निर्भया को इंसाफ: जज डेथ वारंट लिख रहे थे और फूट-फूटकर रो रहे थे निर्भया के चारों गुनहगार
नई दिल्ली- निर्भया के चारों गुनहगार मंगलावर को पूरी तरह से हताश और निराश हो गए। उनके वकीलों ने भले ही उन्हें अभी भी कुछ उम्मीदें दिखाने की कोशिश की हों, लेकिन चारों दोषियों के साथ उनके परिजनों को भी अब यह अंदाजा हो चुका है कि वे अब आखिरी सांसें गिन रहे हैं। यही वजह है कि जब जज ने उनकी डेथ वारंट पर फैसला सुनाया तो विडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़े चारों दोषियों ने फूट-फूटकर रोना शुरू कर दिया। अदालत में निर्भया की मां और मुजरिम मुकेश कुमार की मां भी में रो रही थी, लेकिन दोनों के आंसुओं में जमीन-आसमान का फर्क था। एक को बेटी को इंसाफ मिलता नजर आ रहा था और दूसरी बेटे के गम में डूब चुकी थी।
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फूट-फूटकर रोए निर्भया के चारों गुनहगार
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में डेथ वारंट जारी होने के बाद अब यह लगभग साफ हो चुका है कि उसके दोषियों की सारी उम्मीदों पर लगभग पानी फिर चुका है। यही वजह है कि जब जज ने उन चारों को फांसी देने के लिए डेथ वारंट जारी किया, तब उन सबने फूट-फूटकर रोना शुरू कर दिया। सूत्रों ने ऐसा ही दावा किया है। अकेले दोषी ही नहीं, गुनहगार मुकेश की मां को भी जब डेथ वारंट की जानकारी मिली तो वह भी कोर्ट में ही ना-उम्मीदी में रोने लगी। इस दौरान वहां मौजूद निर्भया की मां भी रो पड़ीं और दोनों के बीच थोड़ी बहस होते हुए भी देखी गई।

अब अलग-अलग सेल में रहेंगे रखे जाएंगे चारों दोषी
निर्भया के चारों दोषियों को फांसी देने के लिए 22 जनवरी, सुबह 7 बजे का वक्त मुकर्रर किया हुआ है। यानि मंगलवार से उन्हें फांसी कोठी तक ले जाने तक चारों गुनहगार पवन गुप्ता, मुकेश सिंह, अक्षय ठाकुर और विनय शर्मा को अलग-अलग सेल में रखा जाएगा। इस दौरान उनपर 24 घंटे कड़ी निगरानी रखी जाएगी। उन्हें पहनने के लिए भी ऐसे कपड़े दिए जाएंगे, जिससे वह खुद को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा सकें। मसलन, उससे किसी तरह की रस्सीनुमा चीज बनाने की गुंजाइश न बचे। क्योंकि, मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि ऐसे वक्त में कैदी खुदकुशी करने की भी कोशिश कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक अब ये चारों दोषी पूरी तरह से तमिलनाडु पुलिस की निगरानी में रहेंगे। अलबत्ता, उन्हें परिजनों से मिलने का मौका जरूर मिलेगा और वे अपना-अपना निजी सामान उन्हें सौंप सकते हैं और उनकी कोई इच्छा है तो वह भी अपने परिवार वालों को बता सकते हैं।

दोषियों के पास अभी भी बचा है मौका?
कुछ जानकार बताते हैं कि डेथ वारंट जारी होने के बावजूद निर्भया के गुनहगारों के पास क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल करने का विकल्प बचा हुआ है। मसलन, वह फैसले के किसी हिस्से को लेकर अदालत के पास जा सकते हैं कि अदालत से कोई चूक हुई है। एक दोषी के वकील एपी सिंह ने ऐसा करने की बात कही भी है। लेकिन, कुछ जानकारों की राय में इस मामले में फिलहाल इसका रास्ता बंद ही दिख रहा है। इसके अलावा मानवाधिकार के नाम पर मुजरिमों के पास रिट दाखिल करने का विकल्प बचा हुआ है। अगर ऐसी कोई स्थिति बनती है तो डेथ वारंट होल्ड पे जा सकता। इसके अलावा कानून विशेषज्ञों की राय में जिस दोषी ने राष्ट्रपति के पास मर्सी पिटिशन दाखिल नहीं की है तो अभी भी ऐसा कर सकता है और इस स्थिति में चारों की फांसी टल भी सकती है। याकूब मेमन केस में भी देश देख चुका है कि मर्सी पिटिशन खारिज होने के बावजूद ऐसा माहौल बनाया गया था कि देर रात सुप्रीम कोर्ट को उसकी फांसी पर तामील रोकने के लिए सुनवाई करनी पड़ी थी। हालांकि, आखिरकार उसे नागपुर सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई थी।

निर्भया कांड का पूरा घटनाक्रम
सात साल से भी पहले 16 दिसंबर, 2012 की रात 23 साल की पैरामेडिकल की स्टूडेंट निर्भया के साथ 6 लोगों ने चलती बस में गैंगरेप किया था और उसके शरीर के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थीं। निर्भया को इन दरिदों ने जघन्य वारदात के बाद उसके मित्र के साथ चलती बस से दक्षिणी दिल्ली के इलाके में नीचे फेंक दिया था। इस घटना को लेकर दिल्ली समेत पूरे देश में जन-आक्रोश उमड़ पड़ा। बाद में निर्भया ने सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस केस के 6 में से एक आरोपी ने ट्रायल के दौरान ही जेल में ही खुदकुशी कर ली थी। जबकि, छठा आरोपी नाबालिग होने की वजह से बाल सुधार गृह में मामूली समय गुजार कर बरी हो चुका है। अब निर्भया के माता-पिता समेत पूरा देश उन बचे हुए चारों गुनहगारों की सजा-ए-मौत का इंतजार कर रहा है।












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