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संस्थागत क्वारंटीन और इसकी नई गाइडलाइंस क्या है? जानिए

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नई दिल्ली- कोरोना संकट ने लोगों को कई नए-नए शब्दों से वाकिफ कराया है। उसी में एक है क्वारंटीन, जिसका नाम सुनकर ही एक अजीब सी सिहरन पैदा होने लगती है। अगर सीधे शब्दों में कहें तो इसमें उन लोगों को रखा जाता है, जो कोविड-19 संक्रमित होने और न होने के बीच की स्थिति से गुजर रहे होते हैं। उन्हीं लोगों को क्वारंटीन में रहने के लिए कहा जाता है, जिनकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री होती है या फिर वो किसी न किसी रूप में नोवल कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए होते हैं। क्वारंटीन में रहने का फायदा ये है कि अगर वह शख्स भी संक्रमित निकला तो उससे दूसरों के संक्रमित होने का खतरा टल जाता है और यदि उसमें लक्षण दिखने लगते हैं तो उसका फौरन टेस्ट कराकर उसका उचित और संभव इलाज करने का प्रयास किया जाता है।

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होम और इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन में अंतर

होम और इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन में अंतर

इस समय पूरे देश में कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों को 7 से लेकर 21 दिन या कभी-कभी 28 दिनों तक क्वारंटीन में रखे जाने की व्यवस्था है। सामान्य भाषा में क्वारंटीन का अर्थ है कि जो लोग भी किसी संक्रमित मरीज के संपर्क में आए हैं या उनके संपर्क में आए होने की आशंका है, उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्धारित नियमों के तहत सामान्य आबादी से अलग-थलग रखने की व्यवस्था होती है, ताकि अगर कहीं वे भी संक्रमित हो चुके हों तो और लोगों तक नोवल कोरोना वायरस का संक्रमण न फैला सकें। लोगों को क्वारंटीन रखने के अभी देश में दो तरह की व्यवस्था है या तो संदिग्धों को अपने घर पर ही सबसे अलग रहने को कहा जाता है, जिससे कि संक्रमण के खतरे को टाला जा सके। यह होम क्वारंटीन है। वहीं, जब संदिग्धों को अनिवार्य रूप से सरकार की व्यवस्था में किसी निर्धारित जगह पर रखा जाता है तो वह संस्थागत क्वारंटीन कहलाता है। इसमें लोगों को अपने घर जाने या परिवार के लोगों के पास जाने की इजाजत नहीं मिलती।

संस्थागत क्वारंटीन में 24 घंटे निगरानी

संस्थागत क्वारंटीन में 24 घंटे निगरानी

संस्थागत क्वारंटीन की व्यवस्था भी अलग-अलग राज्य लोगों की जरूरतों के मुताबिक करते हैं। मसलन एक व्यवस्था वह होती है, जिसमें कई मरीजों को एक बड़े स्थान, स्टेडियम, स्कूल, कॉलेज या किसी भी बड़ी जगह में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए क्वारंटीन के तय समय तक ठहराया जाता है। दूसरी संस्थागत क्वारंटीन वह व्यवस्था है, जिसमें संदिग्ध संक्रमित मरीजों को ठहराने का इंतजाम तो सरकार ही करती है, लेकिन इसमें उन लोगों की जरूरतों का उनके हिसाब से ख्याल रखा जाता है। मसलन, किसी होटल में या ऐसे ही किसी स्थान में जहां ठहरने का पूरा खर्चा उस व्यक्ति को उठाना पड़ता है। हालांकि, उसे वहां क्वारंटीन नियमों का उसी तरह पालन करना होता है, जो पहले से तय किया गया है, जिसमें वह किसी से भी (अपने परिवार के लोगों से भी नहीं, अन्यथा परिवार का कोई और सदस्य भी उसके साथ क्वारंटीन में न हो) मिल नहीं सकता। संस्थागत क्वारंटीन वाले व्यक्ति को निर्धारित अवधि तक बाहर निकलने की इजाजत नहीं होती और वह अपने घर भी नहीं जा सकता। यही नहीं वह 24 घंटे स्वास्थ्य विभाग के लोगों और प्रशासन की निगरानी में रहता है।

अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग व्यवस्था

अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग व्यवस्था

इस समय अलग-अलग राज्यों में घरेलू उड़ानों, ट्रेनों, बसों या दूसरे साधनों से यात्रा करके एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने वाले लोगों के लिए क्वारंटीन के अलग-अलग प्रोटोकॉल हैं। मसलन, कर्नाटक में 14 दिन की संस्थागत क्वारंटीन जरूरी है तो बिहार और यूपी में कोरोना के लक्षण नहीं रहने पर लोगों को होम क्वारंटीन में भेज दिया जाता है। कुछ राज्यों में जब तक कोरोना टेस्ट का रिजल्ट निगेटिव नहीं आता तबतक संस्थागत क्वारंटीन में ही रोका जाता है और जांच निगेटिव आने पर घर भेज दिया जाता है।

विदेश से आने वालों के लिए नई गाइडलाइंस

विदेश से आने वालों के लिए नई गाइडलाइंस

रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने विदेशों से आने वाले यात्रियों के लिए क्वारंटीन को लेकर कुछ खास गाइडलाइंस जारी किए हैं। इसके तहत विमान में चढ़ने से पहले सभी यात्रियों को यह लिखित में देना होगा कि वे अनिवार्य रूप से 14 दिन क्वारंटीन में रहेंगे, जिसमें उन्हें अपने खर्चे पर 7 दिन संस्थागत क्वारंटीन रहना होगा और उसके अगले 7 दिन वह अपने घर पर आइसोलेशन में रहेंगे और अपनी सेहत की निगरानी खुद करेंगे। सिर्फ कुछ खास मामलों में ही 14 दिन के होम क्वारंटीन की इजाजत दी जा सकती है। विदेशों से आने वाले सभी यात्रियों को संबंधित राज्य या संघ शासित क्षेत्रों की सरकारों की ओर से की गई व्यवस्थाओं के तहत संस्थागत क्वारंटीन सुविधाओं तक ले जाया जाएगा। इन सबको 7 दिनों तक अनिवार्य रूप से संस्थागत क्वारंटीन में रहना होगा और उन्हें आईसीएमआर के प्रोटकॉल के तहत कोविड-19 टेस्ट करवाना होगा और अगर पॉजिटिव पाए जाएंगे तो उनकी स्थिति के मुताबिक या तो इलाज के लिए उचित कोविड सेंटर में भेजा जाएगा या फिर होम आइसोलेशन में रहने की हिदायत दी जाएगी। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की नई गाइडलाइंस यहां देखिए।

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English summary
What is Institutional Quarantine? Rules and Guidelines of Institutional Quarantine .
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