तेजस्वी की सभा में जुट रही भीड़ अगर 2015 की तरह ‘बेवफा’ निकली तो क्या होगा ?

नई दिल्ली। तेजस्वी की सभा में भीड़ जुट रही है। कोरोना गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ा कर लोग धक्कमधक्का करते हुए सभा में शामिल हो रहे हैं। शनिवार को सीतामढ़ी के रीगा में तेजस्वी ने कांग्रेस उम्मीदवार अमित कुमार टुन्ना के समर्थन में जनसभा की। इस रैली में जुटी भीड़ को देख कर तेजस्वी ने कहा, ये चुनाव नहीं बल्कि बेरोजगारी के खिलाफ आंदोलन है। दो हफ्ते पहले भी तेजस्वी ने मोकामा, लखीसराय, जमुई और शेखपुरा में जनसभाएं की थीं। इनमें भी भीड़ जमा हुई थी। क्या इस जुट रही भीड़ को राजद के बढ़ते जनाधार का संकेत माना जाना चाहिए ? क्या इससे ये माना जाय कि जुट रही भीड़ वोट में भी तब्दील होगी ? क्या भीड़ से वोट का अंदाजा लगाया जा सकता है ? 2015 में जैसा नरेन्द्र मोदी के साथ हुआ अगर वैसा तेजस्वी के साथ हुआ तो क्या होगा ?

क्या रोजगार के लुभावने वायदे से जुट रही भीड़ ?

क्या रोजगार के लुभावने वायदे से जुट रही भीड़ ?

2015 में नरेन्द्र मोदी जीत के रथ पर सवार थे। लोकसभा का चुनाव जीता था। कई राज्यों में भी चुनावी जीत मिली थी। बिहार विधानसभा के चुनाव में उनकी सभाओं में लोगों का रेला उमड़ रहा था। भाजपा गदगद थी कि बिहार में एक और जीत मिलने वाली है। लेकिन जब वोटों की गिनती हुई तो बाजी मार ले गया नीतीश-लालू का महागठबंधन। मोदी को भीड़ मिली और महागठबंधन को वोट। मोदी की सभा में जुटने वाली भीड़ वेवफा निकली। उसने मोदी देखा सुना लेकिन वोट दिये नीतीश- लालू को। भीड़ कब वफा करेगी और कब बेवफाई करेगी, ये कोई नहीं जानता। तेजस्वी को भी ये बाद याद रखनी चाहिए। अगर भीड़ को बेरोजगारी के खिलाफ आंदोलन होती तो इस देश का 1971 में कायाकल्प हो गया होता। इंदिरा गांधी ने 1971 में गरीबी हटाओ का नारा दिया था। लेकिन गरीबी कायम रही और बेरोजगारी बढ़ती रही। इसके बाद भी 1980 में इंदिरा गांधी जीत गयीं। बेरोजगारी के खिलाफ जनता आंदोलन नहीं बन पायी। जात-पात और मजहब में बंटी जनता अक्सर भीड़ तो बन सकती है लेकिन आंदोलन कभी कभार ही बन पाती है। बिहार चुनाव में कौन सी पार्टी कितना रोजगार देगी, इसके लिए बोली लग रही है। तेजस्वी ने 10 लाख लोगों को रोजगार देने का वादा किया तो भाजपा 19 लाख लोगों के लिए रोजगार का पैकेज लेकर आ गयी। पुष्पम प्रिया चौधरी ने तो सबको मात देते हुए बिहार के 80 लाख लोगों को रोजगार देने की घोषणा कर दी। क्या ऐसा मुमकिन है ? तब तो सबसे अधिक भीड़ पुष्पम प्रिया की सभाओं में होनी चाहिए थी ।

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    10 लाख सरकारी नौकरी संभव है ?

    10 लाख सरकारी नौकरी संभव है ?

    अगर राजद के शासनकाल में रोजगार मिले होते तो नीतीश कुमार को शायद ही गद्दी मिली होती। भारत के किसी राज्य में आज तक किसी मुख्यमंत्री ने एक ही दस्तखत से 10 लाख लोगों को नौकरी नहीं दी है। क्या तेजस्वी इस मामले में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाएंगे ? तेजस्वी का कहना है कि अगर वे मुख्यमंत्री बनते हैं तो पहले ही दस्तख्त से 10 लाख लोगों को सरकारी नौकरी देंगे। ये कैसे संभव होगा, इसके बारे में उन्होंने कुछ नहीं बताया है। राजद ने पांच सितम्बर को बेरोजगारी हटाओ पोर्टल लॉन्च किया था। केवल एक महीने में ही इस पोर्टल पर करीब साढ़े नौ लाख युवकों ने सीधे निबंधन कराया था। टॉल फ्री नम्बर पर मिस्ड कॉल के जरिये करीब 13 लाख लोगों ने और निबंधन कराया। यानी एक महीने में करीब 22 लाख लोगों ने राजद के गरीबी हटाओ पोर्टल पर नौकरी के लिए निबंधन करा लिया था। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। राजद ने 10 लाख लोगों को रोजगार देने का चुनावी वायदा कर के आर्थिक विशेषज्ञों को चौंका दिया है। इस वायदे की हकीकत क्या है ? कहां तो हर साल दो-चार हजार पक्की नौकरी पर आफत है और कहां 10 लाख की बात हो रही है। क्या जनता को इस पर भरोसा है ?

    क्या भीड़ वोट में तब्दील होगी ?

    क्या भीड़ वोट में तब्दील होगी ?

    तेजस्वी यादव की सभा में भीड़ जुटने पर क्या भाजपा और जदयू चिंतित हैं ? एनडीए के समर्थक इस भीड़ को जुटायी गयी भीड़ का नाम दे रहे हैं। उनका कहना है कि नीतीश सरकार ने चूंकि बालू माफिया और शराब माफिया की कमर तोड़ दी है इसलिए ऐसे लोग राजद के साथ जुड़ गये हैं। राजद की सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने शराबबंदी कानून की समीक्षा करने की बात कही है। इसलिए माफिया समर्थक राजद को मजबूत दिखाने के लिए लोगों की भीड़ जुटा रहे हैं। एनडीए समर्थकों के मुताबिक, छोटे मैदान औसत भीड़ से भी भर जाते हैं। इसलिए पहली नजर में यही लग रहा है कि तेजस्वी की सभा में बहुत भीड़ जुट रही है। लेकिन सवाल ये है कि क्या जुगाड़ तकनीक से जुटायी गयी भीड़ वोट में तब्दील होगी ?

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