जब फणीश्वर नाथ रेणु ने कहा था, मुझे नीतीश कुमार जैसा ही दामाद चाहिए

पटना। नीतीश कुमार लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। चौथी जीत के लिए भी शंखनाद कर दिया है। उनकी राजनीतिक सफलता में कई लोगों का योगदान है। इनमे महान साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु भी एक हैं। हाल ही में नीतीश ने इस बात का खुलासा किया है कि छात्र आंदोलन के समय उन्होंने रेणु जी से मिल कर बहुत कुछ सीखा और समझा था। नीतीश कुमार जब जेपी आंदोन के समय राजनीति का ककहरा सीख रहे थे तब फणीश्वर नाथ रेणु भी उनके एक प्रमुख मार्गदर्शक थे। नीतीश कुमार जब पटना के इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ रहे थे उसी समय से फणीश्वरनाथ रेणु उनसे बेहद प्रभावित थे। एक बार रेणुजी ने कहा था, मुझे नीतीश कुमार जैसा ही दामाद चाहिए। 4 मार्च को रेणु जी का जन्मदिन है। यह उनका जन्म शताब्दी वर्ष चल रहा है। इस मौके पर डालते हैं नीतीश- रेणु के रिश्तों पर एक नजर।

रेणु जी नीतीश के राजनीतिक गुरु
नीतीश कुमार जनवरी 2020 में जल-जीवन- हरियाली यात्रा के दौरान अररिया गये थे। फणीश्वर नाथ रेणु का जन्म स्थान ओराही हिंगना गांव अब अररिया जिले का हिस्सा है। पहले पूर्णिया में था। नीतीश कुमार ने अररिया की सभा में कहा था, "मैं रेणु जी की जन्म भूमि को नमन करता हूं। 1974 के छात्र आंदोलन के समय मैं अक्सर रेणु जी से मिलता था। उस समय उनसे मुझे बहुत सीखने-समझने का मौका मिला था।" फणीश्वर नाथ रेणु समाजवादी थे। उन्होंने 1972 का विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। 1974 में जब जयप्रकाश नारायण ने कांग्रेस की निरंकुश सत्ता के खिलाफ छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया तो फणीश्वर नाथ रेणु भी इसमें शामिल हो गये। रेणु जी जेपी आंदोलन का बौद्धिक चेहरा थे। उस समय छात्र संघर्ष वाहिनी के नेता जेपी और रेणु से मिल कर आंदोलन की रूपरेखा बनाते थे। नीतीश भी छात्र संघर्ष वाहिनी के नेता के रूप में कई बार रेणु जी से मिले थे। उसी समय नीतीश ने रेणु जी से राजनीति के कई मूलभूत सिद्धांतों को सीखा था। 46 साल बाद नीतीश ने उन्हीं स्मृतियों को अररिया में लोगों से साझा किया।

नीतीश का आदर्शवादी विवाह
नीतीश कुमार ने 1973 में आदर्श विवाह की घोषणा कर अपने घर में हलचल मचा दी थी। इस मुद्दे पर उनकी अपने पिता से ठन गयी थी। उनके पिता रामलखन सिंह प्रसिद्ध वैद्य थे। इंजीनियर बेटे के लिए उनके पास कई रिश्ते आते थे। जमाने के हिसाब से लोग इंजीनियर लड़के के लिए स्वेच्छा से ही तिलक-दहेज भी देना चाहते थे। पत्रकार संकर्षण ठाकुर ने अपनी किताब- बंधु बिहारी में इस प्रकरण को विस्तार से लिखा है। नीतीश कुमार की शादी मंजू सिन्हा से तय हो गयी थी। मंजू सिन्हा के पिता कृष्णनंदन सिंह ने नीतीश के पिता को दहेज के रूप में 22 हजार रुपये नकद दिये थे। जैसे ही नीतीश को इस बात का पता चला वे आग बबूला हो गये। वे दहेज के सख्त खिलाफ थे। चमक-दमक वाली शादी की जगह कोर्ट मैरेज करना चाहते थे। नीतीश गुस्से में तो थे लेकिन अपने पिता से कुछ कहने की हिम्मत न थी। अपनी बात रखने के लिए नीतीश पटना से अपने दोस्त नरेन्द्र सिंह (इंजीनियर) को घर (बख्तियारपुर) ले गये थे। नरेन्द्र सिंह ने नीतीश के पिता को सारी बतायी। रामलखन सिंह धर्मसंकट में पड़ गये। पैसा लौटाने पर लड़की वाले बुरा मान सकते थे। लेकिन नीतीश जिद पर अड़े रहे। अंत में रामलखन सिंह को झुकना पड़ा। वे पैसा लौटाने पर राजी हो गये लेकिन कोर्ट मैरेज पर वीटो लगा दिया। नीतीश भी झुके। वे सामान्य शादी के लिए मान गये। न भोज-भात हुआ न मंत्र पढ़े गये। वरमाला पहना कर सादगी के साथ शादी हुई। नीतीश कुमार का यह आदर्शवाद तब चर्चा का विषय बन गया था।

मुझे नीतीश जैसा दामाद चाहिए- रेणु
दहेज और आडम्बरपूर्ण शादी का जिस तरह नीतीश ने विरोध किया उससे कई लोग प्रभावित हुए। उस समय की प्रतिष्ठित पत्रिका धर्मयुग के पत्रकार जुगनू शारदेय को भी इस बात की जानकारी मिली। उन्होंने नीतीश कुमार का इंटरव्यू करने की योजना बनायी। जुगनू शारदेय ने नीतीश का इंटरव्यू किया। इस इंटरव्यू में नीतीश ने दहेज कि खिलाफ तर्कपूर्ण बाते रखीं। महिलाओं को पढ़ लिख कर आत्मनिर्भऱ बनना जरूरी बताया। इस संबंध में नीतीश ने राममनोहर लोहिया और किशन पटनायक के विचारों को भी अपने तर्क का आधार बनाया। जब नीतीश का यह इंटरव्यू धर्मयुग में प्रकाशित हुआ तो फणीश्वरनाथ रेणु ने भी इसको पढ़ा। रेणु जी नीतीश के विचारों से बेहद प्रभावित हुए। नीतीश ने दूसरों को सीख देने से पहले खुद उस पर अमल किया था। तब रेणु जी ने जुगनू शारदेय को कहा, वे नीतीश जैसे किसी नवयुवक को ही अपने दामाद के रूप में देखना चाहेंगे। रेणु जी भी धार्मिक आडम्बरों और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ थे। इस लिए नीतीश जैसे दामाद की कल्पना की थी। रेणु जी को तीन पुत्र और पांच पुत्रियां हैं। उन्होंने अपनी पुत्रियों की शादी भी सादगी के साथ की थी।












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