राजीव गांधी की हत्या के मामले की जांच में रॉ और IB ने किया गुमराह!
देश के प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी की हत्या को 26 साल बीत चुके हैं लेकिन आज भी कई अनसुलझे रहस्य सवाल खड़े करने के लिए मजबूर कर देते हैं।
नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री स्पेल प्रोटेक्शन गार्ड (SPG) कवर क्यों हटा लिया गया था? क्यों इस बात का फैसला किया गया था कि उन्हें 20 मई 1991 को NSG कवर ही दी जाएगी जबकि हमले की धमकी महीनों पहले से मिल रहे थे। बता दें कि 21 मई 1991 को राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी।
ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिन्हें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) में राजीव गांधी की हत्या के मामले की जांच के प्रमुख जांच कर्ता के. राघोथमन मे उठाया है।
वनइंडिया से बातचीत में राघोथमन ने कहा कि 1 महीने के भीतर ही राजीव गांधी की सुरक्षा वापस ले ली गई, उन्हें दिल्ली पुलिस की ओर से कवर मिला हुआ था। जब उन्हें दी जा रही धमकियां प्रभावी थीं, ऐसे में उन्हें ऐसा कवर दिया जाना चाहिए था? अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी ऐसी आशंका जाहिर की थी और फिलिस्तीन ने भी यही संदेश भेजा था।
राजीव की हत्या के मामले में प्रमुख जांच कर्ता ने कहा कि मैं आपको बताता हूं कि धमकी अकल्पनीय थी। 20 मई 1991 को कैबिनेट ने फैसला किया कि NSG कवर दिया जाना चाहिए। यह उनकी हत्या के एक दिन पहले फैसला लिया गया था। जब धमकी का स्तर भयानक था तो ऐसे में यह फैसला लेने में इतना समय क्यों लगा?

कहां गया वीडियो?
इसके बाद राघोथमन ने कहा कि श्रीपेरंबदूर जहां राजीव गांधी की हत्या हुई थी वहां उनके पहुंचने से पहले वीडियो बनाया गया था। उनके आने के बाद का भी वीडियो है। लेकिन वो वीडियो है कहां? इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक का कहना है कि अब तक वो वीडियो सामने नहीं है। उन्होंने कहा कि उसे जानबूझकर छिपाया गया। राघोथमन ने कहा कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस महत्वपूर्ण टेप को छुपाया। आत्मघाती धनु टेप में थी। वास्तव में यह पत्रकार थे जिन्होंने खुफिया एजेंसियों की तुलना में जांच में हमारी अधिक सहायता की थी।

हत्या के बाद
हत्या के बाद रिचर्स एंड एनलसिस विंग (RAW) के प्रमुख ने कहा कि यह LTTE (लिट्टे) का किया हुआ नहीं है। जब यह मान लिया गया तो 30 मई को स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम को लिट्टे के खिलाफ लीड मिली। यही बात रॉ चीफ को भी बताई गई। उसके बाद उन्होंने कहा कि यह CIA ने किया है। RAW ने हमारी जांच को फेक न्यूज बताकर डायवर्ट कर दिया। गृह मंत्री ने संसद में भी बयान दिया कि इसमें CIA शामिल है। राघोथमन ने कहा कि मैं यह कह सकता हूं कि रॉ और आईबी ने अपराध को सुविधा प्रदान की।

नहीं मिली खुफिया मदद
इसके बाद राघोथमन ने कहा कि इस मामले की जांच के दौरान रॉ की मदद कभी नहीं मिली। उन्होंने हमें कभी सूचनाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। जब हम किट्टू (लंदन में रहने वाला लिट्टे आतंकी) की खोज कर रहे थे तो ब्रिटेन की सरकार ने उसे हमें सौंपने से इनकार कर दिया। हम कोशिश कर रहे थे कि हम उस हासिल कर लें लेकिन रॉ ने उसे मार डाला। लिट्टे प्रमुख रहे प्रभाकरण के अंतरराष्ट्रीय संबंधों की जानकारी हासिल करने के लिए किट्टू एक सीधा रास्ता था।

पीई का क्या हुआ?
राघोथमन ने इसके आगे कहा कि क्यों कोई उचित कार्रवाई की गई। वर्मा कमीशन की ओर से जो रिपोर्ट सौंपी गई थी उसें भी कहा गया था कि एजेंसियां सुस्त रहीं। इसके बाद एसआईटी द्वारा एक प्राइवेट इंक्वायरी पंजीकृत की गई। आज की तारीख में कोई नहीं जानता कि उसका क्या हुआ? वो संसद थी जिसने कमीशन रिपोर्ट पर कार्रवाई करने की सोची।

श्रीनिवासन को पकड़ने में देरी
राघोथमन ने कहा कि एजेंसियां जानती थी कि इस घटना में प्रमुख आरोपी श्रीनिवासन कोनानाकुंटे में छिपा हुआ है। यह जानकारी देर से साझा की गई। एजेंसियां लिट्टे की साइनाइड कल्चर से बेहद वाकिफ थी। एनएसजी वहां एक दिन देरी से पहुंची जहां श्रीनिवासन छिपा हुआ था। (शांतिवन में तात्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की समाधि स्थल पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी)












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