय पर चर्चा हुई। कार्यक्रम की खासियत थी गांधीजी का जीवन-आकार का होलोग्राम, जिसने परंपरा और तकनीक को जोड़ते हुए उनके विचारों को जीवंत कर दिया।
महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी माना कि गांधी का दृष्टिकोण आज के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की नींव है। स्वच्छता, शिक्षा, मातृ स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और भूखमरी उन्मूलन जैसे विषयों पर गांधी ने बहुत पहले ही जोर दिया था।
आज की चुनौतियों में बापू के विचारों की प्रासंगिकता
21वीं सदी में दुनिया हिंसक संघर्षों, आतंकवाद, आर्थिक असमानता, महामारी और जलवायु संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे समय में गांधी का दर्शन हमें याद दिलाता है कि संवाद, करुणा और सहयोग ही आगे बढ़ने का रास्ता है।
2 अक्टूबर सिर्फ कैलेंडर पर दर्ज एक तिथि नहीं है। यह भारत के लिए राष्ट्रीय गर्व और दुनिया के लिए साझा प्रेरणा का अवसर है। गांधीजी का जीवन हमें सिखाता है कि अहिंसा कमजोरी नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी शक्ति है। यही दिन हमें बताता है कि गांधी का संदेश अतीत तक सीमित नहीं, बल्कि भविष्य की राह भी है।












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