बहन के पति को ही गोलियों से भूनकर सुर्खियों में आया था गैंगस्टर 'सोनू दरियापुर'

नई दिल्‍ली। हत्‍या, लूट, किडनैपिंग जैसे दर्जनों बड़े अपराधों में वांछित चल रहे गैंगस्‍टर सोनू दरियापुर को दिल्‍ली पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार किया है। उसे एक एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नरेला से धर दबोचा। सोनू को मौजूद वक्‍त का सबसे बड़ा गैंगस्‍टर बताया जा रहा है। दिल्‍ली सरकार की तरफ से उसपर 5 लाख का इनाम था। वहीं हरियाणा सरकार ने 50 हजार रुपए इनाम घोषित किए थे। पुलिस ने बताया कि जिस वक्‍त सोनू को पकड़ा गया उस वक्‍त वो उसी आई-20 कार में था, जिसका इस्तेमाल 30 अप्रैल को मोनू दरियापुर समेत 3 लोगों की हत्या में इस्तेमाल किया गया था। उसके कब्जे से 2 पिस्टल और 17 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। सोनू का असली नाम सत्यवान सहरावत है। तो आइए बताते हैं सोनू दरियापुर द्वारा किए गए उस ट्रिपल मर्डर के बारे में जिसने पूरी दिल्‍ली को हिलाकर रख दिया था। लेकिन इससे पहले जान लीजिए सोनू और मोनू क्‍यों बने एक दूसरे के जान के दुश्‍मन।

सोनू दरियापुर के बहन से इश्‍क करता थ मोनू

सोनू दरियापुर के बहन से इश्‍क करता थ मोनू

बवाना के दरियापुर गांव के रहने वाले सत्यावान उर्फ सोनू दरियापुर और भूपेंद्र उर्फ मोनू दरियापुर एक समय में अच्‍छे दोस्‍त थे। हालांकि दोनों का आपराधिक रिकॉर्ड था। लेकिन सोनू की बहन राजरानी से मोनू को मोहब्‍बत हो गई। जब इस बात की भनक परिवारवालों को लगी तो इसका विरोध हुआ। परिजनों द्वारा लगातार बढ़ते विरोध को देखते हुए दोस्तों के सहयोग से मोनू और राजरानी ने आर्य समाज मंदिर में जाकर शादी कर ली। इस शादी के बाद दोनों परिवारों में दुश्मनी शुरू हुई।

यहीं से दोस्‍ती बदल गई दुश्‍मनी में

यहीं से दोस्‍ती बदल गई दुश्‍मनी में

ऐसे में दुश्मनी के साथ ही सोनू की गैंग के लड़कों ने पंजाबी बाग में मोनू और उसकी पत्नी राजरानी की गाड़ी पर हमला किया, जिसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए और ड्राइवर ब्रह्म सिंह मौत हो गई। जिसके बाद से दरियापुर गांव में शुरू हुआ दुश्मनी का दौर। मोनू पर हुए हमले का बदला लेने के लिए उसकी गैंग के लोग भी अब सोनू के गैंग के लोगों का ढूंढ़-ढूंढ़ कर उनका शिकार करना शुरू किया। इसी दौरान सोनू की गैंग ने मोनू के भाई सुधीर की नजफगढ़ के ढिचाऊ गांव के पास हत्या कर दी।

बौखला गया मोनू और शुरु हुआ गैंगवार

बौखला गया मोनू और शुरु हुआ गैंगवार

भाई की हत्‍या से मोनू बिल्‍कुल बौखला गया। वो लगातार सोनू गैंग के लड़कों को खोज-खोज कर मारने लगा। इस दौरान मोनू को बवाना थाने ने अपराधी घोषित कर दिया और उसके उपर कई थानों में एक दर्जन के करीब मामले भी दर्ज हुए। दुश्मनी और खौफ के बाद मोनू ने राजनीतिक गलियारों में अपनी पकड़ बनानी शुरू की। इसके लिए मोनू ने कई हिन्दू संगठनों से जुड़ी हरियाणा की साध्वी देवा ठाकुर से दोस्ती की और लगातार उनके प्रभाव का फायदा उठाते हुए आगे बढना शुरू किया। इस बीच मोनू ने भाजपा में एंट्री कर ली।

कैसे हुई मोनू की हत्‍या

कैसे हुई मोनू की हत्‍या

मोनू के परिजनों की मानें तो वह घर से अपने दोस्त अरुण के साथ खाना खाने के लिए निकला था और उसी दौरान उसकी हत्या कर दी गई। सोनू दरियापुर पर आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर मियांवाली नगर इलाके में 30 अप्रैल 2017 को भूपेंद्र उर्फ मोनू, अरू और पीएसओ एएसआई विजय को गोलियां से भून दिया था। ट्रिपल मर्डर की इस वारदात को अंजाम देने के लिए 3 दर्जन से भी अधिक गोलियां चलाई गई थीं।

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