क्या है NEP और क्यों है पिछली नीतियों से अलग? जानें केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जुबानी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) से शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रूबरू कराया। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी की इस नई नीति की क्या खासियत है और यह कैसे अलग है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) आखिर क्या है? इसकी पिछली नीतियों से तुलना करने पर कैसे अलग है? इसका जवाब पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को दिया। उन्होंने इस नीति की खासियत और उल्लेख किया। धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि मोदी सरकार के भविष्य के विजन में इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ केयर सिस्टम और रोजगार सृजन से कहीं ऊपर मौजूदा एजुकेशन सिस्टम पर बदलाव को महत्व देना है।
एएनआई पॉडकास्ट में प्रधान ने देश भर में पाठ्यक्रम, संरचना और इसके कार्यान्वयन में बदलाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी। साथ ही कुछ राज्य सरकारों द्वारा एनईपी के प्रतिरोध और विरोध के बारे में भी बात की। आइए जानते हैं क्या है एनईपी धर्मेंद्र प्रधान की जुबानी...

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एजुकेशन लाइफ लॉन्ग है। एजुकेशन सभी को चाहिए। हमें रोज नई एजुकेशन के बारे में सीखने को मिलता है। उदाहरण के तौर पर चैट जीपीटी। भारत में चंद लोगों को ही इसके बारे में पता था। छह महीने पहले यह चर्चा में बिल्कुल नहीं था। आज गांव-गांव तक यह बात पहुंच चुकी है कि चैट जीपीटी मनुष्य की क्रिएटिविटी के लिए एक चुनौती है। इस तरह की चीजें सामने आती रहेंगी।
एनईपी की क्या है खासियत?
नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की खासियत क्या है? इसकी पिछली नीतियों से तुलना करने पर कैसे अलग है? इसपर प्रधान ने कहा कि साल 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी पर लोगों ने अपना भरोसा जताया, उसमें विशेष तौर पर उम्मीद रही थी कि मोदी ने आज की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, भविष्य कैसे चलेगा? इसके लिए कुछ नीति बनाई गई। पीएम मोदी ने यह पहला फैसला लिया कि इन्फ्राट्रक्चर और हेल्थ केयर सिस्टम डेवलपमेंट किया जाएगा। साथ ही रोजगार के लिए नए अवसर दिए जाएंगे। लेकिन, इन सबसे ऊपर पीएम ने मौजूदा एजुकेशन सिस्टम पर बदलाव लाने को महत्व दिया। हम बदलने वाले लोग नहीं है। उसको बड़ा, एक्सपैंशन वाले लोग हैं। भविष्य को देखते हुए हमने योजना बनाई।
एजुकेशन से ही निकल कर आए आइडिया
एजुकेशन विषय को गहराई से समझने के लिए इतिहास के पन्नों को पलटते हैं, जिसमें बाल गंगाधर तिलक ने कहा था कि उपनिषद की आयु 8 से 10 हजार साल है। जैसे कि 'गीता'। प्रधान ने आगे कहा कि गीता के बारे में जो भी फियोलॉजिकल बातें कही गई हैं, आज भी यूनिवर्सल हैं। इसका स्त्रोत अनंत काल से है। उसको एक टेक्स्ट बुक फॉर्मेट यानी हाशिय पर पहले वरबल कम्युनिकेशन द्वारा लाया गया। उसके बाद लिपी बनी और फिर किताबों में लाया गया। यह हमारी गहराई है। प्रधान ने आगे कहा कि भारत में एजुकेशन से ही निकल कर आइडिया सामने आए। गुजरात में पीएम मोदी का गांव वडनगर में एएसआई वालों ने खुदाई स्थल पर बहुत ही पुरातन अलग-अलग समय अवधि के सिक्के निकाले हैं।
कौन है धर्मेंद्र प्रधान?
धर्मेंद्र प्रधान दूसरी पीढ़ी के राजनेता हैं और वर्तमान में पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। उनके पास सबसे लंबे समय तक पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री रहने की उपलब्धि भी है। यह भूमिका उन्होंने 2014-2021 के बीच सात सालों तक निभाई। गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के 8 मिलियन से अधिक परिवारों को एलपीजी कनेक्शन प्रदान करने वाली प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के बाद प्रधान को 'उज्ज्वला पुरुष' के रूप में भी जाना जाता है।
जानें कैसा रहा राजनीतिक सफर?
प्रधान ने अपना राजनीतिक करियर एबीवीपी कार्यकर्ता के रूप में शुरू किया और संगठन में भी कई पद संभाले, जिसमें 2000-2006 के बीच बीजेपी की युवा शाखा, भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्य करना और 2007 में बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव बनना शामिल है।












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