राजस्थान में कौन होगा भाजपा का चेहरा, वसुंधरा राजे-गजेंद्र सिंह शेखावत में टक्कर?
राजस्थान चुनाव को लेकर भाजपा की रणनीतिक तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। वसुंधरा राजे बहुत ज्यादा सक्रिय हो चुकी हैं। इस बार एक नाम और खूब चर्चा में है। यह हैं केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत।

राजस्थान में इस साल के आखिर में होने वाले चुनाव से पहले दिल्ली में पार्टी की अहम बैठकें चल रही हैं। पार्टी की सेंट्रल लीडरशिप प्रदेश में भाजपा की चुनावी रणनीति, संगठन में फेरबदल से लेकर अभियान समिति के चेहरे तक पर मंथन में जुटी है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भी दिल्ली बुलाया गया है और उनकी पार्टी के बड़े नेताओं से चर्चा भी हुई है।
2018 में हारी और 2019 में बंपर तरीके से जीती थी बीजेपी
2018 में राजस्थान से जब भाजपा के हाथ से सत्ता गई थी, तब वसुंधरा राजे ही मुख्यमंत्री थीं। तब वहां एक नारे की बहुत चर्चा हुई थी 'मोदी तुझसे बैर नहीं, वसुंधरा तेरी खैर नहीं।' चुनाव के बाद राजस्थान बीजेपी के हाथों से निकल गया। लेकिन, जब अगले ही साल 2019 में लोकसभा चुनाव हुए तो बीजेपी ने 25 में से 24 सीटें जीत लीं और एक पर उसकी सहयोगी को सफलता मिली।
राजस्थान भाजपा पर राजे का काफी प्रभाव
लेकिन, प्रदेश में पूर्व सीएम राजे की अहमियत को भाजपा नकार नहीं सकती। वह जिन नेताओं के साथ राजस्थान चुनाव के सिलसिले में चर्चा के लिए बातचीत के लिए दिल्ली आई हैं, उनमें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और पार्टी के महासचिव (संगठन) बीएल संतोष शामिल हैं।
राजस्थान चुनाव को लेकर हो सकते हैं बड़े ऐलान
राजस्थान में बीजेपी सतीष पूनिया की जगह सीपी जोशी को पहले ही प्रदेश अध्यक्ष बना चुकी है। लेकिन, अब वहां चुनाव के हिसाब से पार्टी संगठन को पुनर्गठित करने की कवायद चल रही है। जानकारी के मुताबिक इसके अलावा पार्टी राज्य के लिए चुनाव प्रभारी और चुनाव अभियान की प्रभारी का भी ऐलान जल्द कर सकती है, ताकि बीजेपी कार्यकर्ता अभी से चुनाव के काम में लग जाएं।
पीएम मोदी के साथ क्षेत्रीय चेहरे को भी प्रोजेक्ट करने पर जोर
खबरों के मुताबिक वसुंधरा राजे की नजर फिलहाल चुनाव अभियान की प्रभारी के पद पर ही लगी हुई है। गौरतलब है कि बीजेपी में यह जिम्मेदारी जिसे मिलती है, आमतौर पर उसे ही संबंधित चुनाव में पार्टी का प्रमुख चेहरा (सीएम या पीएम उम्मीदवार) माना जाता है। वैसे भी कर्नाटक चुनाव के बाद बीजेपी में नेताओं का एक वर्ग है, जिसे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ एक मजबूत क्षेत्रीय चेहरा का भी होना आवश्यक है और शायद राजे उसमें खुद को फिट देखती हैं।
वसुंधरा राजे की दावेदारी के पक्ष में क्या है?
राजस्थान के पूर्व गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया को एक समय में राजे के बाद भाजपा का सबसे कद्दावर चेहरा माना जाता था। लेकिन, पीएम मोदी की सरकार उन्हें पहले ही असम का राज्यपाल बनाकर राजे की संभावित चुनौती से दूर कर चुकी है। राजे पिछले कुछ समय से राजस्थान के विभिन्न हिस्सों का दौरा भी कर रही हैं और उनके बारे में कहा जाता है कि उनकी राजनीतिक अपील प्रदेश भर में है।
जहां तक जातिगत समीकरण की बात है तो राजे खुद ग्वालियर राज घराने के क्षत्रीय (राजपूत) परिवार से आती हैं और वह धौलपुर के जाट राज घराने की बहू भी हैं। खुद उनका दावा रहा है कि राजस्थान के सभी 36 समुदायों में उनकी पैठ है।
गजेंद्र सिंह शेखावत के पक्ष में क्या है?
लेकिन, राजे को इस बार भाजपा के अंदर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से टक्कर मिल सकती है। जोधपुर से बीजेपी सांसद शेखावत को पीएम मोदी ने अपनी कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी दे रखी है। इस समय की सेंट्रल लीडरशिप से उनकी ट्यूनिंग राजे के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर बताई जाती है।
सीकर जिले में राजपूत परिवार में जन्मे शेखावत के पक्ष में यह बात जाती है कि उन्होंने पश्चिमी राजस्थान और खासकर जोधपुर में सीएम अशोक गहलोत के दशकों वर्चस्व को लोकसभा चुनावों में बहुत बुरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस वजह से उन्हें उनके मुकाबले भाजपा का स्वाभाविक चेहरा भी माना जा रहा है। जबकि, राजे और गहलोत के बीच वैसा राजनातिक विरोध कम ही नजर आता है।
किसी को सीएम उम्मीदवार प्रोजेक्ट करने की संभावना नहीं
वैसे यह संभावना बहुत ही कम है कि बीजेपी राजस्थान में किसी नेता को औपचारिक तौर पर सीएम उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट करेगी। पार्टी ने कर्नाटक में भी इस फैसले से परहेज किया था, अलबत्ता उसका उसे कोई फायदा नहीं मिला। यही वजह कि वसुंधरा फिलहाल चुनाव अभियान समिति का दायित्व संभालने पर ही ज्यादा जोर लगा रही हैं।












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