कौन हैं Dr Kurella Vittalacharya? पीएम मोदी ने मन की बात में की है सराहना

नई दिल्ली, 26 दिसंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2021 के अपने आखिरी 'मन की बात' कार्यक्रम में आज एकबार फिर से स्टूडेंट्स, परीक्षा, किताबों और पढ़ाई के शौक पर चर्चा की है। उन्होंने यह भी बताया है कि हर साल की तरह इस बार भी स्टूडेंट्स से 'परीक्षा पर चर्चा' की योजना तैयार कर रहे हैं। इस मौके पर उन्होंने तेलंगाना के 84 साल के एक बुजुर्ग शिक्षक डॉक्टर कुरेला विट्ठलाचार्य का विशेष जिक्र किया है। उन्होंने उनकी मिसाल रखकर बताया है कि सपने करने के लिए उम्र कोई भी मायने नहीं रखती है।

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      Mann Ki Baat:PM Modi praised the elderly professor Dr. Kurela Vithalacharya for opening the library with his collection of books in the program

      सपने पूरी करने के लिए उम्र मायने नहीं रखती- पीएम मोदी
      पीएम मोदी ने देश में मौजूद असाधारण प्रतिभाओं के बारे में बताते हुए कहा कि "हमारा भारत कई अनेक असाधारण प्रतिभाओं से संपन्न है, जिनका कृतित्व दूसरों को भी कुछ करने के लिए प्रेरित करता है। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं तेलंगाना के डॉक्टर कुरेला विट्ठलाचार्य जी। उनकी उम्र 84 साल है। विट्ठलाचार्य जी इसकी मिसाल हैं कि जब बात अपने सपने पूरे करने की हो तो उम्र कोई मायने नहीं रखती।" इसके बाद पीएम मोदी ने उनके बारे में विस्तार से बताया कि कैसे बचपन से विट्ठलाचार्य की इच्छा एक बड़ी लाइब्रेरी खोलने की थी। लेकिन, देश की गुलामी के चलते उनका सपना पहले नहीं पूरा हो सका। बाद में वे खुद लेक्चरर बने और तेलुगु भाषा में काफी पढ़ाई की और अपनी कई रचनाएं तैयार कीं।

      'उनकी प्रेरणा से कई गांवों में खुली लाइब्रेरी'
      पीएम मोदी के मुताबिक महज 6-7 वर्ष पहले उन्हें लगा कि वो अपने बचपन का सपना अब पूरा करें और वे उसमें जुट गए। पहले उन्होंने अपनी ही किताबों से लाइब्रेरी तैयार की। इसके लिए उन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई उसमें झोंक दी। पीएम मोदी के मुताबिक, "धीरे-धीरे लोग इससे जुड़ते चले गए और योगदान करते गए। यदाद्रि-भुवनागिरी जिले के रमन्नापेट मंडल की इस लाइब्रेरी में करीब 2 लाख पुस्तकें हैं।" विट्ठलाचार्य का मानना था कि पढ़ाई के लिए उन्हें जो मुश्किलें हुईं, वह किसी और को ना झेलनी पड़े। आज उनकी प्रेरणा से कई और गांवों में लाइब्रेरी खुलने लगे हैं।

      स्क्रीन टाइम करने के लिए बुक रीडिंग पर जोर
      रेडियो पर प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' के 84वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने किताबों के महत्त्व को लेकर काफी अहम बात कही है। उनके मुताबिक, " किताबें सिर्फ ज्ञान ही नहीं देतीं, बल्कि व्यक्तित्व भी संवारती हैं, जीवन को भी गढ़ती हैं। किताबें पढ़ने का शौक एक अद्भुत संतोष देता है।" पीएम मोदी का कहना है कि आजकल लोगों में किताबें पढ़ने का शौक बढ़ा है, जो कि अच्छा ट्रेंड है। उन्होंने अपने कार्यक्रम के श्रोताओं से उन पांच किताबों के बारे में भी पूछा है कि वह अपने साल के पांच पसंदीदा किताबों के बारे में बताएं। उन्होंने स्क्रीन टाइम कम करने के लिए भी बुक रीडिंग को लोकप्रिय बनाने का आह्वान किया है।

      'परीक्षा पर चर्चा': रजिस्ट्रेशन 28 दिसंबर से
      इस मौके पर उन्होंने परीक्षार्थियों से 'परीक्षा पर चर्चा' की तैयारी करने की जानकारी भी दी है। इसके लिए 28 दिसंबर से मायगॉव डॉट इन पर रजिस्ट्रेशन ओपन होने जा रहा है। यह रजिस्ट्रेशन अगले साल 20 जनवरी तक चलेगा। इसके लिए कक्षा 9 से 12वीं तक के स्टूडेंट, टीचर और पेरेंट्स के लिए ऑनलाइन प्रतियोगिता भी आयोजित होगी। पीएम मोदी ने कहा है, "मैं चाहूंगा कि आप सब इसमें जरूर हिस्सा लें। आपसे मुलाकात करने का मौका मिलेगा। हम सब मिलकर परीक्षा, करियर, सफलता और विद्यार्थी जीवन से जुड़े अनेक पहलुओं पर मंथन करेंगे।"

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