क्या होता है लकड़सुंघा, जिसका बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार में हुआ जिक्र

नई दिल्ली- बिहार की राजनीति में एक बार फिर से लकड़सुंघा शब्द पर खूब विवाद हुआ है। इसका जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे दौर के चुनाव प्रचार के दौरान किया और लालू-राबड़ी के शासनकाल पर 'अराजकता' और 'अपहरण' का आरोप लगाते हुए वोटरों को पुराने दिनों के प्रति चेताने की कोशिश की। बाद में इसपर आरजेडी ने भी पलटवार किया और उसे लॉकडाउन के दौरान प्रवासियों की हुई दुर्दशा से जोड़कर मोदी सरकार पर निशाना साधने की कोशिश की। दरअसल, लखड़सुंघा या लकड़ सुंघवा बिहार में एक समय खूब प्रचलित ठेठ आंचलिक शब्द है, जिसका इस्तेमाल 1980-90 के दशक में छोटे और मासूम बच्चों को कथित अपहरणकर्ताओं से सावधान करने के लिए होता था।

What happens to Lakadsungha, which was mentioned in the Bihar assembly elections campaign

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    लखड़सुंघा या लकड़ सुंघवा शब्द उन कथित अपहरणकर्ताओं के लिए बिहार में 80 और 90 के दशक में खूब इस्तेमाल होता था, जो कथित तौर पर छोटे बच्चों को लकड़ी सुंघाकर बेहोश करके चुरा कर ले जाते थे। खासकर गर्मी के दिनों में जब लू के थपेड़ों के चलते सड़कें सूनी पड़ जाती थीं तो मां बच्चों को कथित लड़कसुंघा का ही डर दिखाकर अकेले घर से बाहर नहीं निकलने को कहती थी। बच्चों को बड़े-बुजुर्ग यह कहकर अकेले घरों से बाहर निकलने के लिए मना करते थे कि लकड़सुंघा उन्हें लकड़ी सुंघाकर बेहोश करके झोले में लेकर चला जाएगा। वैसे बिहार पुलिस ने अब तक कोई ऐसे लकड़सुंघा गैंग को कभी नहीं पकड़ा है, जो बच्चों को लकड़ी सुंघाकर अपहरण करता हो। अलबत्ता, एक पुलिस अधिकारी को औरंगाबाद जिले के ओबरा गांव की एक घटना जरूर याद है। 1991 में उस गांव में एक साधू को गांव वालों ने लकड़सुंघा होने के संदेह में ही मार डाला था।

    वैसे जिन लोगों ने उन दशकों में बिहार (खासकर तब के मध्य और दक्षिण बिहार) में बचपन गुजारा है, उनमें से कई लोगों ने अपनी मांओं से लकड़ सुंघवे की कहानी जरूर सुनी होगी। तब बच्चों को गर्मियों में दिन में इसी तरह की कहानियां सुनाकर सुलाया जाता था। बताया जाता था कि लकड़ सुंघवे किसी भी भेष में आ सकते हैं, उनके पास बड़ा झोला रहता है, जिसमें वो अकेले बच्चों को चुराकर ले भागते हैं। कुछ लोगों ने इस कथित लकड़ सुंघवे को कविताओं के शक्ल में भी पिरोने की कोशिश की है। लेकिन, आज की तारीख में इस शब्द का प्रचलन खत्म सा हो गया है। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजद के कथित 'जंगलराज' का जिक्र करने के लिए एक रैली में इसका जिक्र करके इसे फिर से इसे सुर्खियों में ला दिया है।

    वैसे बिहार में 2015 के विधानसभा चुनाव के कुछ महीने पहले इसी शब्द का प्रयोग लालू यादव ने भाजपा नेताओं के खिलाफ भी किया था। तब उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर देश में अव्यवस्था का माहौल पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि बीजेपी के नेता तो लकड़सुंघवा हैं और उनकी पार्टी सबको लकड़ी सुंघा-सुंघा कर भगा देगी।

    इस बार भी पीएम मोदी पर पलटवार करते हुए आरजेडी ने पूछा है कि किस लकड़सुंघे ने लॉकडाउन किया, जिसके चलते बिहार के लाखों लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। पार्टी प्रवक्ता मनोज झा ने बिना नाम लिए कहा कि बिहार के लोग उस लकड़सुंघवा को खूब अच्छे से जानते हैं।

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