Mahua Moitra Case: एथिक्स कमेटी क्या है, महुआ मोइत्रा के मामले में किस तरह का ऐक्शन ले सकती है?

Mahua Moitra bribery Case: लोकसभा की एथिक्स कमेटी की दो साल से ज्यादा समय बाद पहली बैठक हो रही है। संसद की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक इससे पहले एथिक्स कमेटी की बैठक 27 जुलाई, 2021 को हो रही है।

लोकसभा की एथिक्स कमेटी को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की शिकायतों पर सुनवाई करनी है। दुबे ने महुआ पर संसद में सवाल पूछने के लिए रिश्वत लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

mahua moitra in ethics committee

एथिक्स कमेटी क्या है?
लोकसभा की पहली एथिक्स कमेटी का गठन 13वीं लोकसभा के दौरान तत्कालीन स्पीकर ने 16 मई, 2000 को किया था। एथिक्स कमेटी में 15 सदस्य होते हैं, जिन्हें स्पीकर नामांकित करते हैं। इस कमेटी का कार्यकाल एक साल का होता है और इसके चेयरमैन इन्हीं सदस्यों में से होते हैं। अभी इसके चेयरमैन भाजपा सांसद विजय कुमार सोनकर हैं।

एथिक्स कमेटी का कार्य लोकसभा के किसी सदस्य से संबंधित अनैतिक आचरण की शिकायतों की जांच करना है। कमेटी को इस जांच की सिफारिश स्पीकर करते हैं, जिस मामले की जांच कराना वे आवश्यक समझते हैं। इसके लिए जरूरी है किसी मौजूदा सदस्य के खिलाफ 'अनैतिक आचरण' की शिकायत स्पीकर को लिखित में दी जाए।

शिकायतकर्ता की बड़ी जिम्मेदारी
शिकायतकर्ता के लिए यह भी आवश्यक है कि वह 'आरोपों को प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज के रूप में या अन्य तरह के उचित साक्ष्य प्रस्तुत करे'। लोकसभा के रूलबुक में यह स्पष्ट किया गया है कि 'अप्रमाणित मीडिया रिपोर्टों पर आधारित किसी भी तरह के आवेदन (शिकायत) पर विचार नहीं किया जाएगा'।

महुआ मोइत्रा के मामले में शिकायतकर्ता निशिकांत दुबे के लिए यह भी आवश्यक है कि वह एक हलफनामा देकर पुष्टि करें कि 'शिकायत गलत, ओछा या खिजाऊ नहीं है और अच्छी मंशा से की गई है।'

एथिक्स कमेटी की जिम्मेदारी?
एथिक्स कमेटी की यह जिम्मेदारी है कि स्पीकर ने उसके पास जो शिकायत भेजी है, उसको लेकर संबंधित लोकसभा सदस्य के खिलाफ उठाए गए सभी 'अनैतिक आचरण' की जांच करे और जो भी उचित समझे उसकी सिफारिश करे।

एथिक्स कमेटी पहले प्रारंभिक जांच करेगी
एथिक्स कमेटी पहले मामले की प्रारंभिक जांच करेगी। अगर प्राथमिक जांच में उसे लगता है कि प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता है तो वह मामले को वहीं खत्म कर सकती है और स्पीकर को अपने फैसले की सूचना दे सकती है।

विस्तृत जांच के बाद कार्रवाई की सिफारिश
लेकिन, अगर प्रारंभिक जांच के बाद कमेटी की राय में सदस्य के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है तो वह मामले की आगे की जांच कर सकती है। एथिक्स कमेटी संबंधित सदस्य के खिलाफ जांच पूरी हो जाने के बाद एक रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसमें कार्रवाई की सिफारिशें भी शामिल होंगी और उसे स्पीकर को भेजा जाएगा।

स्पीकर एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट सदन के सामने भी रखवा सकता है
यह स्पीकर का विवेकाधिकार है कि वह चाहे तो एथिक्स कमेटी की सिफारिशों को सदन के सामने रखने का फैसला करे। ऐसी स्थिति में स्पीकर सदन में एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट पर बहस की भी अनुमति दे सकता है, लेकिन यह आधे घंटे से ज्यादा की नहीं होगी। अगर इस मामले में संबंधित सदस्य के खिलाफ आरोप सही पाए जाते हैं तो उसकी संसद सदस्यता भी छिन सकती है।

महुआ मोइत्रा रिश्वत केस क्या है?
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से टीएमसी की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा पर संसद में सवाल पूछने के लिए दुबई के बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी से 2 करोड़ रुपए कैश लेने का आरोप है। इसके अलावा भी हीरानंदानी से महुआ को कई तरह के महंगे गिफ्ट लेने के आरोप हैं।

हीरानंदानी ने यह भी आरोप लगाया है कि महुआ ने उन्हें लोकसभा की ई-मेल आईडी दी, ताकि वह अडाणी ग्रुप को निशाना बनाने वाली जानकारी उन्हें भेज सकें और संसद में प्रश्न पूछ सकें। उन्होंने यह भी दावा किया है कि बाद में उन्होंने लॉग-इन भी दे दिया, जिससे वह सीधे पोस्ट कर सकें।

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