कौन है PAK का खालिस्तानी चेहरा Gopal Singh Chawla? जुड़ी है भारत में ISI जासूसी की डोर! हाफिज से जुड़े तार
India Pakistan Tension: भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में जब भी खालिस्तान, ISI और आतंकवाद का जिक्र होता है, एक नाम बार-बार सामने आता है - गोपाल सिंह चावला। ननकाना साहिब में रहने वाला यह शख्स, सिर्फ पाकिस्तान में सिखों की धार्मिक गतिविधियों से नहीं जुड़ा, बल्कि भारत-विरोधी साजिशों और खालिस्तानी नेटवर्क का भी एक बड़ा मोहरा है।
3 जून 2025 को पंजाब के तरनतारन से गिरफ्तार गगनदीप सिंह को लेकर जांच में सामने आया कि वो पाकिस्तानी खालिस्तान समर्थक गोपाल सिंह चावला और ISI के लिए भारत में सैन्य मूवमेंट की जानकारी भेज रहा था। यह पहली बार नहीं है, जब चावला इस तरह की जासूसी या देशविरोधी गतिविधियों से जुड़ा है। आइए जानते कौन है गोपाल सिंह चावला?

Who is Gopal Singh Chawla: कौन है गोपाल सिंह चावला?
- जन्म: 1980, खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान
- पेशा: होम्योपैथिक डॉक्टर (फैसलाबाद से पढ़ाई), अब ननकाना साहिब में रहता है
- संगठन: पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGPC) का पूर्व महासचिव
- एनजीओ: पंजाबी सिख संगत के चेयरमैन
- पहचान: खालिस्तान समर्थक और भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय चेहरा
हाफिज सईद से गहरा कनेक्शन
गोपाल सिंह चावला की हाफिज सईद के साथ कई तस्वीरें वायरल हो चुकी हैं। खुद चावला ने कहा कि 'हाफिज पाकिस्तान का नागरिक है और पाकिस्तान के थार रेगिस्तान के हिंदू उसे देवता मानते हैं। यह बयान भारत के लिए बेहद आपत्तिजनक था, क्योंकि हाफिज वही आतंकी है जो 26/11 मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड है।
ISI और खुफिया नेटवर्क का हिस्सा
- भारत में फेसबुक के जरिए भारतीय जवानों से संपर्क कर जानकारी जुटाने की कोशिश
- ISI के लिए भारतीय सिखों को कट्टरपंथी बनाने और जासूसी के लिए तैयार करने का आरोप
- गुरुद्वारों में भारत विरोधी नारेबाजी और खालिस्तान के पोस्टर लगवाने में भी संलिप्त
करतारपुर कॉरिडोर में विवाद
2018 में करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में चावला की पाक आर्मी चीफ जनरल बाजवा के साथ तस्वीर वायरल हुई थी। भारत ने इसका कड़ा विरोध किया था, जिसके बाद चावला को PSGPC की करतारपुर समिति से हटा दिया गया।
'खालिस्तान जरूर बनेगा' का दावा
एक इंटरव्यू में चावला ने कहा था कि हमें यकीन है कि खालिस्तान जरूर बनेगा और कश्मीर आजाद होकर रहेगा... पाकिस्तान से हमारा वही रिश्ता है जो मुस्लिमों का सऊदी अरब से। उसका सपना है कि खालिस्तान और पाकिस्तान के बीच कोई सरहद ना हो। भारत में सिखों को जिस 'आजादी' की कमी है, वो उसे पाकिस्तान में मिलती है - ऐसा वो दावा करता है।
धार्मिक मंच से देशविरोध की राजनीति
गोपाल सिंह चावला की पूरी भूमिका ये दिखाती है कि कैसे पाकिस्तान धार्मिक रिश्तों की आड़ में खालिस्तानी एजेंडा और भारत विरोधी साजिशों को अंजाम देता है। करतारपुर जैसे पवित्र धार्मिक स्थानों को भी राजनीतिक हथियार बना लिया गया है। चावला जैसे चेहरे पाकिस्तान की नीयत को उजागर करते हैं, और यही कारण है कि भारत को न सिर्फ सीमाओं पर, बल्कि सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सतर्क रहना होगा।












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