कौन हैं मेघा राजगोपालन, मुसलमानों पर चीन के झूठ का पर्दाफाश करने के लिए मिला है पुलित्जर पुरस्कार
नई दिल्ली, 13 जून: चीन ने उइगर मुसलमानों को सभ्य बनाने के नाम पर डिटेंशन कैंपों में उनका क्या हाल बना रखा है, इसकी पोल भारतीय मूल की युवा और होनगार पत्रकार मेघा राजगोपालन ने खोलकर रख दी है। चीन जैसे देश की सच्चाई दुनिया के सामने लाने के लिए मेघा ने जिस साहस का परिचय दिया, उसकी पहले से काफी तारीफ हो रही थी अब पत्रकारिता के क्षेत्र में सबसे बड़े पुरस्कार माने जाने वाले पुलित्जर से नवाजकर उन्हें वह सम्मान दिया गया है, जिसकी वो हकदार हैं। कौन हैं मेघा राजगोपालन और भारत से उनका क्या नाता है, इस रिपोर्ट में उसी को ढूढ़ने की कोशिश की गई है।

भारतीय मूल की अंतरराष्ट्रीय पत्रकार हैं मेघा राजगोपालन
लंदन में रहने वाली मेघा राजगोपालन भारतीय मूल की अंतरराष्ट्रीय पत्रकार हैं। वो वजफीड न्यूज से जुड़ी हुई हैं और बहुत ही कम उम्र में ही अपनी पत्रकारिता की वजह से पुलित्जर पुरस्कार से पहले भी कई पुरस्कार जीत चुकी हैं। इस समय वह वजफीड न्यूज के लिए चीन और थाईलैंड से रिपोर्टिंग करने के साथ-साथ इजरायल और फिलिस्तीन के लिए भी रिपोर्टिंग करती हैं। इससे पहले वो चीन में इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की पॉलिटिकल कॉरेसपोन्डेंट भी रह चुकी हैं। इतने कम वक्त में उन्होंने पत्रकारिता की दुनिया में कितनी महारत हासिल कर ली है, उसका अंदाजा इसी से लगता है कि वो एशिया और मिडिल ईस्ट के 23 देशों से रिपोर्टिंग कर चुकी हैं, जिनमें उत्तर कोरिया के परमाणु संकट से लेकर अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया भी शामिल है।

तमिल और चाइनीज भाषाओं में भी पारंगत
भारतीय माता-पिता की संतान मेघा राजगोपालन का बचपन अमेरिका में वॉशिंगटन डीसी के पास मैरीलैंड में बीता है। मेघा से पहले उनके परिवार का कोई भी सदस्य मीडिया में नहीं रहा है, लेकिन उन्हें उनके करियर में परिवार से इतना समर्थन मिला है कि वो आज इस मुकाम पर पहुंचीं हैं। दक्षिण भारत में जन्मीं इंडियन-अमेरिकी राजगोपालन की उम्र महज 29 साल बताई जाती है और वह अंग्रेजी के अलावा तमिल और मेंडरिन चाइनीज भाषा में भी पारंगत हैं। उन्होंने 2008 में यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के फिलिप मेरिल कॉलेज से जर्नलिज्म किया है। पत्रकारिता के अलावा उन्हें जिस एक और चीज में काफी दिलचस्पी है, वह है-म्यूजिक। ट्विटर पर उनके 47.2 हजार फॉलोअर्स हैं और वो इस वक्त बजफीड न्यूज की सीनियर कॉरेस्पॉन्डेंट हैं।

पहले भी कई पुरस्कार पा चुकी हैं मेघा
पत्रकारिता के क्षेत्र में सबसे बड़ा पुरस्कार माने जाने वाले पुलित्जर से पहले 2018 में उन्हें ह्यूमैन राइट्स प्रेस अवॉर्ड और 2019 मिरर अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है। वो चीन के पश्चिमी इलाके में उइगर मुसलमानों के डिटेंशन कैंप का पता लगाने और वहां जाने वाली पहली पत्रकार थीं, जिसके लिए उन्हें ह्यूमैन राइट्स प्रेस अवॉर्ड दिया गया था। जबकि, मिरर अवॉर्ड उन्हें फेसबुक और श्रीलंका में धार्मिक हिंसा के लिंक को लेकर उनकी इंवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए दिया गया था। वो बीजिंग में फुलब्राइट फेलो और वॉशिंगटन डीएस में न्यू अमेरिका फाउंडेशन में रिसर्च फेलो भी रह चुकी हैं। 2019 में उन्हें एशिया 21 यंग लीडर के तौर पर भी चुना जा चुका है।

मुसलमानों पर चीन की पोल खोलने के लिए मिला पुलित्जर पुरस्कार
मेघा राजगोपालन को पुलित्जर पुरस्कार चीन के शिंजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों के लिए बनाए गए विशाल डिटेंशन कैंपों का पर्दाफाश करने के लिए दिया गया है। चीन ने गुप्त रूप से वहां सैकड़ों कैंप बनाकर रखे हैं, जहां उइगर मुसलमानों को तरह-तरह की यातनाएं देने की रिपोर्ट पहले से आती रही हैं और चीन उससे इनकार करता रहा है। इन कैंपों में लाखों उइगर मुसलमानों को बंदी बनाकर रखा जाता है, जिसे चीन उन्हें सभ्य बनाने की कवायद बताता आया है। लेकिन, मेघा ने अपनी रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करके चीन की पोल खोल कर रख दी है, कि कैसे वहां लाखों उइगर मुसलमानों को जानवरों की तरह प्रताड़ित किया जाता है।

पिता ने ट्विटर पर दी इस तरह से शुभकामना
इस पुरस्कार के बाद मेघा ने उन्हें बधाई देने के लिए उनके पिता से मिले शुभकामना संदेश का स्क्रीनशॉट साझा किया है और इस बात का जिक्र किया है कि बेटी की इतनी बड़ी कामयाबी पर एक भारतीय पिता की प्रतिक्रिया देखिए- इस चैट में उनके पिता खबर मिलने पर लिखते हैं, 'बधाई हो मेघा। मम्मी ने अभी फॉरवर्ड किया है। पुलित्जर प्राइज। बहुत बढ़िया।' इस पर मेघा अपने पिता को जवाब देती हैं, 'थैंक्स'। मेघा ने पिता से हुई चैटिंग के स्क्रीनशॉट को ट्वीट कर लिखा है, 'एक भारतीय पिता की प्रतिक्रिया समझिए।' उनका यह ट्वीट खूब वायरल हो रहा है और लोग उसपर अपने-अपने तरह से प्रतिक्रियाएं दे रहे है।












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