West Bengal: क्या ममता बनर्जी और अभिषेक को लेकर बंट गई है TMC? एक प्रस्ताव से सामने आई दरार!
West Bengal News: पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी उनके बाद घोषित रूप से नंबर दो का स्थान रखते हैं। लेकिन, जब उनके सरकार में नंबर दो बनाने का एक सुझाव आया तो पार्टी पूरी तरह से विभाजित नजर आने लगी। इससे ऐसा लगता है कि टीएमसी चीफ ने जितनी आसानी से पार्टी में भतीजे सेट कर दिया, सरकार में करने की कोशिश की तो बात बिगड़ भी सकती है।
दरअसल, हाल में टीएमसी की राजनीति में एक ऐसा वाकया हुआ है, जिसमें सत्ताधारी दल और सरकार के युवा और वरिष्ठ नेताओं के बीच एक लकीर खिंच गई है।

एक निगम पार्षद पर हमले से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत कोलकाता नगर निगम के एक पार्षद सुसांत घोष पर हुए जानलेवा हमले से हुई। इस घटना के फौरन बाद ही कोलकाता के मेयर और प्रदेश के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने कोलकाता पुलिस पर अपनी पूरी भड़ास निकाल दी। ममता के बेहद भरोसेमंद फिरहाद ने कहा, 'अब बहुत हो गया। कोलकाता पुलिस कहां है? उनका सूचना तंत्र क्या कर रहा है? मैं कोलकाता पुलिस से कहता हूं कि अब कार्रवाई करे।'
कोलकाता पुलिस की नाकामी से शुरू हुई दरार
इसके बाद दमदम सीट से पार्टी सांसद सौगत रॉय ने भी कोलकाता पुलिस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, 'क्या आप सोच सकते हैं कि 99 एमएम का पिस्टल बिहार से कोलकाता आ रहा है? इसके बारे में यह सोचने का समय है। निश्चित रूप से यह कोलकाता पुलिस की नाकामी है।'
अभिषेक बनर्जी को उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री बनाने की मांग पर बंट गई पार्टी!
अब इस मामले में भरतपुर से टीएमसी एमएलए और राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री हुमायूं कबीर भी कूद पड़े। उन्हें मौका मिला और उन्होंने सीएम के भतीजे अभिषेक बनर्जी को सरकार में बड़ा पद दिए जाने की पैरवी शुरू कर दी।
उन्होंने ममता के भतीजे को उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री बनाने की मांग कर दी। गौरतलब है कि इस समय यह विभाग खुद मुख्यमंत्री संभाल रही हैं और आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ जो दरिंदगी हुई थी और पुलिस कमिश्नर तक आरोपों के घेरे में आए थे, तब भी इसका जिम्मा ममता के ही पास था।
कबीर के मुताबिक, 'ममता बनर्जी पर कार्यों का बहुत ही ज्यादा बोझ है।' 'उन्हें राष्ट्रीय राजनीति और इंडिया अलायंस को भी देखना है। मुझे लगता है कि अभिषेक बनर्जी को डिप्टी सीएम बनाने और पुलिस महकमा (गृह विभाग) सौंपने का समय है...'
उनके हमनाम और डेबरा के पार्टी विधायक हुमायूं कबीर ने भी पहले के हां में हां मिला दी। पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा, 'उन्होंने जो कहा वह गलत नहीं है। मेरी राय में यह सही रहेगा।'
ममता के 'लेफ्टिनेंट' ने काट दी बात!
जैसे अभिषेक का नाम आगे आया तो जो फिरहाद हकीम कोलकाता पुलिस पर सवाल उठा रहे थे, उन्होंने साफ कर दिया कि वे अभिषेक को प्रमोशन देने के हक में नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'ममता बनर्जी सबकुछ करने में सक्षम हैं। हम ममता बनर्जी की तस्वीर दिखाकर जीतते हैं। जो बड़ी-बड़ी बातें कह रहे हैं, उन्हें पहले ममता बनर्जी की तस्वीर हटानी चाहिए और दिखाना चाहिए कि वह एक भी चुनाव खुद से जीत सकते हैं।'
एक और वरिष्ठ टीएमसी नेता और पूर्व मंत्री मदन मित्रा सामने आए और अभिषेक के प्रमोशन की मांग के विरोध में दिलचस्प दलील दे डाली। उन्होंने कहा, 'मैं आपको ऐसी कार दिखा सकता हूं जो 70 या 80 साल पुरानी हैं। मैं आपको दूसरे विश्व युद्ध के जमाने की कार दिखा सकता हूं। वे नई कारों से भी ज्यादा भाग सकती हैं।'
ट्रेनी डॉक्टर हत्याकांड में भी हो चुका है विवाद
अभिषेक बनर्जी के मुद्दे पर तृणमूल जिस तरह से दो खेमों में बंटा आ रहा है, उसमें संबंधित नेताओं के अपने-अपने हित छिपे हो सकते हैं। लेकिन, जब ट्रेनी डॉक्टर के साथ आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई दरिंदगी के मुद्दे पर पूरा देश उबल रहा था, तब खुद ममता के नजरिए से उनके भतीजे दूर नजर आ रहे थे। विवाद तब भी कोलकाता के कानून और व्यवस्था को लेकर चल रहा था और आरोपों के केंद्र में खुद मुख्यमंत्री भी थीं, जिनके कंट्रोल में पुलिस से लेकर पूरा स्वास्थ्य महकमा भी रहा है।












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