भारत और अमेरिका के लिए क्यों खास है ओबामा का दूसरा भारत दौरा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच मौजूद गर्मजोशी को सबने पालम एयरपोर्ट से लेकर हैदराबाद हाउस तक महसूस किया। लेकिन इसी गर्मजोशी के बीच यह सवाल भी उठता है कि आखिर भारत के लिए वाकई ओबामा का दौरा खास बन सकेगा या फिर यह सिर्फ एक फोटो खिंचवाने भर का इवेंट बनकर रह जाएगा।

भारत के पास आतंकवाद से लेकर अफगानिस्तान में उसके रोल तक कई ऐसे पहलु हैं, जिस पर अमेरिका के साथ बातचीत कर कोई हल निकल सकता है। वहीं खुद अमेरिका के लिए भी ओबामा का यह भारत दौरा काफी अहम है। चीन के साथ ही साथ पाकिस्तान अमेरिका के लिए भी एक बड़ी मुसीबत की वजह है। एक नजर डालिए उन अहम बातों पर जो दोनों देशों के लिए खासी अहमियत रखती हैं।
क्या है ओबामा से भारत और अमेरिका की ख्वाहि शें
- पाकिस्तान से प्रयोजित आतंकवाद को लेकर अमेरिका और सख्ती बरते।
- अफगानिस्तान में भारत की भूमिका को अमेरिका क्या रवैया रखता है।
- अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच के हालात।
- डिफेंस ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी यानी डीटीटीआई पर ठोस बातचीत।
- डीटीटीआई की की वजह से भारत को देश में डिफेंस इंडस्ट्रीयल मैन्यूफैक्चरिंग बेस बनाने में मदद मिलेगी।
- न्यूक्लियर डील पर कोई ठोस नतीजा निकले।
- अमेरिका, चीन को मुंहतोड़ जवाब देने के मकसद से भारत के साथ करीबी बढ़ रहा है।
- भारत और अमेरिका 10 वर्षों का डिफेंस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट साइन कर सकते हैं।
- इस एग्रीमेंट के बाद दोनों देशों के बीच मिलिट्री-टू-मिलिट्री संबंध और गहरे हो सकेंगे।
- अमेरिका चाहता है कि भारत ग्लोबल रिटेल, लीगल सर्विसेज और इंश्योरेंस जैसे सेक्टर्स के लिए अपने दरवाजे खोले।
- इसके अलावा अमेरिका भारत के क्लीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने में आगे आना चाहता है।
- ओबामा की ख्वाहिश है कि वह भारत को कार्बन इमीशन डील के लिए रजामंद करा पाएं।
- इन सबके बदले भारत अमेरिका से काउंटर टेररिज्म में मदद की उम्मीद करेगा।
- भारत चाहेगा कि अमेरिका उसे नागरिक और मिलिट्री जरूरतों के लिए अपनी हाई-टेक्नोलॉजी का प्रयोग करने दे।












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