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Generic Medicine: क्या होती है जेनेरिक दवाएं, आखिर क्यों मिलती हैं सस्ती, जानिए कैसी होती है इनकी गुणवत्ता

What is Generic Medicine: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लालकिले से देश को संबोधित करते हुए जेनेरिक दवाओं और जन औषधि केंद्र का जिक्र किया। पीएम ने कहा कि जन औषधि केंद्रों ने देश के सीनियर सिटिजेन, मध्य वर्गीय परिवार को एक नई ताकत दी है।

पीएम ने कहा परिवार में किसी को डायबिटीज हो जाए तो 2-3 हजार रुपए की दवाएं स्वाभाविक हो जाती है। हमने जन औषधि केंद्र के जरिए 100 रुपए की दवाओं को 10-15-20 रुपए में मुहैया कराया है। पीएम मोदी के भाषण के बाद आपके मन में भी सवाल उठ रहा होगा कि आखिर ये जेनेरिक दवाएं क्या होती हैं और ब्रांडेड दवाओं से क्यों अलग हैं।

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आज आपको इन सवालों के जवाब हम देने की कोशिश करेंगे। जेनेरिक और ब्रांड की दवाओं के बीच में आखिर क्या अंतर होता है, दोनों के दाम में इतना फर्क क्यों होता है। दोनों की गुणवत्ता में क्या खास फर्क है।

क्या होती है ब्रांडेड दवाएं
किसी भी दवा की भीतर जो सॉल्ट होता है वह अहम होता है। ऐसे में जब भी कोई कंपनी नए सॉल्ट की खोज करती है तो उसका पेटेंट करा लेती है ताकि दूसरी दवा कंपनियां इसे कॉपी ना कर सकें। इसके बाद ये कंपनियां इस दवा को अपने ब्रांड के नाम से महंगी कीमतों पर बेचती हैं, यही वजह है कि इसे ब्रांड मेडिसिन या फिर ब्रांडेड दवा कहते हैं। उदाहरण के तौर पर क्रोसीन, डोलो आदि।

क्या होती हैं जेनेरकि दवाएं
वहीं जेनेरिक दवाओं की बात करें तो ये दवाएं ब्रांड के नाम से नहीं बल्कि सॉल्ट के नाम से बिकती हैं। जिस भी कंपनी ने किसी खास सॉल्ट की खोज की है, जब उस कंपनी को कुछ लॉयल्टी दे दी जाती है तो वह कंपनी उस दवा को सॉल्ट के नाम से बेचने का अधिकार दे देती है। ऐसे में इन दवाओं को दवा कंपनी जेनेरिक नाम यानि सॉल्ट के नाम से बेचती हैं ना कि किसी ब्रांड के नाम से। इन दवाओं को ही जेनेरिक दवाएं कहते हैं।

दोनों की गुणवत्ता में क्या अंतर
अगर इन दोनों दवाओं में अंतर की बात करें तो इसमे कुछ खास फर्क नहीं होता है। दोनों में मुख्य रूप से नाम और दाम का फर्क होता है। दोनों ही दवाओं के सॉल्ट एक ही होते हैं। यही नहीं दोनों दवाओं की डोज, मात्रा, गुणवत्ता, साइड इफेक्ट भी एक जैसे होते हैं। दोनों दवाओं को लेने का प्रोटोकॉल भी एक जैसा होता है।

दोनों के दाम में क्यों है अंतर
ब्रांड की दवाएं काफी महंगी होती है, इसकी बड़ी वजह यह होती है इसके अनुसंधान, ब्रांडिंग, मार्केटिंग में काफी पैसा खर्च होता है। वहीं जेनेरिक दवाओं के सस्ते होने की वजह यह है कि इन्हें तैयार करने में अनुसंधान, मार्केटिंग में खर्च नहीं होता है। इसे सिर्फ सॉल्ट के नाम से बेचा जाता है। कई बार ऐसा पाया जाता है कि जेनेरिक दवाओं की तुलना में ब्रांड की दवाएं ज्यादा असरकार होती हैं।

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