कौन हैं जहूर अहमद भट, सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 370 पर ऐसा क्या कहा कि हो गए सस्पेंड?

Article 370: जम्मू कश्मीर में एक सीनियर लेक्चरर को सस्पेंड करने के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है और सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से कहा कि वो एलजी मनोज सिन्हा से इस बारे में बात करें।

दरअसल, जम्मू कश्मीर के एक सरकारी कॉलेज में सीनियर लेक्चरर जहूर अहमद भट, अनुच्छेद 370 हटाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट में याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए थे, जिसके बाद जम्मू कश्मीर शिक्षा विभाग ने उन्हें सस्पेंड कर दिया। आइए जानते हैं कि जहूर अहमद भट कौन हैं और उनके निलंबर का पूरा विवाद क्या है?

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पॉलिटिकल साइंस के लेक्चरर हैं जहूर अहमद भट
श्रीनगर के जवाहर नगर में गवर्नमेंट हायर सेकेंड्री स्कूल में पॉलिटिकल साइंस के लेक्चरर होने के साथ-साथ जहूर अहमद भट एक वकील भी हैं। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर बीते बुधवार को सुनवाई के दौरान जहूर अहमद याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट में पेश हुए। इसके बाद शुक्रवार को जम्मू कश्मीर शिक्षा विभाग की तरफ से आदेश जारी हुआ और जहूर अहमद को सस्पेंड कर दिया गया। आदेश में कहा गया कि जहूर अहमद को जम्मू-कश्मीर सीएसआर, जम्मू-कश्मीर सरकारी कर्मचारी (आचरण) नियम 1971 के प्रावधानों के उल्लंघन का दोषी माना गया है और इस मामले में जांच पूरी होने तक उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जाता है।

जहूर अहमद ने आखिर सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा था?
'द वायर' की खबर के मुताबिक, अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध करते हुए जहूर अहमद ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, 'मैं जम्मू कश्मीर में छात्रों को भारतीय राजनीति पढ़ाता हूं। लेकिन, 2019 के बाद से मेरे लिए इस खूबसूरत संविधान के बारे में पढ़ाना बहुत मुश्किल है। जब मेरे छात्र मुझसे पूछते हैं कि 2019 के बाद क्या हम एक लोकतंत्र हैं, तो मेरे लिए जवाब देना मुश्किल होता है। जम्मू कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने 4 अगस्त को आश्वासन दिया था कि अनुच्छेद 370 को नहीं हटाया जाएगा, लेकिन इसके बावजूद आधी रात में कर्फ्यू लगाया गया और पूर्व मुख्यमंत्रियों को हिरासत में ले लिया गया।'

जहूर अहमद ने आगे कहा, 'जम्मू कश्मीर को मिला विशेष दर्जा हटा दिया गया और भारत के संविधान की नैतिकता का उल्लंघन करते हुए एक राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया। इस कदम को उठाने से पहले जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लोगों की सहमति या राय को बिल्कुल नजरअंदाज किया गया और लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ। यह कदम पूरी तरह से संविधान की सर्वोच्चता और संघीय ढांचे के खिलाफ था।'

कपिल सिब्बल ने उठाया मुद्दा
सोमवार को सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने जहूर अहमद के निलंबन का मामला कोर्ट के सामने रखा और कहा कि एक शिक्षक, जो न्यायालय में आया और एक याचिका पर कुछ ही मिनट की बहस की, उसे 25 अगस्त को सस्पेंड कर दिया गया। उसने दो दिन की छुट्टी ली थी, लेकिन जब वो वापस लौटा तो वो सस्पेंड हो चुका था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि इस मामले को देखें कि आखिर क्या हुआ है। कोई कोर्ट में आया और उसे सस्पेंड कर दिया गया, आप एलजी से बात कीजिए।'

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