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CLOUD BURST: क्या होता है 'प्रेग्नेंट क्‍लाउड'? क्यों फटते हैं बादल? जानिए यहां

What is CLOUD BURST: अभी तक पूरा देश वायनाड के भूस्खलन वाली त्रासदी से उबर भी नहीं पाया था कि वहीं हिमाचल की बादल फटने की घटना ने लोगों को और भयभीत कर दिया है।

आपको बता दें कि शिमला, कुल्लू और मंडी में बादल फटने की वजह से भारी नुकसान हुआ है, अभी तक 5 लोग मारे जा चुके हैं तो वहीं 50 से ज्यादा लोग लापता भी हैं।

CLOUD BURST

मालूम हो कि ये कोई पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना सामने आई है, अक्सर मानसून के सीजन में हमें इस तरह की खबरों से दो-चार होना पड़ता है।

बादल का फटना यानी कि सिर्फ और सिर्फ तबाही

पिछले साल भी हिमाचल इसी तरह की घटनाओं से ग्रसित हुआ था इसलिए कहीं से जब बादल फटने की खबर आती हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं क्योंकि इसका मतलब सिर्फ और सिर्फ तबाही होता है।

आखिर बादल का फटना क्या होता है?

लेकिन सवाल ये है कि आखिर बादल का फटना क्या होता है? क्यों होती है इस तरह की घटना और क्या इस तरह की घटनाओं को रोका नहीं जा सकता है? तो चलिए विस्तार से इस बारे में जानते हैं।

क्या होता है 'बादल फटना'?

आपको बता दें कि 'बादल फटने' का अर्थ होता है एक 'प्रेग्नेंट क्‍लाउड' का गुस्सा फूटना, दरअसल जब एक बादल जो कि पानी से लबालब रूप से भरा होता है तो उसे गर्भवती बादल कहा जाता है और जब ये किसी बाधा से टकराता है तब भारी से बहुत भारी बारिश होती है और इसकी तीव्रता इतनी ज्यादा होती है को उसके बहाव में जो भी आता है> उसका बचना बहुत ज्यादा मुश्किल होता है।अक्सर ऐसी घटनाएं पहाड़ों पर होती हैं इसलिए पहाड़ी लोग बादल फटने को कहते हैं कि आज बादल गुस्सा फूटा है।

बादल फटने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें प्रमुख हैं...

  • भौगोलिक स्थिति
  • ग्लोबल वार्मिंग
  • वनों की कटाई
  • अवैज्ञानिक ढंग से निर्माण कार्य

बादल फटने के प्रभाव

  • मानवीय हानि
  • संपत्ति का नुकसान
  • भू-स्खलन
  • सड़कों का संपर्क टूटना

वैसे तो बादल फटना एक गंभीर प्राकृतिक आपदा है , जिसे रोका तो नहीं जा सकता है लेकिन हम कुछ तरीके अपनाकर इस आपदा से होने वाले नुकसान को रोक सकते हैं। ये टिप्स निम्नलिखित हैं?

  • IMD को इसके लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली डेवलेप करनी चाहिए, जिससे वक्त रहते हम प्रभावित एरिया से लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा सकें।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में अवैज्ञानिक निर्माण कार्यों पर रोक लगाने से इस तरह की घटनाएं कम हो सकती हैं।
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