West Bengal election:नए साल में ममता बनर्जी को जल्द ही ये झटका भी देने वाले हैं 'अविवाहित' सुवेंदु अधिकारी

नई दिल्ली-पिछले कुछ समय में पश्चिम बंगाल (West Bengal)में जितने भी नेता तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर बीजेपी (BJP)में शामिल हुए हैं, उनमें सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) सबसे बड़े जनाधार वाले नेता हैं। क्योंकि, सुवेंदु अधिकारी अकेले नहीं हैं। उनका पूरा अधिकारी परिवार ही राजनीति में है और कम से कम दो दशकों से पूर्ब मेदिनीपुर(Purba Medinipur) जिले और आसपास के इलाकों में उनका खासा प्रभाव रहा है। सुवेंदु के कमल थामते ही उनके भाई सौमेंदु अधिकारी(Saumendu Adhikari) को जिले की कांठी नगरपालिका के प्रशासक पद से हटाकर ममता ने पूरे कुनबे को भड़कने की वजह दे दी है और अब सुवेंदु अधिकारी भी साफ संकेत दे रहे हैं कि तृणमूल नेता को आगे और झटकों के लिए तैयार रहना चाहिए।

बाकी अधिकारी बंधु भी जल्द छोड़ेंगे ममता का साथ?

बाकी अधिकारी बंधु भी जल्द छोड़ेंगे ममता का साथ?

सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) का आरोप है कि उनके लिए अब टीएमसी (TMC)में रहना नामुमकिन हो गया था, क्योंकि वहां उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंच रहा था। वह ये भी कह रहे हैं कि वे बिना किसी शर्त बीजेपी में शामिल हुए हैं और वह मुख्यमंत्री पद के दावेदार बनकर भी नहीं आए हैं। लेकिन, टीएमसी और उनकी नेता ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के लिए इन बातों से उतनी परेशानी नहीं है। असल में सुवेंदु अधिकारी जो कुछ कह रहे हैं, उसके मायने ये हैं कि जल्द ही उनका पूरा परिवार बीजेपी(BJP) में शामिल हो सकता है और यह किसी भी सूरत में कम से कम 40-50 विधानसभा सीटों पर तृणमूल की चुनावी सेहत के लिए सही नहीं है।

पिता और भाई टीएमसी सांसद हैं

पिता और भाई टीएमसी सांसद हैं

बता दें कि सौमेंदु अधिकारी के अलावा इस वक्त इनके पिता सिसिर अधिकारी ( Sisir Adhikari)और एक और भाई दिब्येंदु अधिकारी (Dibyendu Adhikari) अभी भी टीएमसी में ही बने हुए है। सुवेंदु के पिता टीएमसी(TMC) के संस्थापकों में से हैं और कांठी लोकसभा क्षेत्र से पार्टी के सांसद भी। जबकि, दिब्येंदु तमलुक लोकसभा सीट से एमपी हैं। अधिकारी बंधुओं का अबतक का इतिहास यही कहता है कि वह अलग-अलग कुनबे की राजनीति करने में यकीन नहीं करते। इसके बारे में खुद सुवेंदु ने ईटी से कहा है, 'मैं अविवाहित हूं, लेकिन जहां तक मेरे पिता या मेरे भाई का सबंध है, यह फैसला उन्हें करना है, लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि वे जल्दी मेरे साथ आ जाएंगे। टीएमसी में ठीक से काम करना बहुत ही मुश्किल है।' अगर ऐसा हुआ तो ममता और उनकी टीएमसी को झटका लगना तय है।

बीजेपी की 'देशभक्ति' ने सुवेंदु को लुभाया!

बीजेपी की 'देशभक्ति' ने सुवेंदु को लुभाया!

अधिकारी बंधुओं का ना सिर्फ पूर्ब मेदिनीपुर (Purba Medinipur)जिले में बल्कि उससे भी कहीं ज्यादा दायरे में एक ठोस जनाधार है। यही वजह है कि सुवेंदु अधिकारी को पूरा भरोसा है कि बीजेपी(BJP) 'सिर्फ पूर्ब मेदिनीपुर में ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में जीतेगी।' उन्होंने कहा है कि 'वामपंथी पार्टी को आगे रखते हैं, जबकि कांग्रेस परिवार को पहले रखती है। बीजेपी अकेली पार्टी है, जो राष्ट्र को आगे रखती है। बीजेपी का मुख्य आकर्षण उसकी देशभक्ति है......'

टीएमसी कस रही है मीर जाफर बताकर तंज

टीएमसी कस रही है मीर जाफर बताकर तंज

अधिकारी ये मानते हैं कि टीएमसी ने अपने पहले कार्यकाल में थोड़ा-बहुत करने की कोशिश की थी। लेकिन, '2016 बाद यह बुआ और भतीजे की प्राइवेट कंपनी में बदल गई। हम उनके नौकर या कर्मचारी नहीं हैं कि इस तरह से काम करें। इसलिए, मैं निकल गया और मेरे कई सहयोगी भी बाहर हो गए। वैसे अधिकारी पर टीएमसी नेता उन्हें मीर जाफर कहकर तंज कस रहे हैं। टीएममी के एक और बड़े नेता सौगत रॉय तो यहां तक आरोप लगा रहे हैं कि वह सारदा घोटाले में बचने के लिए बीजेपी में गए हैं। इसपर अधिकारी का जवाब है कि, 'जब मैं टीएमसी में था तब मैं भ्रष्ट नहीं था, अचानक मैं भ्रष्ट हो गया?'

अभिषेक में राजनीति का तत्व नहीं- सुवेंदु

अभिषेक में राजनीति का तत्व नहीं- सुवेंदु

ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने भी हाल ही में उनकी तुलना एसिम्टोमेटिक कोविड-19 के मरीज से की है, जो टीएमसी को भीतर से नुकसान पहुंचा रहे थे। इसपर अधिकारी ने कहा है कि 'अभिषेक 2011 के बाद राजनीति में आए, जिन्होंने पहले कभी राजनीति में काम नहीं किया था। उनमें कोई राजनीतिक तत्व नहीं है। पार्टी को बनाने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उनकी एक ही पहचान है कि वह मुख्यमंत्री के भतीजे हैं और इसलिए उन्हें पार्टी चलाने की इजाजत मिल गई है।'

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