LAC पर भारत और चीन के बीच टकराव पर क्या बोल रही है विदेशी मीडिया ? जानिए

नई दिल्ली- भारत और चीन के सैनिकों के बीच पांच दशकों से भी ज्यादा वक्त में सबसे बड़ा खूनी संघर्ष हुआ है। भारत के एक कर्नल समेत 20 जवान शहीद हुए हैं, तो चीन के इससे दोगुने से भी ज्यादा सैनिकों और अफसर भी हताहत हुए हैं। जाहिर है कि दो परमाणु ताकतों के बीच इस तरह के संघर्ष की बात सुनकर दुनियाभर के देशों के कान खड़े हो गए हैं। इस विवाद को लेकर विदेशी मीडिया भी बहुत ही ज्यादा सक्रिय हो गई है। आइए जानते हैं कि दुनिया के कुछ बड़ी मीडिया ने इस टकराव को लेकर क्या कहा है।

टकराव पर ये बोल रही है विदेशी मीडिया

टकराव पर ये बोल रही है विदेशी मीडिया

जैसे ही लद्दाख में एलएसी के पास भारत और चीन के सैनिकों के बीच खूनी संघर्ष में दोनों ओर से हताहत होने की खबरें आईं विदेशी मीडिया ने भी इसपर अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। दो परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी मुल्कों के बीच हुई ये खूनी झड़प कोई मामलूी हिंसा नहीं है। इसमें भारत की ओर से एक कर्नल समेत 20 सैनिकों की शहादत हुई है तो चीन के भी कमांडिंग ऑफिसर समेत 40 से ज्यादा सैनिक ढेर कर दिए गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस हिंसा के बारे में अपने आर्टिकल में लिखा, 'दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ पोजिशन लेना शुरू कर दिया, छोटी-छोटी झड़पों ने बड़े विवाद का रूप ले लिया, खासकर चीन ने अपनी ताकत दिखाने की कोशिशें शुरू कर दीं, तोपखाने भेजने लगा, बख्तरबंद गाड़ियों के साथ जवानों की तैनाती शुरू कर दी, ट्रकों की भरमार लगा दी गई और खुदाई करने वाली मशीनें लगा दीं। ' इस अखबार ने आगे लिखा है, 'दोनों देशों और उनके राष्ट्रवादी नेताओं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजी से मुखर रूप धारण कर लिया है, जिससे टकराव के नियंत्रण से बाहर जाने का खतरा पैदा हो रहा है।'

भारत-चीन टकराव से हैरान है विदेशी मिडिया

भारत-चीन टकराव से हैरान है विदेशी मिडिया

वहीं वॉशिंगटन पोस्ट लिखता है, 'दुनिया के दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देश, भारत और चीन दोनों ही बढ़ती शक्तियां हैं जो एक-दूसरे को बहुत ही एहतियात से देखते हैं। 1962 में एक युद्ध के अलावा, उन्होंने बातचीत के माध्यम से समय-समय पर सीमा विवाद का समाधान किया है। हालांकि, हाल के कुछ हफ्तों में दोनों देशों के बीच तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। भारत और चीन के जवानों में झड़पें हुई हैं, जिससे 2,200 मील की सीमा में दो जगहों पर दर्जनों जख्मी हुए हैं।' जबकि, बीबीसी ने एक लेख की हेडलाइन लगाई है कि भारत और चीन के बीच असमान्य सा संघर्ष हुआ है, जिसमें पत्थरों और डंडों का इस्तेमाल किया गया है। बीबीसी ने लिखा है कि 'परमाणु ताकत से लैस दो पड़ोसियों के बीच टकराव का एक मुख्तलिफ इतिहास रहा है, जिसमें 3,440 किलोमीटर की सीमा और दोनों को अलग करने वाली बेकार सी खींची गई एलएसी को लेकर अपने-अपने क्षेत्रीय दावे रहे हैं। सीमा पर पेट्रोलिंग के दौरान अक्सर झड़पें होती रहती हैं। लेकिन, चार दशकों में एक भी गोली नहीं चली है। इसलिए कई महीनों के तनाव के बाद हुए इस टकराव ने कई लोगों को हैरान कर दिया है। '

विदेशी मीडिया के निशाने पर चीन

विदेशी मीडिया के निशाने पर चीन

जबकि, द गार्डियन लिखता है, 'दुनिया के सबसे ज्यादा टकराव वाले इलाकों में से एक मानी गई जगह पर दो परमाणु ताकतें डंडों और पत्थरों के साथ आमने-सामने हो गईं, यह एक ऐसा खूनी संघर्ष हुआ है, जो विस्तारवादी राष्ट्रवाद के लगातार मौजूद खतरे के प्रति आगाह करता है। ' बता दें कि सोमवार की रात लद्दाख के गलवान वैली में चीन ने अचानक नापाक हरकतें शुरू कर दी। इसकी वजह से दोनों ओर से जवान डंडों और पत्थरों से ही आपस में भिड़ गए, जिसमें भारत के एक कर्नल समेत 20 सैनिक शहीद हो गए। जबकि, खबरों के मुताबिक चीनी सेना का भी एक कमांडर मारा गया और 40 से ज्यादा उसके भी जवान भी हताहत हो गए।

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