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जब सुनील दत्त ने शरद पवार से की थी संजय दत्त की सिफारिश, जानें क्या मिला था जवाब

मुंबई में 1993 के दौरान हुए कई धमाकों से पूरा शहर दहल गया था। 12 मार्च 1993 को पहले बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, फिर नरीमन प्वाइंट फिर एक एक कर के कई जगहों पर सीरियल ब्लास्ट हुए। इस से मुंबई ही नहीं बल्कि पूरा देश कांप उठा था।

महाराष्ट्र के तत्कालीन सीएम शरद पवार को तब कुर्सी संभाले महज 6 दिन ही हुए थे। इन धमाकों ने पवार सरकार को भी हिला दिया। इस सीरियल बम ब्लास्ट में बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर सुनील दत्त के बेटे संजय दत्त जो तब अपने करियर की शुरुआत कर ही रहे थे, का नाम इन सीरियल ब्लास्ट में आया।

What happend when Sunil Dutt requested to Sharad Pawar for Sanjay Dutt

सुनील दत्त महाराष्ट्र के तत्कालीन सीएम शरद पवार के पास अपने बेटे को बचाने के लिए पहुंचे थे। लेकिन शरद पवार ने उस वक्त सुनील दत्त के रिक्वेस्ट का क्या जवाब दिया था इसके बारे में शरद पवार ने अपनी आत्मकथा, 'अपनी शर्तों पर: जमीनी हकीकत से सत्ता के गलियारों तक' में लिखा है।

शरद पवार ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि दहशतगर्दों ने धमाकों के लिए मुंबई के 12 जगहों को बेहद की सावधानी के साथ चुना था। ये सभी हिंदू बहुल इलाके थे। इन धमाकों के जरिए वो दंगा फैलाना चाहते थे।
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अपनी आत्मकथा में वो लिखते हैं, "मैं धमाके के तुरंत बाद एक मुस्लिम इलाके में चला गया। ताकि लोगों को ये लगे कि इस ब्लास्ट में किसी भी तरह का कोई भी धार्मिक एंगल नहीं हैं।" पवार के मुताबिक उनकी ये ट्रिक में काफी हद तक कामयाब भी हो गई थी।

शरद पवार की ऑटोबायोग्राफी के मुताबिक ब्लास्ट के बाद मुंबई पुलिस की छापेमारी तेज हो गई। जांच में ये बात सामने आई कि इसके पीछे दाऊद इब्राहिम का हाथ है। जांच में ये भी सामने आया कि बॉर्डर पार से समंदर के रास्ते धमाके की वस्तु और हथियार लाए गए थे। ये सभी चीजें जहां रखी गई थीं उनमें से एक गैरेज संजय दत्त का भी था।
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यहां तक पता चला कि वहां एक बंदूक को गलाने का भी प्रयास किया गया था। मुंबई में ब्लास्ट को लेकर ये सारी गतिविधियां जब चल रही थी संजय दत्त देश के बाहर थे। उनके पिता ने पवार के कहने पर उन्हें फौरन बुलवाया। संजय जब विदेश से लौटे तब हवाई अड्डे से ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

पवार अपनी आत्मकथा में लिखते हैं कि सुनील दत्त की इज्जत का ख्याल करते हुए पवार ने दत्त को अपने ऑफिस में बुलाया। पुलिस जांच की जानकारी दी। उसके बाद सुनील दत्त ने साफ तौर पर पवार से कहा था कि अगर मेरा बेटा देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त है तो मैं कानून के आड़े नहीं आऊंगा। आप अपना काम कीजिए उसे सजा दीजिए।
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सुनील दत्त ने संजय दत्त को सजा देने की बात तो कह दी थी, लेकिन मदद की उम्मीद भी थी। लेकिन बकौल पवार जब उन्होंने संजय दत्त की किसी भी तरह से मदद करने से इनकार कर दिया तो सुनील दत्त का चेहरा उतर गया और वो बेहद दुखी मन से उनके ऑफिस से चले गए। हालांकि पवार ने ये भी लिखा है कि उन्हें अफसोस हुआ था कि वो सुनील दत्त के लिए कुछ नहीं कर पाए।
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