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इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम क्या है? जिसे गडकरी ने 189 लोकसभा सीटों पर जीत के लिए बताया महत्वपूर्ण

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इसे देश के 189 लोकसभा सीटों के सियासी भविष्य से जोड़ दिया है। गडकरी ने साफ तौर पर कहा है कि अगर सरकार यह कार्यक्रम नहीं शुरू की होती तो किसानो को गन्ने का बकाया नहीं मिल पाता और इसे झेल पाना नेताओं के लिए बहुत मुश्किल हो जाता।

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम क्या है?
इथेनॉल कृषि पर आधारित उत्पाद है। यह मुख्य तौर पर चीनी उद्योग के बाय-प्रोडक्ट विशेष रूप से गुड़ से तैयार किया जाता है। इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य मोटर स्प्रिट के साथ इथेनॉल को मिलाना है। इससे प्रदूषण तो कम किया ही जा सकता है, विदेशी मुद्रा की भी बजत हो सकती है और चीनी उद्योग के लिए वैल्यू एडिशन अलग से हो पाता है।

The elections for 189 Lok Sabha seats in the country are influenced by sugarcane farmers. If sugarcane farmers get angry then the ruling party may suffer losses. Union Transport Minister Nitin Gadkari has given the reason

गन्ने की कीमतें गिरने पर किसानों मिलती है राहत
खासकर जब गन्ने का बहुत ज्यादा उत्पादन होता है और कीमतें गिरने लगती हैं तो चीनी उद्योगों के लिए किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर करने में कठिनाई होने लगती है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसका लाभ सीधे किसानों को मिल पाता है और उन्हें समय पर गन्ने का भुगतान कर पाना आसान हो जाता है।

डीजल वाहनों में भी इथेनॉल मिलाने का है प्रस्ताव
इस योजना के तहत सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य पहले ही बढ़ा चुकी है। नितिन गडकरी ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से ये भी आग्रह किया है कि डीजल में 15% इथेनॉल मिलाने के ऑटोमेटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इडिया (एआरएआई) के प्रस्ताव और टेस्ट रिपोर्ट पर भी गौर करें। अभी सिर्फ पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की इजाजत है।

सरकार ने इथेनॉल की खरीद में किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए पूरे इथेनॉल सप्लाई चेन को बहुत ही आसान किया है। इसका परिणाम ये हुआ है कि पेट्रोल में मिश्रण के लिए इथेनॉल की सप्लाई में निरंतर बढ़त्तरी हुई है।

यूपी के गन्ना किसानों को समय पर हो रहा है भुगतान-गडकरी
टोयोटा किर्लोस्कर की ओर से तैयार पहले इलेक्ट्रिक फ्लेक्स ईंधन वाहन के प्रोटोटाइप के अनावरण के मौके पर गडकरी ने कहा कि 'पहले चीनी मिल किसानों को गन्ना का बकाया नहीं दे पाते थे। क्योंकि, सरकार ने इथेनॉल के उत्पादन पर बहुत ज्यादा जोर दिया है, हम बहुत ही बेहतर स्थिति में हैं।' उन्होंने कहा, 'उत्तर प्रदेश के किसानों को समय पर उनका बकाया मिल रहा है।'

इथेनॉल के रास्ते 189 लोकसभा सीटें पर पकड़!
गडकरी ने इथेनॉल के उत्पादन की अहमियत बताते हुए कहा कि देश में '189 ऐसी संसदीय सीटें हैं, जहां किसान गन्ना उगाते हैं और अगर उन्हें उनका बकाया नहीं मिलेगा तो हम फैसले लेने के लिए भी यहां (दिल्ली) नहीं आ सकेंगे।' देश में यूपी सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, जहां लोकसभा की सबसे ज्यादा 80 सीटें हैं।

यूपी, महाराष्ट्र और कर्नाटक में सबसे ज्यादा गन्ने का उत्पादन
यूपी (कुल 80 लोकसभा सीट ) के अलावा, महाराष्ट्र (कुल 48 लोकसभा सीट) और कर्नाटक (कुल 28 लोकसभा सीट) देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य हैं और इन तीनों प्रदेशों में करीब देश का 80 फीसदी गन्ना पैदा होता है।

अगर अप्रैल 2021 तक के आंकड़े देखें तो यूपी में 105.62 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ। हालांकि, उस अवधि तक महाराष्ट्र में 105.63 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। वहीं कर्नाटक में उस साल 41.67 लाख टन चीनी उत्पादित हुआ था। इन तीनों प्रमुख गन्ना उत्पादकों के अलावा तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, गुजरात, बिहार, हरियाणा, गोवा और पंजाब में भी गन्ने का उत्पादन होता है।

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