जेएनयू में अफजल गुरु को बना दिया शहीद अफजल गुरु!
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में संसद हमले में फांसी पर चढ़ाये गए अफजल गुरु को शहीद बनाने की कवायद चल रही है। इसे आप क्या कहेंगे ? आतंकवादी, जिसकी भूमिका संसद पर हमले में प्रमाणित हो चुकी है अगर उसे शहीद बताया जाता है तो फिर इनको आतंकवाद का समर्थन करने वाला क्यों न करार दिया जाए?
हाल ही में डेमोक्रैटिक स्टूडेंट यूनियन (डीएसयू) की ओर से एक कार्यक्रम में इस तरह की कोशिश हुई। जेएनयू प्रशासन कह रहा है कि उसकी इजाजत के बिना यह आयोजित हुआ। तो उसे रोकने के लिए प्रशासन ने क्या किया?
अफजल का साथी गिलानी
अफजल के साथ ही सह अभियुक्त रहे और सबूतों के अभाव में रिहा हुए प्रोफेसर एसएआर गिलानी वहां मुख्य वक्ता थे।
गिलानी कह रहे हैं कि लोकतंत्र में बोलने की आजादी पर हमला हुआ है। आतंकवादी के समर्थन में बोलना भी आतंकवाद का समर्थन है और भारतीय कानून में यह अपराध है। यह बोलने की आजादी पर नहीं, भारत के विरुद्ध जहर उगलने का विरोध है, जो कि हर दृष्टि से उचित है।
लोहा लिया
खैर, वहां के छात्रों के एक वर्ग ने ही इनसे लोहा लिया। पहले तो कार्यक्रम का विरोध किया। प्रशासन को कुछ करते न देख कार्यक्रम को रोकने की कोशिश की। कार्यक्रम शुरू होते ही ताप्ती हॉस्टल की बिजली आपूर्ति काट दी। गिलानी के खिलाफ नारे लगाये गये।
गिलानी का विरोध
विरोध करने वाले छात्रों ने इतना तो किया कि शांति से कार्यक्रम होने नहीं दिया। गिलानी का इतना तगड़ा विरोध हुआ कि कार्यक्रम के खत्म होने के बाद ह्यूमन चेन बनाकर गाड़ी तक ले जाया गया। 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले में अदालत ने अफजल गुरु और शौकत हुसैन के साथ-साथ गिलानी को भी सजा सुनाई थी। हालांकि, उच्च न्यायलय ने सबूतों के अभाव में गिलानी को बरी कर दिया था।
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गिलानी का तर्क
खैर, गिलानी कह रहे हैं कि मुझे मारने की साजिश थी और इसके पीछे संघ परिवार का हाथ है। इसके अलावा और वे कह भी क्या सकते हैं। संघ परिवार का नाम लेने से उसके विरोधी संगठनों का समर्थन मिल जाता है। वे कह रहे हैं कि मैं तो जेएनयू में डिबेट के लिए गया था, मगर वहां अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लोगों ने मुझ पर हमला करने के मकसद से घेर लिया।
संसद पर हमला करने वाला
वरिष्ठ लेखक अवधेश कुमार ठीक कह रहे हैं कि आप अफजल गुरु, जिसकी भूमिका संसद पर हमले में थी, जो घोषित तौर पर आतंकवादी था, उसे शहीद मानने वाले कार्यक्रम में जा रहे हैं और कश्मीर की आजादी के समर्थन में बोल रहे हों तो यह देश विरोधी हरकत है।













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