पश्चिम बंगाल: नारदा घोटाले में दो मंत्रियों और विधायक मदन मित्रा को CBI दफ्तर लाया गया, क्या है पूरा मामला
पश्चिम बंगाल: नारदा घोटाले में दो मंत्रियों और विधायक मदन मित्रा को CBI दफ्तर लाया गया, जानें क्या है पूरा मामला
कोलकाता, 17 मई: पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित नारदा घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने सोमवार को इस मामले में टीएमसी के चार नेताओं को पूछताछ के लिए दफ्तर बुलाया है। नारद घोटाले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) मंत्री फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर सोवन चटर्जी को सीबीआई अपने ऑफिस में पूछताछ के लिए लेकर आई है। कुछ दिनों पहले ही पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने नारदा घोटाले मामले में पूर्व मंत्रियों और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी।
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जानिए क्या है नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामाल?
पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनावों के ठीक पहले नारदा न्यूज के सीईओ मैथ्यू सैमुएल ने एक स्टिंग वीडियो जारी किया था। ये वीडियो ममता बनर्जी सरकार में मंत्रियों की 'भ्रष्ट' प्रथाओं को उजागर करने वाली थी। नारदा स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो में एक कंपनी के प्रतिनिधि के तौर पर टीएमसी के 7 सांसदों, 3 मंत्रियों और कोलकाता नगर निगम के मेयर सोवन चटर्जी को काम कराने के लिए घूस के तौर पर एक मोटी रकम देते हुए नजर आ रहे थे।
नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामला ममता बनर्जी सरकार में मंत्रियों की भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए पश्चिम बंगाल में नारदा समाचार द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन की एक सीरीज थी। स्टिंग दो साल की अवधि में आयोजित किया गया था और इसे पहले तहलका पत्रिका में प्रकाशित किया जाना था। इस स्टिंग ऑपरेशन को नारदा न्यूज के सीईओ मैथ्यू सैमुएल ने किया था। मैथ्यू सैमुएल ने बाद में तहलका छोड़ दिया और पश्चिम बंगाल में अपना टीवी चैनल लॉन्च किया था।
नारदा स्टिंग ऑपरेशन फुटेज कब जारी किया गया था?
पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो जारी किया गया था और इसमें टीएमसी मंत्रियों, विधायकों समते दर्जन भर नेताओं को एक काम कराने के लिए रिश्वत लेते हुए दिखाया गया था। यह पार्टी के लिए एक बड़े झटके के रूप में उभरकर सामने आया था। जिसके वरिष्ठ मंत्री पहले से ही करोड़ों रुपये के सारदा चिट-फंड घोटाले में उलझे हुए थे।
नारदा स्टिंग वीडियो में किन-किन लोगों को देखा गया था?
एक फर्जी कंपनी की स्थापना की गई और स्टिंग ऑपरेटरों द्वारा कई मंत्रियों से संपर्क किया गया और उनसे पैसा लेकर काम करने को कहा गया था। जिन मंत्रियों या नेताओं को कथित तौर पर कैमरे पर रिश्वत लेते देखा गया, उनमें मुकुल रॉय, सुब्रत मुखर्जी, सुल्तान अहमद, सुगत रॉय, काकोली घोष दस्तीकर, प्रसून बनर्जी, सोवन चटर्जी, मदन मित्रा, इकबाल अहमद और फरहाद हकीम शामिल हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एमएच अहमद मिर्जा को भी इस वीडियो में देखा गया था।
नारदा स्टिंग ऑपरेशन के बाद TMC ने जीता चुनाव
नारदा स्टिंग ऑपरेशन के बाद भले ही तृणमूल कांग्रेस को जनता और विपक्षी दलों की कड़ी आलोचना और नाराजगी का सामना करना पड़ा, लेकिन वह विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने में सफल रही। चुनाव के बाद ममता सरकार ने उल्टे मैथ्यू पर आपराधिक मामला दर्ज करवाया था। बाद में कोलकाता हाईकोर्ट से मैथ्यू को राहत मिली थी।
हालांकि 2016 के 17 मार्च को एक और बड़ा झटका तब लगा जब कलकत्ता हाई कोर्ट ने स्टिंग ऑपरेशन मामले में सीबीआई द्वारा प्रारंभिक जांच करने का आदेश दिया। इसने सीबीआई को जरूरत पड़ने पर मामले में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का भी निर्देश दिया गया था।












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