जीतन राम मांझी: बाल चपरासी से लेकर मुख्यमंत्री तक का सफर

पटना। बिहार में जारी सियासी भूचाल को शांत करने के लिए नीतीश कुमार सरकार में दलित कार्ड खेल दिया है। अनुसूचित जाति, जनजाति कल्याण मंत्री जीतन राम मांझी के हाथों में बिहार की सत्ता की बागडोर थमा दी गई है। मांझी बिहार के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। आज ही शपथग्रहण होगा। कहा जा रहा है कि माझी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तरह रोबोट के रूप में काम करेंगे, जिनका रिमोट नीतीश कुमार के हाथ में होगा।

खैर हम यहां माझी की काबीलियत पर उंगली नहीं उठा रहे हैं, क्योंकि कभी दफ्तरों में फाइलें उठाने से लेकर चाय पिलाने का काम करने वाले माझी आज मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, जाहिर है अबतक का उनका यह सफर आसान नहीं रहा होगा। [पढ़ने के बाद शेयर करें, ताकि लोगों को मिले प्रेरणा]

माझी ने बचपन तो मानो जिया ही नहीं।। होश संभालते ही माझी के हाथों में चाय के गिलास और गिलास रखने वाला छींका पकड़ा दिया गया। दफ्तरों में छोटी-मोटी नौकरी करके अपना बचपना गंवा दिया। बाल मजदूरी के अंतर्गत उन्होंने तमाम दफ्तरों की फाइलें उठाने, धरने और अध‍िकारी के कमरे तक पहुंचाने का काम किया।

खास बात यह है कि माझी का व्यक्त‍ित्व भी उनके नाम के अनुरूप ही है। नदी के बीच विपरीत धाराओं के बीच शांत होकर जिस तरह एक माझी नौका को पार लगाता है, ठीक उसी प्रकार जीवन की हर विरीत धाराओं में माझी भी शांत मन से ही काम करते हैं। अपनी अथक मेहनत और शांत स्वभाव के कारण ही आज वो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान होने जा रहे हैं।

महादलित मुसहर समुदाय से आते हैं माझी

जीतन राम मांझी का जन्म बिहार के गया जिले के महकार गांव में एक मजदूर परिवार में 6 अक्टूबर 1944 को हुआ। वो महादलित मुसहर जाति से आते हैं। गांव में पढ़ाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण उनके खेतिहर मजदूर पिता ने उन्हें जमीन मालिक के यहां काम पर लगा दिया। वहां मालिक के बच्चों के शिक्षक के प्रोत्साहन एवं पिता के सहयोग से सामाजिक विरोध के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई शुरू की। उन्होंने सातवीं कक्षा तक की पढ़ाई बिना स्कूल गए पूरी की।

परिवार से छुपकर की आगे की पढ़ाई

परिवार से छुपाकर उन्होंने हाई स्कूल में दाखिला लिया और सन् 1962 में सेकेंड डिवीजन से मैट्रिक पास किया। 1966 में गया कॉलेज से इतिहास विषय में स्नातक की डिग्री प्राप्त की, लेकिन परिवार पर आर्थिक दवाब इतना बढ़ा कि उन्होंने पढ़ाई रोककर एक सरकारी दफ्तर में क्लर्क की नौकरी शुरू कर दी।

1980 में आये राजनीति में

1980 तक क्लर्क की नौकरी करने के बाद उन्होंने नौकरी से इस्तीफा देने के बाद वह राजनीति सेजुड़ गए। साल 1980 में सियासत में कदम रखने वाले मांझी 1983 में पहली बार मंत्री बने थे। 2008 से नीतीश सरकार में मंत्री रहे जीतन राम इस बार गया (सुरक्षित) सीट से लोकसभा चुनाव भी लड़े थे लेकिन चुनाव हार गए।

पहले विधायक और फिर मंत्री पद हासिल करने वाले मांझी अपने शांत स्वभाव और कूटनीतिक समझ के कारण पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफी करीबी रहे हैं। उन्होंने बिहार में दलितों के लिए उन्होंने विशेष तौर पर काम किया। मांझी को सियासी दांव-पेंज में महारथ हासिल है। उनके करीबियों की मानें तो उनकी यहीं राजनीतिक समझ नीतीश को उनके करीबियों में शामिल करती है। अब जब कि वो बिहार के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं तो देखना होगा कि अब वो बिहार की राजनीति को किस दिशा में ले जाते है।

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