सावधान! Ghibli ट्रेंड के पीछे छिपा बड़ा खतरा? घिबली स्टाइल आर्टवर्क नहीं बनाने के तीन बड़े कारण

Ghibli Trend Image: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक नया ट्रेंड छाया हुआ है और वो है घिबली स्टाइल आर्टवर्क। लोग धड़ल्ले से अपनी तस्वीरें अपलोड कर रहे हैं और AI जनरेटेड एनिमेटेड अवतार बना रहे हैं।

फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर हर ओर घिबली स्टाइल की प्रोफाइल पिक्चर्स नजर आ रही हैं। लेकिन क्या आपने सोचा है कि इस मासूम से दिखने वाले ट्रेंड के पीछे कोई खतरा भी छिपा हो सकता है?

Ghibli Image Trend

कैसे बन रही हैं ये Ghibli स्टाइल तस्वीरें?

ये तस्वीरें ओपन AI के चैट जीपीटी 4.0 और अन्य AI टूल्स की मदद से बनाई जा रही हैं। चैटजीपीटी के पेड वर्जन के अलावा ट्विटर पर Grok AI जैसी फ्री सर्विसेस से भी लोग अपनी इमेज को अपलोड कर रहे हैं और 'Turn this into Ghibli art' जैसे प्रॉम्प्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

लेकिन, क्या आपने कभी यह सोचा है कि ये AI टूल्स आपके डेटा के साथ क्या कर रहे हैं? आपकी तस्वीरें, आपके चेहरे की पहचान (Facial Recognition Data) का हिस्सा बन सकती हैं, जिसे AI कंपनियां अपने सिस्टम को ट्रेन करने और बिजनेस के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं।

Ghibli स्टूडियो का AI से क्या लेना-देना?

जापान के प्रसिद्ध घिबली स्टूडियो के फाउंडर हयाओ मियाज़ाकी कभी भी AI जनरेटेड आर्ट के पक्ष में नहीं रहे। उनका मानना है कि AI कला का नहीं, बल्कि जीवन का अपमान करता है। लेकिन आज घिबली नाम का इस्तेमाल कर AI कंपनियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं और उनकी निजी तस्वीरों तक पहुंच बना रही हैं।

Ghibli ट्रेंड से कैसे हो सकता है आपका डेटा लीक?

अगर आप सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें शेयर कर रहे हैं या AI टूल्स को अपना डेटा दे रहे हैं, तो आपका फेशियल रिकॉग्निशन डेटा खतरे में पड़ सकता है।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण है Clearview AI स्कैंडल। इस कंपनी पर आरोप लगे थे कि उसने 3 अरब से ज्यादा तस्वीरें चोरी करके एक डेटाबेस तैयार किया और उसे निजी कंपनियों को बेच दिया।

इसी तरह, मई 2024 में ऑस्ट्रेलियाई कंपनी Outabox का डेटा लीक हुआ, जिसमें 1.05 मिलियन लोगों के चेहरे, ड्राइविंग लाइसेंस और पते चोरी हो गए।

कौन कमा रहा है आपके चेहरे से पैसा?

Statista की रिपोर्ट के अनुसार, फेस रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी का बाजार 2025 तक 5.73 अरब डॉलर तक पहुंचने वाला है और 2031 तक यह आंकड़ा 14.55 अरब डॉलर तक हो सकता है।

Google, Meta जैसी बड़ी कंपनियों पर पहले भी आरोप लग चुके हैं कि वे यूजर्स की तस्वीरों से अपने AI मॉडल्स को ट्रेन कर रही हैं। लेकिन ये कंपनियां इस डेटा का इस्तेमाल कैसे करती हैं, यह जानकारी पब्लिक के लिए हमेशा रहस्य बनी रहती है।

कैसे बच सकते हैं इस खतरे से?

  • घिबली स्टाइल AI ट्रेंड को फॉलो करने से बचें।
  • सोशल मीडिया पर हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें अपलोड न करें।
  • फेस अनलॉक की बजाय पिन या पासवर्ड का इस्तेमाल करें।
  • अगर किसी ऐप को कैमरा एक्सेस देना जरूरी है, तो उसकी प्राइवेसी पॉलिसी पहले ध्यान से पढ़ें।
  • मजे के लिए अपनी सुरक्षा से समझौता ना करें!

हम भारतीयों की आदत है कि हम ट्रेंड्स को बिना सोचे-समझे फॉलो कर लेते हैं। किसी भी नई चीज को अपनाने से पहले उसके खतरों को समझना जरूरी है। एक पल की मौज-मस्ती के लिए अपने चेहरे का डेटा AI कंपनियों को मुफ्त में सौंपना समझदारी नहीं है। तो अगली बार जब कोई घिबली स्टाइल तस्वीर बनाए, तो उससे पहले एक बार सोचें-क्या यह सुरक्षित है?

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