हलाल विवाद क्या है, कर्नाटक में क्यों हो रही है बैन और बहिष्कार की मांग ? पूरा मामला समझिए
बेंगलुरु, 1 अप्रैल: कर्नाटक में हिजाब विवाद के बाद मंदिरों के पास लगने वाले मेलों से मुस्लिम कारोबारियों को दूर रखने की मांग के बाद हलाल मीट के बैन और बहिष्कार की मांग जोर पकड़ रही है। यह धीरे-धीरे पूरे राज्य फैल रहा है। दूसरी तरफ इस विरोध के खिलाफ भी प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। मामला कर्नाटक हाई कोर्ट में भी पहुंच चुका है, जिसने इस मामले में तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। वहीं इस झंझट के कानूनी समाधान का भी सुझाव आने लगा है, लेकिन यह मसला ठंडा नहीं पड़ा है और इसको लेकर राजनीति भी शुरू है। आइए जानते हैं पूरा हलाल विवाद क्या है?

क्या है कर्नाटक हलाल विवाद ?
कर्नाटक में हिंदू जागृति समिति, श्रीराम सेने, बजरंग दल और दूसरे दक्षिणपंथी संगठन मीट बेचने वाली दुकानों से हलाल सर्टिफिकेशन हटाने की मांग कर रहे हैं। यह मसला सोशल मीडिया से लेकर प्रदर्शनों के जरिए उठाया जा रहा है और प्रदेश में हलाल मीट बेचने वाली दुकानों के बहिष्कार की मांग हो रही है। हिंदू संगठनों की ओर से कहा जा रहा है कि हलाल मीट खरीदना बंद करें। इसकी जगह उन्हें 'झटका मीट' खरीदने की सलाह दी जा रही है, जो कि 'मीट काटने का हिंदुओं का परंपरागत तरीका' है। मामला दोनों ओर से गरम हो रहा है। आरोपों के मुताबिक हिंदू जागृति समिति के लोगों ने कथित रूप से बेंगलुरु के कुछ दुकानों पर लगे 'हलाल उपलब्ध' का बोर्ड हटाकर सिर्फ हिंदू रेस्टोरेंट में खाएं के बैनर लगा दिए।
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क्यों हो रहा है हलाल मीट का विरोध ?
कर्नाटक में हिंदू जनजागृति समिति ने पहले कहा था कि वह हलाल मीट का बहिष्कार इसलिए शुरू करने जा रहे हैं, क्योंकि 'इसमें इस्लामिक तरीके से मारे जाते हैं और इसे हिंदू देवताओं को नहीं चढ़ाया जा सकता।' इस समिति के प्रवक्ता मोहन गौड़ा ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा था, 'उगाडी (कन्नड नया वर्ष) के दौरान काफी मीट खरीदा जाता है और हम हलाल मीट के खिलाफ मुहिम शुरू कर रहे हैं। इस्लाम के मुताबिक हलाल मीट पहले अल्लाह को ऑफर किया जाता है और ऐसे मीट को हिंदू देवताओं को नहीं चढ़ाया जा सकता।' हलाल मीट को लेकर यह भी दावा किया जा रहा है कि इससे कमाए गए पैसों का इस्तेमाल 'गलत वजहों' और 'आर्थिक जिहाद' के लिए किया जाता है। श्रीराम सेने के संस्थापक प्रमोद मुतालिक ने दावा किया था कि 'हलाल प्रोडक्ट के लिए जो पैसे दिए जाते हैं, उसका इस्तेमाल राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए किया जाता है। इस पैसे का इस्तेमाल आतंकी संगठनों के अपराधियों को जेल से निकालने के लिए किया जाएगा।'

हलाल विवाद पर बीजेपी का स्टैंड ?
कर्नाटक हलाल विवाद में सत्ताधारी बीजेपी में एक राय नहीं है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने कहा था, 'अगर मुस्लिम यह कह सकते हैं कि वे सिर्फ हलाल से कटा हुआ मीट ही खाएंगे, फिर इसमें क्या गलत है कि कोई हलाल कटा हुआ मीट इस्तेमाल न करे?' उन्होंने कहा था कि सांप्रदायिक सद्भाव 'सिर्फ एक तरफ से नहीं, दूसरी तरफ से भी होनी चाहिए।' उन्होंने कहा था, 'हलाल को अनिवार्य करना आर्थिक जिहाद है, और इसे सिर्फ मुस्लिमों को अपने ही धर्म के कारोबारियों से खरीदने के लिए बनाया गया है और न कि दूसरों के साथ।' हालांकि, विवाद बढ़ने पर कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष नलीन कुमार कतील ने इसके 'कानूनी समाधान' की ओर इशारा किया है। उन्होंने कहा है, 'हम हलाल विवाद का एक कानूनी समाधान देंगे। जब हिजाब विवाद शुरू हुआ था तो हमने कानूनी समाधान दिया था, उसी तरह हम इसके लिए भी देंगे।' एक्सपर्ट मान रहे हैं कि हलाल मीट पर पूरी तरह पाबंदी की संभावना नहीं है, लेकिन यह बयान हलाल मीट सर्टिफिकेशन को नियंत्रित करने का संकेत लग रहा है।

कर्नाटक सरकार का क्या कहना है ?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई इस मामले पर पहले कह चुके हैं कि सरकार पहले इस मामले को देखेगी और फिर कोई स्टैंड लेगी। उधर बायोकॉन की प्रमुख किरण मजुमदार शॉ ने एक ट्वीट में 'बढ़ते सांप्रदायिक विभाजन' की बात कहकर इस मामले पर सीएम को तत्कालिक प्रतिक्रिया देने को मजबूर किया है। गुरुवार को बोम्मई ने कहा है कि सभी को संयम दिखाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'वर्षों से विभिन्न मसलों पर हम अपने विश्वास के साथ जी रहे हैं। कर्नाटक शांति और प्रगति के लिए जाना जाता है। सामाजिक मुद्दों को शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए सुलझाना संभव है। इसलिए सभी लोगों को संयमित बर्ताव करना चाहिए और शांति और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल यूनिफॉर्म मुद्दा पहले ही सुलझ चुका है।

हलाल मीट का विरोध और उसके विरोध का भी विरोध
न्यूज18 के मुताबिक कर्नाटक में हलाल मीट के बहिष्कार का मामला गर्माने के बाद सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) ने शुक्रवार को कहा है कि वह राज्य के तालुकाओं और जिलों में प्रदर्शन करेगा। इसके अध्यक्ष अब्दुल मजीद ने आरोप लगाया कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी 'अराजकता पैदा कर रही है', इसके लिए उसने प्रदर्शन किया है। पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए सुरक्षा इंतजाम सख्त कर दिए हैं। इस बीच हलाल मीट का विरोध बढ़कर शिवमोगा, रामनगर और मांड्या जिलों तक में फैल गया है। सोशल मीडिया और पर्चों के जरिए हिंदूवादी संगठनों ने हलाल मीट से दूरी बनाने की अपील शुरू कर दी है। शिवमोगा में इस संबंध में सात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज होने की भी खबर है। वीएचपी ने भी सिर्फ हिंदुओं के दुकानों से ही मीट खरीदने का आह्वान करना शुरू कर दिया है। मैसुरू जिले में जन जागृति समिति ने जिला प्रशासन से हलाल मीट प्रोडक्ट पर पाबंदी लगाने की मांग की है। इस तरह यह विवाद गहराता जा रहा है। (तस्वीरें-सीएम के अलावा बाकी सांकेतिक)












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