Atal Bihari Vajpayee: अटल बिहारी ने क्यों नहीं की शादी? क्या करते थे किसी से मोहब्बत? कौन है बेटी नमिता?
Atal Bihari Vajpayee: आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती है, उन्हें देश एक ऐसे राजनेता, दूरदर्शी इंसान और संवेदनशील कवि के रूप में स्मरण करता है, जिन्होंने राजनीति को मानवीय मूल्यों, संवाद और कविता की गरिमा से जोड़ा। उनका जीवन सार्वजनिक सेवा, राष्ट्रनिर्माण और विचारशील अभिव्यक्ति का अनुपम उदाहरण है।
वो भारतीय राजनीति के ऐसे कीर्ति पुरुष थे, जिनके भाषणों पर विपक्ष के भी नेता तालियां बजाते थे, उनके राजनीतिक करियर की उपलब्धियों के साथ-साथ, उनका निजी जीवन विशेषकर उनका आजीवन अविवाहित रहना, अक्सर चर्चा में रहता है।

कई लोग आज भी उनकी 'अधूरी प्रेम कहानी' के बारे में जानने को उत्सुक रहते हैं और उनके मन में ये सवाल चलता रहता है कि अटल बिहारी ने आखिर शादी क्यों नहीं की? हालांकि उन्होंने कभी भी अपनी निजी भावनाओं या वैवाहिक स्थिति पर खुलकर विस्तार से बात नहीं की।
Atal Bihari Vajpayee को भी हुई थी मोहब्बत
उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा और जनहित के कार्यों को समर्पित करने का निर्णय लिया था, जिसकी वजह से उन्हें कभी भी पर्सनल लाइफ के लिए वक्त ही नहीं मिला और ये बड़ा कारण था उनके अविवाहित होने का, हालांकि अटल बिहारी वाजपेयी ने भी प्रेम किया था और अन्य युवकों की तरह उन्होंने भी अपने प्यार के साथ घर बसाने का सपना देखा था, उनके निर्मल प्रेम के बारे में जिक्र वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर ने अपनी किताब में भी किया है।
Atal Bihari Vajpayee ने राजुकमारी कौल के लिए लिखा लवलेटर
किताब के मुताबिक ये बात सन 1940 की है, जब अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर में विक्टोरिया कॉलेज में पढ़ा करते थे, उस कॉलेज में उनके साथ राजुकमारी कौल भी पढ़ा करती थीं। उस दौर में लड़के-लड़कियों के बीच कॉलेज में ज्यादा बातें नहीं होती थी लेकिन अटल और राजकुमारी में मित्रता हो गई, जो कि धीरे-धीरे प्रेम में तब्दील हो गई।
राजुकमारी कौल ने दिया खत का जवाब
अटल बिहारी ने अपने प्रेम का इजहार करते हुए एक पत्र लिखा था और उन्होंने उस लवलेटर को एक किताब में रखकर राजुकमारी कौल को भेजा था लेकिन उन्हें कभी भी उसका जवाब नहीं मिला। इसके कुछ वक्त बाद राजुकमारी कौल के पिता ने उनकी शादी प्रोफेसर ब्रिज नारायण कौल से करा दी, जिसके बाद अटल बिहारी का प्रेम अधूरा ही रह गया।
नमिता भट्टाचार्य को Atal Bihari Vajpayee ने लिया गोद
उन्होंने अपना पूरा जीवन देशसेवा में गुजार दिया, उनकी लाइफ में फिर किसी और के लिए जगह ही नहीं बची थी। 70 के दशक में अटल बिहारी ने नमिता भट्टाचार्य ( पहले कौल) को अपनी दत्तक पुत्री माना, जो कि राजकुमारी कौल की ही बेटी हैं। नमिता के पिता ब्रिज नारायण के निधन के बाद अटल ही कौल परिवार के संरक्षक बन गए थे। नमिता और उनके पति रंजन भट्टाचार्य और बेटी निहारिका ही अटल बिहारी के अंतिम समय में उनके साथ थे और उन्होंने ही उन्हें मुखाग्नी दी थी।












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