कौन हैं अमित खरे ? चारा घोटाले का किया था खुलासा, अब बने पीएम मोदी के सलाहकार
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर: झारखंड कैडर के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अमित खरे को पीएमओ में प्रधानमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में की गई है, जब पीएमओ से पीके सिन्हा और अमरजीत सिन्हा जैसे दिग्गज सेवानिवृत अधिकारियों ने अपना पद छोड़ा है। खरे 30 सितंबर को शिक्षा मंत्रालय में सचिव पद पर रहते हुए आईएएस सेवा से रिटायर हुए हैं। करीब 36 साल का उनका नौकरशाह के रूप में कामकाज काफी बेदाग माना जाता है और वह लो-प्रोफाइल रहकर हाई-प्रोफाइल काम करने वाले अफसरों में गिने जाते रहे हैं। माना जा रहा है कि उनके इसी बैकग्राउंड को देखते हुए मोदी सरकार ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार का पद सौंपा है।

पीएम मोदी के सलाहकार बने अमित खरे
केंद्रीय कैबिनेटक की नियुक्ति समिति ने झारखंड कैडर के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अमित खरे को पीएमओ में प्रधानमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया है। उन्हें भारत सरकार के सचिव की रैंक और उसके का स्केल दिया जाएगा। यह नियुक्ति कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर कई गई है, जो कि शुरू में दो साल के लिए है या अगले आदेश तक जारी रहेगी। रिटायरमेंट से पहले वह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और उच्च शिक्षा के सचिव पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। बीते 30 सितंबर को ही वे रिटायर हुए हैं और सिर्फ 12 दिनों बाद ही उन्हें इतनी अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।

1985 बैच के झारखंड कैडर के आईएएस हैं अमित खरे
1985 बैच के आईएएस अमित खरे का चयन बिहार कैडर के लिए हुआ था और राज्य के विभाजन के बाद उन्हें झारखंड कैडर मिला। शिक्षा मंत्रालय में सचिव पद पर उनकी नियुक्ति के कुछ ही समय बाद केंद्र सरकार नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, 2020 लेकर आई थी, जिसपर 29 जुलाई, 2020 को कैबिनेट की मुहर लग गई थी। जबकि, उच्च शिक्षा विभाग का कार्यभार खरे ने दिसंबर, 2019 में ही संभाला था। पिछले महीने रिटायर होने तक स्वभाव से सामान्य व्यक्तित्व के धनी माने जाने वाले खरे इसी पद पर थे।

अमित खरे इन महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं
अमित खरे की पहचान भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक ईमानदार अधिकारी की रही है, जिनके काम में पारदर्शिता की झलक महसूस होती आई है। साथ ही वह स्पष्ट फैसले लेने में भी माहिर माने जाते हैं। 36 साल के अपने करियर के शुरुआती वक्त में वह बिहार के पटना और दरभंगा जैसे जिलों के डीएम रह चुके हैं। झारखंड में उनकी नियुक्ति राज्यपाल के प्रधान सचिव से लेकर प्रदेश के शिक्षा और वित्त विभाग में प्रधान सचिव की जिम्मेदारी निभाने तक रही है। वह झारखंड राज्य के पहले वाणिज्यकर आयुक्त का पद भी संभाल चुके हैं। लेकिन, पश्चिम सिंहभूम (चाईबासा) के उपायुक्त (डीसी) के तौर पर उनका कार्यकाल बहुत ही चर्चित है।

चाईबासा के डीसी रहते हुए चारा घोटाले का किया था पर्दाफाश
बेदाग आईएएस अफसर की छवि वाले अमित खरे जब झारखंड के पश्चिम सिंहभूम (चाईबासा) के डिप्टी कमिश्नर (तब बिहार) थे, तब उन्होंने ही सबसे पहले चारा घोटाले का खुलासा किया था। आगे चलकर तब के 1,000 करोड़ रुपये का यह घोटाला बिहार-झारखंड का सबसे बड़ा स्कैम साबित हुआ और दोनों राज्यों के कई जिलों में घोटालेबाजों का काला कारनामा उजाकर हुआ था।
अमित खरे की कलम से जिस घोटाले का पर्दाफाश हुआ था, उसी की लपेट में आगे चलकर लालू यादव आए और बिहार के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उन्हें जेल जाने की नौबत आ गई। इस घोटाले में लालू को लंबी सजा मिली हुई है और इस वक्त वह जमानत पर छूटकर घर आए हुए हैं। यही नहीं चाईबासा के डीसी रहते हुए ही खरे ने महिलाओं को डायन बताकर होने वाली क्रूर हत्याओं के खिलाफ भी अभी अभियान छेड़ा था।

अमित खरे की पत्नी निधि खरे भी हैं आईएएस
अमित खरे के परिवार में आईएएस-आईएफएस जैसे अधिकारियों की लंबी फेहरिस्त है। खुद उनकी पत्नी निधि खरे भी भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी हैं और फिलहाल केंद्रीय उपभोक्ता मामलों में एडिश्नल सेक्रेटरी का दायित्व निभा रही हैं। दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफन कॉलेज से डिग्री लेने वाले अमित खरे के बड़े भाई अतुल खरे इंडियन फॉरन सर्विस के अफसर रह चुके हैं। 1961 में जन्मे अमित खरे की शुरुआती शिक्षा रांची के हिनू स्थिति सेंट्रल स्कूल में हुई है।












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