हवा में घुले जानलेवा 'ज़हर' से बचने का तरीका क्या है
अगले कुछ सवालों के जवाब अगर आप हां में दे रहे हैं तो आप भी इस ख़तरे से प्रभावित लोगों में शामिल हैं.
- आपके आसपास के लोग खांस रहे हैं?
- हवा में धुंध या कुछ मैलापन-सा दिख रहा है?
- सिरदर्द, गले में ख़राश की दिक़्क़त से जूझ रहे हैं?
- आंखों में कुछ जलन जैसी है?
इन सवालों के जवाब हां में देने वाले सभी लोग शायद ये बात नहीं जानते होंगे कि वो इन दिनों मैलापन या कोहरे से नहीं, प्रदूषण से जंग लड़ रहे हैं.
हवा में घुला वो प्रदूषण जो सांसों के रास्ते आपके शरीर में जाकर नुकसान पहुंचा रहा है. ये आलम तब जब अभी दिवाली पर जलाए जाने वाले पटाखों से निकलने वाला धुंआ हवाओं में घुला नहीं है.
आमतौर पर प्रदूषण की जब भी बात होती है तो ख़बरें दिल्ली तक ही सीमित रहती हैं. मगर 28 अक्टूबर को प्रदूषण के मामले में एक ऐसा राज्य सबसे आगे रहा, जहां की आबादी भारत में सबसे ज़्यादा है- उत्तर प्रदेश.
एयर क्वालिटी इंडेक्स के मुताबिक़, 28 अक्टूबर को भारत के जिन 66 शहरों में सबसे ज़्यादा प्रदूषण रहा, उनमें उत्तर प्रदेश की 11 जगहें शामिल हैं.
यूपी में इतना प्रदूषण बढ़ने की क्या वजहें हैं और कैसे हवा में दिख रहा प्रदूषण आपके लिए हो सकता है ख़तरनाक? साथ ही किन घरेलू तरीकों के इस्तेमाल से इस हवा में घुसे 'साइलेंट किलर' से बचा जा सकता है.
यूपी में सबसे ज़्यादा प्रदूषण कहां रहा?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक़, एयर क्वालिटी इंडेक्स के मामले में कानपुर और गाज़ियाबाद में हालात सबसे बदतर रहे. दोनों जगहों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स 420 और 415 रहा. यहां का क्वालिटी इंडेक्स इतना रहा कि अगर कोई बीमारी से जूझ रहा हो तो प्रदूषण का ये स्तर उनके लिए घातक साबित हो सकता है.
ये इंडेक्स 0-50 तक रहना चाहिए. 100 तक रहने पर भी हालात बदतर नहीं माने जाते हैं. लेकिन जैसे ही ये एयर क्वालिटी इंडेक्स 100 से ऊपर चढ़ता है, ख़तरा बढ़ने लगता है.
पहले जानिए उत्तर प्रदेश की किन और जगहों पर 28 अक्टूबर को ख़तरे के निशान से ऊपर रहा एयर क्वालिटी इंडेक्स.
- ग्रेटर नोएडा: 362
- बागपत: 398
- आगरा: 315
- बुलंदशहर: 388
- हापुड़: 396
- लखनऊ: 323
- मुरादाबाद: 337
- नोएडा: 325
- वाराणसी: 284
बीते दिन दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स 366 रहा.
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आख़िर यूपी में क्यों बढ़ रहा है प्रदूषण?
सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट के चंद्रभूषण ने बीबीसी हिंदी से बताया, ''हर जगह प्रदूषण बढ़ने की वजह एक सी ही है- गाड़ियों से निकलने वाला प्रदूषण, ईंट के भट्ठे, घरों में कोयला जलाना, फ़ैक्ट्रियों से होने वाला प्रदूषण. मौसम बदलने के साथ ये सब बढ़ जाता है. सर्दियों के वक़्त हवा में स्थिरता आ जाती है. इस वजह से प्रदूषण ठहर जाता है. यूपी जैसे राज्यों में प्रदूषण कम करने के लिए कोई एक्शन सरकार नहीं लेती है. दिल्ली के अलावा यूपी, बिहार, कोलकाता जैसी किसी भी जगह में कोई एक्शन नहीं लिया जाता है.''
क्या यूपी में दिल्ली का प्रदूषण शिफ्ट हो रहा है?
चंद्रभूषण कहते हैं, ''पर्यावरण में दीवार या दरवाज़ा नहीं होता है. जब यूपी की हवा दिल्ली आएगी तो प्रदूषण दिल्ली आएगा. ऐसा ही दिल्ली से यूपी हवा जाने पर भी होगा. प्रदूषण सरहदें नहीं देखता है. हवा जिस तरफ चलती है, प्रदूषण उसी तरह बढ़ता है. यूपी में गाड़ियां कम नहीं हैं. यूपी का अपना अच्छा -ख़ासा प्रदूषण बहुत है. यूपी को अगर अपने यहां प्रदूषण कम करना है तो कदम उठाने होंगे.''
डॉक्टर मोहसिन वली भारत के कई पूर्व राष्ट्रपतियों के डॉक्टर रह चुके हैं. फ़िलहाल वो गंगाराम अस्पताल में प्रैक्टिस कर रहे हैं.
डॉक्टर वली प्रदूषण बढ़ने की वजहों के बारे में बीबीसी हिंदी को बताते हैं, ''हर साल जब-जब मौसम बदलता है तब-तब प्रदूषण के घातक ख़तरे सामने आते हैं. लोग इस पर बात करते हैं. फिर बाद में सब कुछ ख़त्म हो जाता है. इस बार भी ऐसा ही लग रहा है. इसके अलावा गाड़ियां और निर्माण कार्य का बढ़ना भी वजहें हैं. अभी जब दिवाली आएगी, तब ये ख़तरा और बढ़ जाएगा.''
अगर आप समझते हैं कि प्रदूषण सिर्फ़ गाड़ियों के तेल वाले पाइप से फ़ैलता है तो आइए आपकी जानकारी कुछ बढ़ाते हैं.
आप मोटरसाइकिल, कार का टायर कब बदलवाते हैं? जब पुराना टायर घिस जाए या ख़राब हो जाए?
डॉक्टर वली कहते हैं, ''दो साल में कार के टायर काफ़ी घिस जाते हैं तो उससे निकले कण भी हवा में फैलते हैं. ये सुनने में भले साधारण सी बात लगे, लेकिन अगर एक कार के चारों टायरों को मिला लिया जाए तो उससे निकलने वाला वजन 30 किलो तक होता है.''
इस तरह से होने वाला प्रदूषण भी आपके लिए ख़तरनाक हो सकता है. कार के शीशे बंद कर लेने से इस प्रदूषण का असर ख़त्म नहीं होता है.
प्रदूषण के ख़तरों के बारे में डॉक्टर वली बताते हैं, सांस के ज़रिए प्रदूषण फेफड़ों में जाता है. दमा, एलर्जी, डायबिटिज़ के मरीज़ों को दिक्कतें होती हैं. प्रदूषण के कणों से फेफड़े जाम होने लगते हैं.
प्रदूषण कम करने के लिए तैयारी?
सरकार प्रदूषण को कम करने के लिए हाल ही में दिल्ली-एनसीआर के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP लेकर आई है. इसके तहत जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ेगा वैसे-वैसे प्रदूषण फैलाने वाले कामों को बंद किया जाएगा.
दिल्ली में ऑड-इवन सिस्टम लागू करना इसका एक उदाहरण है.
चंद्रभूषण ने बताया, ''पिछले और इस साल भी सरकार ने कॉम्प्रीहेंसिव एक्शन प्लान यानी CAP की बात की है. देश के जिन भी शहरों में प्रदूषण है, उन्हें CAP लागू करना होगा. यूपी में इसकी चर्चा तक नहीं होती होगी. नोएडा एनसीआर में है, इस वजह से हो भी जाती है.''
CAP के तहत प्रदूषण को कम करने की कोशिश की जाती है. इसमें सड़क पर धूल के कणों से लेकर प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियां, फैक्ट्रियों की चिमनियां तक शामिल हैं.
डॉक्टर वली कहते हैं कि सार्वजनिक जगहों पर लगाए जाने वाले बड़े-बड़े फ़िल्टर प्रदूषण कम करने में मददगार हो सकते हैं.
चंद्रभूषण के मुताबिक़, ''अब प्रदूषण के हालात पिछले साल के मुकाबले बेहतर हो रहे हैं, सरकारें प्लान बना रही हैं, लेकिन कठोर कदम उठाए बिना काम नहीं बनेगा.
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इस प्रदूषण से बचा कैसे जाए?
'गुस्सा कीजिए. गुस्सा कीजिए. गुस्सा कीजिए.'
ये कहकर सीएसई के चंद्रभूषण अपनी बात आगे बढ़ाते हैं, ''हमारे देश में जब आपका शहर धुंए की भट्ठी बना हुआ है और आप अपनी खिड़की बंद करके रह रहे हैं, कुछ नहीं कर रहे हैं तो कुछ नहीं हो सकता. लोगों को कठोरता से अपनी आवाज़ उठानी चाहिए, तभी प्रदूषण से भविष्य में बचा जा सकता है.''
लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक़, दुनिया की छह में से एक मौत प्रदूषण की वजह से होती है. इनमें से ज़्यादातर देश विकासशील हैं.
रॉयटर्स की रिपोर्ट की मानें तो पूरी दुनिया में भारत में सबसे ज़्यादा लोग प्रदूषण की वजह से उम्र से पहले अपनी जान गंवा रहे हैं. मरने वालों की ये संख्या 25 लाख है. विश्व व्यापार संगठन के मुताबिक़, पूरी दुनिया में वायु प्रदूषण की वजह से हर साल 42 लाख लोग मरते हैं.
चंद्रभूषण ने कहा, ''जितना प्रदूषण हमारे आस-पास है, उस हिसाब से हमें गुस्सा करना चाहिए. वरना लंबे वक़्त के लिए कोई समाधान नहीं निकलेगा. हम 70 साल कुछ नहीं करते हैं और 71वें साल सोचते हैं कि स्वर्ण बना देंगे. प्रदूषण से बचने या कम करने का कोई स्विच ऑफ़ या स्विच ऑन बटन नहीं होता है. हमारी हर एक्टिविटी से प्रदूषण का नाता है. खाना बनाने से लेकर दफ्तर पहुंचने तक.''
डॉक्टर वली कहते हैं, ''प्रदूषण से बचने का तरीका मैं एक्सरसाइज़ को मानता हूं. लेकिन अभी जब हवा में इतना ज़्यादा प्रदूषण है तो एक्सरसाइज़ नुकसान पहुंचा सकती है. फ़िलहाल सुबह की सैर पर न जाएं. ज़्यादा से ज़्यादा घर पर रहें. अगर सांस की दिक्कतें हैं तो दवा वक़्त से लेते रहिए. गर्भवती महिलाओं का भी ऐसे प्रदूषण से बचने के लिए घर पर रहना सबसे सही रहेगा. डॉक्टर से सलाह लेते रहना चाहिए.''
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मास्क या एयर फ़िल्टर कितने कारगर?
प्रदूषण से बचने के लिए अब बाज़ार में एयर फ़िल्टर और मास्क काफ़ी बेचे जाते हैं. लेकिन क्या ये कारगर हैं?
सीएसई के मुताबिक़, पर्यावरण सबको चोट देता है. अगर आपको बचना है तो ऐसा प्लान बनाइए जो सबको बचाए.
चंद्रभूषण कहते हैं, ''मास्क या एयर फ़िल्टर का बहुत बड़ा बाज़ार खड़ा हो चुका है. पर इनकी पहुंच कितने लोगों तक है, बेहद कम. लंबे वक़्त में ये तरीका असरदार नहीं है. अभी जितने आंकड़े आ रहे हैं, वो बताते हैं कि घरों के भीतर भी प्रदूषण होता है. फिर आप चाहे एयर फ़िल्टर लगवा लीजिए या मास्क पहन लीजिए. हम प्रदूषण से नहीं बच सकते. इनसे आप थोड़ा बहुत बच सकते हैं, लेकिन पूरी तरह नहीं. कहा जाता है कि कितनी ही औरतें चूल्हे से निकले प्रदूषण की वजह से मरती हैं. किचन में बच्चों के बैठने का भी असर होता है.''
डॉक्टर वली ने कहा, ''अभी N5 मास्कर काफ़ी बिक रहा है. ये आमतौर पर 200 से 800 तक का होता है. पर ये बहुत ज़्यादा असरदार नहीं होता है. वो लोग जो मास्क नहीं खरीद सकते या एयर फ़िल्टर नहीं लगा सकते. वो रुमाल या कपड़ा बांधकर कुछ हद तक ही बच सकते हैं.''
एयर फ़िल्टर कैसे नुकसान पहुंचा सकते हैं?
चंद्रभूषण बताते हैं, ''कुछ लोगों का कहना है कि एयर फ़िल्टर से भी प्रदूषण होता है. लेकिन अभी स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता. हमारी कोशिश ये होनी चाहिए हमें फिल्टर की ज़रूरत न पड़े. ये करना मुश्किल नहीं है. दुनिया के कई देशों ने भी प्रदूषण से छुटकारा पाया है.''
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कई देश प्रदूषण से कैसे निपटे?
भारत के अलावा कई दूसरे देश भी प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं. इन देशों में प्रदूषण से निपटने के कई तरीके अपनाए गए हैं. स्विट्ज़रलैंड में पार्किंग की जगहों को कम करने का फ़ैसला किया गया.
चीन
- मल्टी-फंक्शन डस्ट सेपरेशन ट्रक का इस्तेमाल किया गया. इसके ऊपर एक काफ़ी बड़ा वॉटर कैनन लगा होता है, जिससे 200 फ़ीट ऊपर से पानी का छिड़काव होता है.
- पानी के छिड़काव से धूल नीचे बैठाई जाती है.
- वेंटिलेटर कॉरिडोर बनाने से लेकर एंटी स्मॉग पुलिस तक बनाई गई.
- पुलिस जगह-जगह जाकर प्रदूषण फैलाने वाले कारणों, जैसे सड़क पर कचरा फेंकने और जलाने पर नज़र रखती है.
- कोयले की खपत को भी कम करने की हुई कोशिश
पेरिस
- हफ़्ते के आख़िर में कार चलाने पर पाबंदी
- सार्वजनिक वाहनों को मुफ्त किया गया
- गाड़ियों सिर्फ़ 20 किमी. प्रति घंटे की गति से चलाने का आदेश
जर्मनी
- सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने की कोशिश
- ज़्यादा आबादी से जोड़ने के लिए बनाया गया नेटवर्क
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