जानें कौन हैं सचिन वाजे, जिनकी गिरफ्तारी पर मचा है हंगामा, पुलिस विभाग से 16 सालों तक थे सस्पेंड

जानें कौन हैं सचिन वाजे, जिनकी गिरफ्तारी पर मचा है हंगामा, पुलिस विभाग से 16 सालों तक थे सस्पेंड

मुंबई: मुंबई पुलिस के असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शनिवार (13 मार्च) की शाम 12 घंटे तक पूछताछ करने के बाद गिरफ्तार कर लिया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरपर्सन मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटक से भरे गाड़ी रखने की साजिश और गवाह मनसुख हिरेन की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। एंटीलिया केस को एनआईए को ट्रांसफर करने से पहले इस केस के सचिन वाजे प्रमुख जांचकर्ता थे। सचिन वाजे के खिलाफ आईपीसी की धारा 285, 465, 473, 506(2), 120 बी के तहत केस दर्ज किया गया है। उद्धव ठाकरे सरकार ने पिछले हफ्ते ही सचिन वाजे को मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट से बाहर किया था। ऐसा पहली बार नहीं है जब सचिन वाजे विवादों में आए हों, इससे पहले भी वो इस तरह केस और विवादों में फंस चुके हैं। आइए जानें कौन हैं सचिन वाजे और कब-कब फंसे वो विवादों में?

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    Antilia Case: जानिए कौन हैं Sachin Vaze, जिन्हें NIA ने गिरफ्तार किया है | वनइंडिया हिंदी
    सचिन वाजे की गिरफ्तारी के बाद एनआईए ने क्या कहा?

    सचिन वाजे की गिरफ्तारी के बाद एनआईए ने क्या कहा?

    हिन्दुस्तान टाइम्स ने एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से लिखा है, ''सचिन वाजे 25 फरवरी 2021 को कारमाइकल रोड ( मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के पास) पर विस्फोटक से भरे स्कॉर्पियो को लगाने वाले समूह का हिस्सा हैं।" अधिकारी ने यह भी दावा किया है कि सचिन वाजे ने इस केस में अपनी भूमिका कबूल कर ली है, लेकिन इस स्तर पर अधिक जानकारी साझा करने से अधिकारी ने इनकार कर दिया।

    जो कार मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर खड़ी थी उसके मालिक के तौर पर ठाणे में एक ऑटो पार्ट्स डीलर मनसुख हिरेन का नाम सामने आया था। उसने पुलिस को इस बात की जानकारी दी थी कि जो कार मुकेश अंबानी के घर के बाहर खड़ी थी वो इस घटना से एक हफ्ते पहले ही चोरी हो गई थी। इसके बाद 5 मार्च 2021 को मनसुख हिरेन को मुंबई में एक नाले में मृत पाया गया था। मनसुख हिरेन की पत्नी विमला हिरेन ने पति की हत्या के लिए सचिन वाजे को दोषी ठहराया है। विमला हिरेन ने दावा किया है कि पति ने नवंबर में पुलिस अधिकारी को एसयूवी दी थी, जिसे उन्होंने फरवरी के पहले सप्ताह में वापस कर दिया था।

    सब-इंस्पेक्टर से लेकर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट तक

    सब-इंस्पेक्टर से लेकर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट तक

    सचिन वाजे 1990 में एक सब-इंस्पेक्टर के रूप में महाराष्ट्र पुलिस बल में शामिल हुए थे। सचिन वाजे की पहली पोस्टिंग गदरौली के माओवाद प्रभावित क्षेत्र में थी। उन्हें दो साल बाद ठाणे शहर पुलिस में शिफ्ट कर दिया गया था। कुछ ही सालों में वो क्रिमिनिल केसों की बेहतरीन जांच करने वाले पुलिस ऑफिसर के रूप में पहचाने जाने लगे। उसके बाद उन्हें ठाणे पुलिस की अपराध शाखा के विशेष दस्ते में शामिल किया गया,जहां उन्होंने एक एनकाउंटर के दौरान ख्याति प्राप्त की।

    कहा जाता है कि इसके बाद कई ऐसे एनकाउंटर को सचिन वाजे ने अंजाम दिया। जिसके बाद उन्हें मुंबई पुलिस का एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहा जाने लगा। बताया जाता है कि सचिन वाजे तकरीबन 60 एनकाउंटर कर चुके हैं।

    ख्वाजा यूनुस मामले में फंसने के बाद विवादों में आए सचिन वाजे

    ख्वाजा यूनुस मामले में फंसने के बाद विवादों में आए सचिन वाजे

    सचिन वाजे को साल 2000 में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की पवई इकाई में स्थानांतरित कर दिया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान तीन अन्य पुलिसकर्मियों के साथ सचिन वाजे पर 2 दिसंबर, 2002 को घाटकोपर विस्फोट के आरोपी ख्वाजा यूनुस की हत्या का आरोप लगा था। 27 वर्षीय ख्वाजा यूनुस सॉफ्टवेयर इंजीनियर था। 2002 में घाटकोपर में हुए बम धमाके के मामले में ख्वाजा यूनुस को मुंबई क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया और बाद में पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो गई थी। पहले ये बात सामने आई थी कि वो फरार हो गया था। लेकिन सीआईडी ने इस बात का खुलासा किया कि पुलिस कस्टडी में पिटाई के दौरान उसकी मौत हुई है। उसके बाद सीआईडी ने सचिन वाजे पर और तीन अन्य पुलिसकर्मियों राजेंद्र तिवारी, राजाराम निकम और सुनील देसाई पर 3 मार्च 2004 को हत्या और सबूत नष्ट करने का आरोप लगाया।

    पुलिस विभाग से सस्पेंड होने से लेकर शिवसेना में शामिल होने तक

    पुलिस विभाग से सस्पेंड होने से लेकर शिवसेना में शामिल होने तक

    ख्वाजा यूनुस हत्या मामले में केस दर्ज होने के बाद सचिन वाजे को मार्च 2004 में ही महाराष्ट्र पुलिस सेवा विभाग से निलंबित कर दिया गया था। महाराष्ट्र पुलिस विभाग से 2004 में सस्पेंड होने के बाद सचिन वाजे ने 30 नवंबर 2007 में महाराष्ट्र पुलिस विभाग से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन उनका इस्तीफा नामंजूर कर दिया गया था। जिसके पीछे ये तर्क दिया गया था कि उनके ऊपर जांच हो रही है। इसके बाद साल 2008 में सचिन वाजे शिवसेना में शामिल हो गए थे।

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने हाल ही में कहा था कि सचिन वाजे 2008 तक शिवसेना के सदस्य थे लेकिन अब उनका पार्टी से संबंध नहीं है। ठाकरे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा था, "सचिन वाजे 2008 तक शिवसेना में थे लेकिन उन्होंने अपनी सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया और अब उनका शिवसेना से कोई संबंध नहीं है।"

    सस्पेंड होने के 16 सालों बाद 2020 में फिर से मुंबई पुलिस में की वापसी

    सस्पेंड होने के 16 सालों बाद 2020 में फिर से मुंबई पुलिस में की वापसी

    साल 2004 में पुलिस विभाग से सस्पेंड होने के बाद 6 जून, 2020 को सचिन वाजे को फिर से पुलिस बल में बहाल किया गया था। सचिन वाजे क्राइम ब्रांच की खुफिया इकाई सीआईयू में सहायक पुलिस निरीक्षक के पद पर वापसी की। उसके बाद सचिन वाजे ने कुछ हाई-प्रोफाइल मामलों को संभाला था। जिसमें टेलीविजन रेटिंग पॉइंट (टीआरपी) में हेराफेरी का मामला शामिल है। जिसमें ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी पार्थो दासगुप्ता सहित 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उसके अलावा रिपब्लिक टीवी से जुड़ा मामला, जिसपर टीआरपी चोरी का आरोप लगा था।

    सचिन वाजे उस पुलिस टीम का भी हिस्सा थे जिसने अन्वय नाइक की आत्महत्या के मामले में नवंबर 2020 में न्यूज एंकर और पत्रकार अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार किया था। नाइक और उसकी मां कुमुद नाइक मई 2018 में मृत पाए गए थे। इसके अलावा 28 दिसंबर, 2020 को सचिन वाजे ने फेमस स्पोर्ट्स कार डिजाइनर दिलीप छाबड़िया को भी गिरफ्तार किया था। सचिन वाजे उस केस को भी देख रहे थे जो 2016 से कंगना रनौत और ऋतिक रोशन के बीच चला आ रहा है।

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