कांग्रेस में नारद मुनि कौन हैं? G-23 के नेताओं ने सोनिया गांधी के सामने जिनपर निकाली भड़ास
नई दिल्ली, 14 मार्च: कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की आवाज उठाने वाले जी-23 के नेताओं का कहना है कि उनकी मांगों को पार्टी के कुछ लोग विद्रोह का रंग देते हैं और इस तरह से इसे पेश करने की कोशिश करते हैं, जैसे कि वे बीजेपी के लिए काम कर रहे हों। जी-23 के नेताओं ने कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के सामने कहा है कि 'हम जीवन भर कांग्रेसी बने रहेंगे।' कांग्रेस की यह बैठक रविवार को हुई थी, जिसमें जी-23 के नेताओं ने उनके खिलाफ कथित अफवाह उड़ाने और उनका अपमान करने वाले पार्टी के कुछ नेताओं की तुलना नारद मुनि से कर दी है।

कांग्रेस की बैठक में जी-23 के तीन नेता शामिल हुए
कांग्रेस के जिन ग्रुप-23 के नेताओं ने 2020 में सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर संगठनात्मक चुनाव करवाने समेत संगठन को मजबूत करने के लिए सुझाव भेजे थे, उन्हें ही जी-23 कहकर बुलाया जाता है। हालांकि, रविवार की बैठक में इनमें से सिर्फ तीन नेता ही मौजूद थे- गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और मुकुल वासनिक। हालांकि, वासनिक ने चिट्ठी के खुलासे के कुछ समय बाद ही अपनी गुस्ताखी मानकर पलटी भी मार ली थी। रविवार की बैठक में भी इन सभी नेताओं ने हमेशा की तरह पांचों राज्यों में कांग्रेस की करारी हार के बाद एकबार फिर से सोनिया गांधी के नेतृत्व में पूरा भरोसा जताया है।

कांग्रेस में नारद मुनि कौन हैं?
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सीडब्ल्यूसी की बैठक में जी-23 के नेताओं ने पार्टी आलाकमान से कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी रहनी चाहिए कि अफवाह फैलाने वाले और नारद मुनि टाइप लोग पार्टी को मजबूत करने के लिए दिए जाने वाले उनके सुझावों को गलत तरीके से पेश करते हैं। सूत्रों के हवाले बताया गया है कि आनंद शर्मा ने इस ओर पार्टी का ध्यान दिलाया है कि यह हिंदी हार्डलैंड में बहुत बुरा प्रदर्शन कर रही है। पार्टी को फिर से पुनर्जीवित करने के लिए इसे अपनी मूल विचारधारा पर अडिग रहना चाहिए और किसी भी 'समुदाय के कट्टरवाद या सांप्रदायिकता' के चक्कर में नहीं फंसना चाहिए।
'बहस करना तो नेहरू के जमान से कांग्रेस की परंपरा'
इस मौके पर गुलाम नबी बोले कि वे तो पार्टी को मजबूत करने के लिए कुछ सुझाव दे रहे थे, लेकिन पार्टी के अंदर के कुछ लोगों ने उसे ऐसे पेश किया, जैसे कि यह बीजेपी की ओर से करवाया जा रहा हो। वो बोले कि ईमानदार बातचीत और चर्चा तो जवाहर लाल नेहरू के जमाने से कांग्रेस की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि 'तब तो गर्मागरम चर्चा, बहस और माथापच्ची वाले सत्र में वॉकआउट तक होते थे।' हर चुनाव में हार के बाद कांग्रेस की इस तरह की बहुचर्चित बैठक की तरह इसबार यह चर्चा भी थी कि जी-23 ने मुकुल वासनिक को पार्टी अध्यक्ष बनाने का सुझाव दिया था, जिसे नामंजूर कर दिया गया। यहां तक कहा जा रहा था कि गांधी परिवार इस बैठक में इस्तीफे की पेशकश करेगा। लेकिन, इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए पार्टी वर्किंग कमिटी ने सोनिया से ही गुजारिश की कि वही इसकी अगुवाई करते रहें और सभी सदस्यों ने उनके नेतृत्व पर पूरा भरोसा जताया है।
हार के लिए गांधी परिवार जिम्मेदार नहीं- खड़गे
इस बीच आज कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि 'हम सब ने सोनिया गांधी से कहा कि 5 राज्यों में हार के लिए वह अकेले जिम्मेदार नहीं हैं, हर राज्य के नेता और सांसद जिम्मेदार हैं, गांधी परिवार नहीं। हमने फिर से उनमें अपना विश्वास जताया है, इस्तीफे की पेशकश का तो सवाल ही नहीं उठता।' गौरतलब है कि इस चुनाव को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा फ्रंट से लीड करते हुए दिख रहे थे और यूपी की कमान तो वाड्रा के हाथों में औपचारिक तौर पर सौंपी गई थी और उन्होंने खुद को मुख्य चेहरा बताया भी था।
हम पहले से और ज्यादा बेहतर करेंगे- खड़गे
खड़गे ने बैठक के बारे में बताया कि 'पार्टी को मजबूत करने की रणनीति के बारे में चर्चा की गई.....हम बीजेपी और उसकी विचारधारा से लड़ेंगे......अगले चुनावों में हम अपनी विचारधारा और उम्मीदों को आगे रखेंगे, हम पहले से बहुत ही ज्यादा बेहतर करेंगे।' हालांकि, पार्टी की ओर से उन 'नारद मुनियों' के नाम का खुलासा नहीं किया गया है। लेकिन, चर्चा के मुताबिक ये मुख्य रूस से तीन नेता हैं, जो राहुल गांधी के बहुत ही खास हैं।












Click it and Unblock the Notifications