TMC में बगावत के बीच फिरहाद हकीम ने दिया इस्तीफा, कौन हैं ममता के 'हनुमान'? संकट में छोड़ दिया साथ

Who is Firhad Hakim: तृणमूल कांग्रेस (TMC) फिलहाल आंतरिक संकट से जूझ रही है, जिसे चुनाव हार के बाद एजेंसियों की जांच और पार्टी के भीतर बढ़ती बगावत ने और गहरा कर दिया है। जहां एक तरफ इस सियासी तूफान में कई पुराने कद्दावर नेता ममता बनर्जी का साथ छोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के 58 बागी विधायकों को विधानसभा में एक अलग गुट के रूप में आधिकारिक मान्यता मिलने से ममता और अभिषेक बनर्जी दोनों को बड़ा झटका लगा है।

फिरहाद हकीम ने कोलकाता मेयर पद से दिया इस्‍तीफा

इस बीच तृणमूल कांग्रेस के सबसे विश्वसनीय और प्रभावशाली नेताओं में से एक फिरहाद हकीम, जिन्हें बॉबी हकीम के नाम से भी जाना जाता है, ने कोलकाता नगर निगम के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है। ममता बनर्जी ने भारी मन से उनका यह इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

Who is Firhad Hakim

TMC में क्‍यों हुई बगावत?

फिरहाद हकीम का ये इस्‍तीफा बुधवार को ऐसे समय में आया है जब सदन के भीतर पार्टी के बागी गुट को स्पीकर द्वारा वैधानिक मान्यता मिली और ऋतब्रत बनर्जी को प्रतिपक्ष का नेता स्‍वीकार कर लिया गया है। माना जा रहा है कि टीएमसी में ये विद्रोह और बिखराव 'भतीजा प्रेम' के कारण हुआ है, टीएमसी के बागी विधायक पार्टी सुप्रीमों ममता बनर्जी से नहीं, बल्कि अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को लेकर नाराज हैं। उनका मानना है कि अभिषेक बनर्जी की वजह से 2026 के विधानसभा चुनावों में बंगाल में टीएमसी को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

कौन हैं फिरहाद हकीम?

फिरहाद हकीम लगभग डेढ़ दशक से तृणमूल कांग्रेस के सशक्त संगठनात्मक और सामाजिक स्तंभ रहे हैं। उन्हें बंगाल की राजनीति में अल्पसंख्यक समुदाय (कुल आबादी का लगभग 30%) के बीच एक मजबूत पकड़ वाला चेहरा माना जाता है।

ममता बनर्जी का "हनुमान" क्यों कहा जाता है?

फिरहाद हकीम को TMC का मजबूत अल्पसंख्यक चेहरा माना जाता है। बंगाल के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में उनकी अच्छी पकड़ रही है और वे वर्षों तक ममता बनर्जी के भरोसेमंद संकटमोचक के रूप में देखे जाते रहे हैं। वे ममता बनर्जी के कोर वोट बैंक को संभाले रखने वाले प्रमुख रणनीतिकार के रूप में भी जाने जाते हैं, यही वजह है कि उन्हें ममता का 'हनुमान' कहा जाता है।

कोलकाता के पहले मुस्लिम मेयर बनकर इतिहास रचा था

हकीम ने साल 2018 में कोलकाता के पहले मुस्लिम मेयर बनकर इतिहास रचा था। भारत की आजादी के बाद यह पहला मौका था जब किसी अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति ने इस पद को संभाला। राज्य सरकार में इन्होंने शहरी विकास और नगरपालिका मामलों जैसे कई महत्वपूर्ण मंत्रालय भी संभाले हैं। साल 2016 के नारदा स्टिंग ऑपरेशन में उनका नाम सामने आने के बाद वे राष्ट्र स्‍तर पर सुर्खियों में रहे थे।

फिरहाद हकीम का राजनीतिक सफर

  • जन्म 1959 में कोलकाता में हुआ।
  • शुरुआत में कांग्रेस से जुड़े रहे, बाद में TMC के साथ आ गए।
  • 2009 में पहली बार विधायक बने।
  • 2011 में ममता बनर्जी सरकार में मंत्री बने और शहरी विकास व नगरपालिका मामलों जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले।
  • 2018 में कोलकाता के मेयर बने और स्वतंत्रता के बाद कोलकाता के पहले मुस्लिम मेयर के रूप में इतिहास रचा।

फिरहाद हकीम क्‍यों इस्‍तीफा देने के लिए हुए मजबूर?

फिरहाद हकीम ने अपने इस्तीफे का आधिकारिक कारण राज्य में नवगठित भाजपा सरकार के तहत प्रशासनिक कामकाज में आ रही गंभीर दिक्कतों को बताया है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कार्यभार संभालने के बाद राज्य सरकार ने कोलकाता नगर निगम के फंड और विकास योजनाओं पर सख्त रुख अपना लिया था, जिससे मेयर के रूप में काम करना मुश्किल हो रहा था।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषक इस इस्तीफे को एक लंबी और सोची-समझी 'घटनाक्रम श्रृंखला' का हिस्सा मान रहे हैं। कहा जा रहा है कि फिरहाद हकीम पहले भी पद छोड़ने की इच्छा जता चुके थे, लेकिन उस समय पार्टी नेतृत्व ने उन्हें रोक लिया था। अब जब 58 विधायकों का अलग गुट सामने आ चुका है और उसे स्पीकर की आधिकारिक मंजूरी भी मिल गई है, तो ऐसे में उनके इस्तीफे को इस संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि वे बदलते हालात में किसी कमजोर होती स्थिति की जिम्मेदारी अपने ऊपर नहीं लेना चाहते।

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