Train Accident: 'लावारिस शवों' का क्या करती है रेलवे, क्या कहता है नियम, जानें यहां
Unclaimed Dead Bodies: ट्रेन हादसे में मिले लावारिस शव के साथ सरकार क्या करती है? इनका अंतिम संस्कार कैसे किया जाता है? अगर आप भी इन सवालों में उलझे हैं तो हम आपके कन्फ्यूजन दूर कर देते हैं।

ओडिशा के बालासोर में हुई भीषण ट्रेन दुर्घटना में 288 लोगों की मौत हो गई जबकि 1000 से अधिक यात्री घायल हो गए। जहां 202 शवों की पहचान की जा चुकी है। वहीं 86 शवों की पहचान अभी भी नहीं हो सकी है। अस्पताल में लावारिस शवों के ढेर लगे हुए हैं। हालत यह है कि अस्पतालों के मुर्दाघरों में जगह ही नहीं बची है। इस संकट की स्थिति में स्कूल और कोल्ड स्टोरेज को मुर्दाघर में तब्दील कर दिया गया है। लावारिस शवों को सड़ने से बचाने के लिए भुवनेश्वर एम्स भेज दिया गया है।
लावारिस शवों का क्या करेगी रेलवे?
डॉक्टर्स के मुताबिक, लावारिश शव अधिकतम 7 दिन के बाद तेजी से सड़ना शुरू हो जाता है। अब सवाल यह उठता है कि इन लावारिश शवों की पहचान नहीं होने पर सरकार या रेलवे लावारिस शवों का क्या करेगी। लावारिस शवों को लेकर भारतीय रेलवे के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा ने बताया कि रेल हादसे में मृतकों के शव को संरक्षित करना या लावारिस घोषित कर अंतिम संस्कार करना रेलवे के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। यह राज्य सरकार के अधिकार के क्षेत्र का मामला है।
राज्य सरकार का अधिकार
लावारिश शव का क्या करना है, इसपर फैसला लेने का अधिकार राज्य सरकारों का है। ये राज्य सरकारों को तय करना होता है कि इन लावारिश शवों को कब तक रखना है और कब इसका अंतिम संस्कार करना है। चलिए बताते हैं लावारिस शवों को संरक्षित करने और अंतिम संस्कार को लेकर क्या नियम हैं?
लावारिस शव की पहचान राज्य पुलिस की जिम्मेदारी
नियमों के मुताबिक, जब भी पुलिस को कोई लावारिस लाश मिलती है तो सबसे पहले जिला एसपी को जानकारी दी जाती है। इसके बाद लाश की रिपोर्ट तैयार कर पहचान पुख्ता करने की कवायद शुरू की जाती है। इसके लिए प्रदेश के थानों और आसपास के राज्यों में शवों की तस्वीर भेजी जाती है। इसके बाद ये पता लगाया जाता है कि शव का पोस्टमार्टम करना है या नहीं।
शवों की पहचान के लिए पुलिस अपनाती है यह तरीका
पुलिस शव की पहचान के लिए कई तरीके अपनाती है। इसके लिए पुलिस मृतक के शरीर पर टैटू, कोई जन्म चिह्न, कागज का कोई टुकड़ा तलाशकर व्यक्ति की पहचान करने की कोशिश करती है। कई लोगों के नाम, धार्मिक प्रतीक, पति या पत्नी का नाम, कोई टैटू मिलने पर पहचान में आसानी हो जाती है।
कितने दिन होता है परिजनों का इंतजार
अधिकतम एक सप्ताह का इंतजार किया जाता है यदि कोई दावा नहीं करता है तो लावारिश शवों का अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। क्योंकि गर्मी के मौसम में इतने दिनों को शवों को संरक्षित करना मुश्किल होता है। वहीं शव के पास से मिले सामान को पुलिस अपने पास रख लेती है।
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