व्हाट्स एप और बीबीएम पर होगी आईबी की नजर!

हालांकि आयोग को अभी यह समझ में नहीं आ रहा है कि वह व्हाट्स एप और बीबीएम के जरिए शेयर होने वाली हेट स्पीच और भड़काऊ वीडियोज पर लगामक कैसे लगाए। गौरतलब है कि कुछ ही दिनों पहले आयोग की तरफ सोशल मीडिया के प्रयोग हेतु कोड ऑफ कन्डक्ट जारी किया गया था।
चुनाव आयोग के कुछ अधिकारियों के मुताबिक अभी तक पोल पैनल को कोई ऐसा रास्ता नहीं मिल सका है जिसके जरिए हेट स्पीच, प्रमोशनल कैंपेंस और भड़काऊ वीडियोज पर लगाए लगाई जा सके। आयोग का मानना है कि इन मैसेजिंग सर्विसेज का प्रयोग करके माहौल को बिगाड़ने की कोशिशें हो सकती हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि माहौल बिगड़ने न पाए इसके लिए इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के साथ बातचीत की जा रही है ताकि व्हाट्स एप और बीबीएम के जरिए शेयर होने वाले वीडियोज और हेट स्पीच को लगाने के लिए सर्वश्रेष्ठ तरीका तलाशा जा सके। एक वरिष्ठ चुनाव आयोग अधिकारी के मुताबिक यह एक ऐसी स्थिति है जिससे हम निबटने की कोशिशें कर रहे हैं। फिलहाल अभी तक सिर्फ रास्ते तलाशे जा रहे हैं।
भड़काऊ भाषण और मैसेज शेयर करने पर आईपीसी के तहत होगा केस दर्ज
लेकिन इन सबसे अलग उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक नया रास्ता तलाशा है। यूपी के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस सतीश गणेश ने कहा है कि अगर किसी कि पास किसी भी तरह की भड़काऊ क्लिप, जोक, मैसेज या वीडियो जैसा कुछ मिला तो फिर उस पर आईपीसी की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया जाएगा। इस तरह के मैटेरियल को रखने वाले व्यक्ति पर सामाजिक शांति भंग करने के तहत केस चलाया जाएगा।
सतीश गणेश ने बताया कि इस तरह के केसों को वह दो श्रेणियों में बांटा जाएगा। पहली श्रेणी के तहत ऐसा व्यक्ति जिसके मोबाइल फोन में ऐसी क्लिपिंग्स का पाया जाना और दूसरी श्रेणी के तहत इस तरह के वीडियोज और मैसेज को शेयर करने वाले व्यक्ति को शामिल किया जाएगा।
दोनों ही श्रेणियों में सजा होगी और लोगों पर केस दर्ज होगा। राज्य पुलिस की ओर से लिया गया यह फैसला चुनाव आयोग के ही एक फैसले को आगे बढ़ाता है जिसके 'शांति पूवर्क चुनावों को कराया जाना सुनिश्चित करने ' की बात कही गई है।
इसके अलावा पुलिस की ओर से सोशल नेटवर्किंग साइट्स फैसबुक और ट्विवटर पर भी लगातार नजर रखने के लिए एक स्पेशल सेल बनाई गई है। अधिकारी लगातार इस बात पर नजर रखेंगे कि किसकी वॉल पर किस तरह का मैटेरियल शेयर किया जा रहा है। इसके अलावा यह सेल सभी राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवारों और उनके नेताओं के नाम पर बनाए गए फेसबुक अकाउंट और ट्विटर हैंडल पर भी अपनी नजर रखेगी।
साफ है कि अब यूजर्स को किसी भी तरह का मैसेज और क्लिप शेयर करने से पहले दो बार सोचने की जरूरत होगी और अगर उसने ऐसा नहीं किया तो फिर उसे सजा भुगतने को तैयार रहना होगा।












Click it and Unblock the Notifications