Aerosol pollution क्या है ? महाराष्ट्र पर मंडरा रहा है बड़ा संकट

Aerosol pollution in Maharashtra: राजधानी दिल्ली पिछले कुछ हफ्तों से खतरनाक वायु प्रदूषण की चपेट में है, लेकिन महाराष्ट्र का संकट भी कम गंभीर नहीं है। यहां एयरोसोल प्रदूषण का स्तर बहुत ही खतरनाक श्रेणी में जाने वाला है और राज्य सरकार को तत्काल इसके लिए उपाय करने की सलाह दी गई है। एक शोध हुआ है, जिसके मुताबिक महराष्ट्र पर यह संकट थर्मल पावर प्लांट पर अत्यधिक निर्भरता को माना गया है, जिसकी वजह से हवा में ठोस कण और तरल बूंदें बुरी तरह घुलती जा रही हैं।

एयरोसोल प्रदूषण क्या है ?

एयरोसोल प्रदूषण क्या है ?

एयरोसोल हवा में मौजूद धुएं और धूल में मौजूद सूक्ष्म ठोस कण, तरल बूंदें या अन्य गैसों का मिश्रण है। सच तो ये है कि इसके लिए मानवीय गतिविधियां, जैसे कि उद्योग, वाहनों से निकलने वाले धुएं और निर्माण कार्य ही जिम्मेदार हैं। एयरोसोल में ईंधन के जलने से पैदा होने वाली ठोस और जहरीली हाइड्रोकार्बनिक गैस और सल्फेट मौजूद रहते हैं। ज्यादा एयरोसोल की स्थिति में उसमें समुद्री नमक, धूल, सल्फेट, काले और ऑर्गेनिक कार्बन वाले पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10)भी शामिल होते हैं। अगर इसपर समय रहते कंट्रोल नहीं किया गया तो इसकी वजह से इंसान की सेहत पर बहुत ही बुरा असर पड़ सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि एयरोसोल प्रदूषण से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, लॉन्ग-टर्म रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इरिटेशन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं या बढ़ सकती हैं। यह समस्याएं आखिरकार कैंसर की वजह भी हो सकती हैं।

महाराष्ट्र में एयरोसोल प्रदूषण का स्तर

महाराष्ट्र में एयरोसोल प्रदूषण का स्तर

एक ताजा शोध में यह जानकारी सामने आई है कि महाराष्ट्र में एयरोसोल प्रदूषण मौजूदा ऑरेंज जोन (असुरक्षित) से 2023 तक रेड जोन (बहुत ही ज्यादा असुरक्षित) में जा सकता है। इस शोध में इस स्थिति के लिए मुख्य तौर पर थर्मल पावर प्लांट में बढ़ोतरी को जिम्मेदार ठहराया गया है। डॉक्टर अभिजीत चटर्जी और कोलकाता के बोस इंस्टीट्यूट के पीएचडी स्कॉलर मोनामी दत्ता का यह शोध जर्नल Elsevier में प्रकाशित हुआ है।

AOD क्या है ?

AOD क्या है ?

एयरोसोल प्रदूषण का स्तर क्या है, इसे एयरोसोल ऑप्टिकल डेफ्थ (AOD) के पैमाने पर मापा जाता है, जो कि 0 से लेकर 1 की रेंज में होता है। इसमें 0 का मतलब पूरी तरह से साफ या नीला आसमान, जिसमें विजिविलिटी अधिकतम होती है। जबकि, 1 का मतलब है बहुत ही धुंधला वातावरण। यदि AOD 0.3 से कम है तो यह ग्रीन जोन (सुरक्षित) है, 0.3-0.4 में ब्लू जोन (कम असुरक्षित), 0.4-0.5 ऑरेंज (असुरक्षित) और 0.5 से ऊपर रेड जोन (बहुत ही ज्यादा असुरक्षित) होता है। या यूं कहें कि AOD वायुमंडल में मौजूद एरोसोल की मात्रा का अनुमान है और इसे PM2.5 की जगह के पैमाने के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

महाराष्ट्र पर मंडरा रहा है बड़ा संकट

महाराष्ट्र पर मंडरा रहा है बड़ा संकट

महाराष्ट्र इस समय 0.4-0.5 ऑरेंज (असुरक्षित) जोन से गुजर रहा है। लेकिन, जिस तरह से एयरोसोल ऑप्टिकल डेफ्थ (AOD) का स्तर बढ़ता जा रहा है, एयरोसोल प्रदूषण एओडी को बढ़ाकर 0.5 के पैमाने से भी पार ले जा सकता है, और तब यह प्रदेश रेड जोन (बहुत ही ज्यादा असुरक्षित) में चला जाएगा। इस शोध में इसका मुख्य कारण प्रदेश में थर्मल पावर प्लांट के अलावा ठोस ईंधन का जलना (कोयला, लकड़ी आदि) और वाहनों की वजह से होने वाले उत्सर्जन को बताया गया है।

स्वास्थ्य पर संकट

स्वास्थ्य पर संकट

इस शोध के प्रिंसिपल ऑथर और बोस इंस्टीट्यूट में पर्यावरण विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर चटर्जी के मुताबिक, 'अध्ययन से पता चलता है कि वायु प्रदूषण की वजह पहले के कोयला-आधारित थर्मल पावर प्लांट की वजह से हैं। बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही इसकी क्षमता बढ़ाई जाती है। अगर पहले की तरह राज्य में ऐसे प्लांट लगने जारी रहेंगे तो राज्य बहुत ही असुरक्षित जोन में चला जाएगा। इसके चलते मॉर्बिडिटी रेट बढ़ेगी, आयु कम होगी और बाकी स्वास्थ्य समस्याओं में बढ़ोतरी होगी।' उन्होंने कहा है महाराष्ट्र में कुल AOD 2019-2023 के बीच करीब 7 फीसदी तक बढ़ सकती है।

एयरोसोल प्रदूषण को कंट्रोल करने के सुझाव

एयरोसोल प्रदूषण को कंट्रोल करने के सुझाव

शोध में महाराष्ट्र सरकार को सलाह दी गई है कि सुरक्षित ब्लू जोन में पहुंचने के लिए उसे थर्मल पावर प्लांट पर निर्भरता 41 फीसदी या 10 गीगावॉट कम करनी पड़ेगी। वहीं सीनियर रिसर्च फेलो दत्ता का कहना है कि 'महाराष्ट्र के थर्मल पावर प्लांट में कोयले पर निर्भरता बहुत ज्यादा है। 2015 से 2019 के बीच वायु प्रदूषण में थर्मल पावर प्लांट का योगदान करीब 39% पाया गया। इसकी वजह से पैदा हुए खतरे को कम करने के लिए राज्य सरकार को ना सिर्फ नए थर्मल पावर प्लांट को रोकना होगा, बल्कि मौजूद प्लांट की क्षमता भी कम से कम 10 गीगावॉट करनी होगी।'(तस्वीरें- सांकेतिक)

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