Cauvery water dispute: क्या है कावेरी जल विवाद, क्यों हो रहा कर्नाटक में बवाल? आसान भाषा में समझें यहां
Cauvery River dispute: कावेरी जल विवाद के मुद्दे पर आज कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बंद बुलाया गया है। भाजपा, जेडीएस के साथ किसानों और कन्नड़ संगठनों ने इस बंद में भाग लिया है। बंद के मद्देनजर मंगलवार को सभी स्कूल और कॉलेज के साथ-साथ कई दुकानों को बंद किया गया है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती की गई है।
तो चलिए इन गहमा गहमी के बीच आज हम आपलोगों को बताएंगे कि आखिर कावेरी जल विवाद है क्या? आखिर कर्नाटक में इसे लेकर बवाल क्यों मचा है? सड़कों पर किसान क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं? नीचे पढ़ें पूरी रिपोर्ट आसान भाषा में...

तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच का है यह विवाद
कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए ने कर्नाटक को 15 दिनों के लिए तमिलनाडु को 5,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। जिसके बाद कर्नाटक सरकार ने हाथ खड़ा करते हुए कहा कि छोड़ने के लिए पर्याप्त पानी नहीं है। जल बंटवारे के सीडब्ल्यूएमए आदेश के बाद, कर्नाटक में पानी की उपलब्धता पर चिंताएं पैदा हो गईं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दोनों ने कावेरी जल बंटवारे विवाद पर नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक की।
मुद्दे को सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि प्रधानमंत्री के पास दोनों राज्यों को बुलाने और उनकी दलीलें सुनने का अधिकार है। इस संदर्भ को देखते हुए, हमने प्रधान मंत्री से हस्तक्षेप की अपील की है।
क्या है विवाद का कारण
डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार, जिनके पास जल संसाधन विभाग भी है, ने कहा कि कर्नाटक के पास आवश्यक पानी का केवल एक तिहाई ही उपलब्ध है। सीएम सिद्धारमैया ने अगस्त के बाद कम वर्षा और कम भूजल स्तर को तमिलनाडु को पानी न छोड़ने के दो प्रमुख कारण बताए। शीर्ष कांग्रेस नेता ने कहा कि अगस्त के बाद हमारी बारिश बंद हो जाती है, जबकि तमिलनाडु में उसके बाद भी बारिश होती रहती है। उनका भूजल स्तर भी ऊंचा है, जिससे हमारी स्थिति खराब हो जाती है।
कावेरी जल विवाद इतिहास
कर्नाटक और तमिलनाडु कावेरी जल विवाद ब्रिटिश काल से चला आ रहा है। 1924 में मैसूर रियासत और मद्रास प्रेसीडेंसी के बीच आम सहमति बनने के बाद एक प्रस्ताव पारित किया गया। मैसूर को 44.8 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी संग्रहित करने के लिए कन्नमबाड़ी गांव में एक बांध बनाने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद दोनों राज्यों के बीच इस मुद्दे पर टकराव बढ़ता ही गया और 1947 के बाद इस विवाद को कई बार सुप्रीम कोर्ट में ले गए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी राज्यों के बीच जल-बंटवारा विवाद को हल करने के लिए सरकार द्वारा 1990 में कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (सीडब्ल्यूडीटी) का गठन किया गया था। सीडब्ल्यूडीटी ने कर्नाटक को तमिलनाडु को मासिक या साप्ताहिक 205 मिलियन क्यूबिक फीट पानी जारी करने का अंतरिम आदेश पारित किया।
-
Delhi NCR Weather Today: दिल्ली-NCR में होगी झमाझम बारिश, दिन में छाएगा अंधेरा, गिरेगा तापमान -
युद्ध के बीच ईरान ने ट्रंप को भेजा ‘बेशकीमती तोहफा’, आखिर क्या है यह रहस्यमयी गिफ्ट -
Gold Silver Price: सोना 13% डाउन, चांदी 20% लुढ़की, मार्केट का हाल देख निवेशक परेशान -
Ram Navami Kya Band-Khula: UP में दो दिन की छुट्टी-4 दिन का लंबा वीकेंड? स्कूल-बैंक समेत क्या बंद-क्या खुला? -
इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा पंचतत्व में विलीन, पिता का भावुक संदेश और आखिरी Video देख नहीं रुकेंगे आंसू -
'मुझे 10 बार गलत जगह पर टच किया', Monalisa ने सनोज मिश्रा का खोला कच्चा-चिट्ठा, बोलीं-वो मेरी मौत चाहता है -
Petrol-Diesel Shortage: क्या भारत में पेट्रोल-डीजल समेत ईंधन की कमी है? IndianOil ने बताया चौंकाने वाला सच -
कौन हैं ये असम की नेता? जिनके नाम पर हैं 37 बैंक अकाउंट, 32 गाड़ियां, कुल संपत्ति की कीमत कर देगी हैरान -
Iran Vs America: ईरान ने ठुकराया पाकिस्तान का ऑफर, भारत का नाम लेकर दिखाया ऐसा आईना, शहबाज की हुई फजीहत -
LPG Crisis: एलपीजी संकट के बीच सरकार का सख्त फैसला, होटल-रेस्टोरेंट पर नया नियम लागू -
Trump Florida defeat: ईरान से जंग ट्रंप को पड़ी भारी, जिस सीट पर खुद वोट डाला, वहीं मिली सबसे करारी हार -
Who is Aryaman Birla Wife: RCB के नए चेयरमैन आर्यमन बिड़ला की पत्नी कौन है? Virat Kohli की टीम के बने बॉस












Click it and Unblock the Notifications