विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश में अब उत्तर के बाद दक्षिण जाएंगी ममता बनर्जी, DMK नेताओं से करेंगी मुलाकात
विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश में अब उत्तर के बाद दक्षिण जाएंगी ममता, DMK नेताओं से करेंगी मुलाकात
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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी विपक्ष को एकजुट करने की पुरजोर कोशिश कर रही हैं। बीते दिनों दिल्ली के 4 दिनों के दौरे पर पहुंची ममता ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत कई बड़े नेताओं से मुलाकात की थी। ममता अब तमिलनाडु में विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेतृत्व से मुलाकात करेंगी। ममता 10-11 अप्रैल को चेन्नई में रहेंगी इस दौरान वो करुणानिधि और स्टालिन से मुलाकात करेंगी। ममता आंध्र प्रदेश की मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात करने के लिए अपने दो सांसद सुदीप बंदोपाध्याय और डेरेक ओ'ब्रायन को नियुक्त किया है। इन सबके बीच ममता बनर्जी की योजना है कि वो DMK और TDP नेतृत्व के समक्ष अपने पार्टी के सांसदों की ओर से यह संदेश पहुंचाएं कि किस तरह गैर भाजपा शासित राज्यों को 15वें वित्त आयोग से वंचित किया जा रहा है। TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि 15वां वित्त आयोग संघीय ढांचे के अनुसार नहीं है।

ब्रायन ने कहा कि विपक्षी दलों से होने वाली मुलाकात में ममता यह मुद्दा उठाएंगी। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि यह आयोग संघ विरोधी है। राज्य इससे बाहर हो रहे हैं। एक ओर जहां बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु जैसे राज्यों को दंडित किया जा रहा है और उत्तर प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों को सम्मानित किया जा रहा है। गौरतलब है कि बीते साल 22 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15वें वित्त आयोग का गठन करने के लिए मंजूरी प्रदान की थी। भारत के संविधान के अनुच्छेद 280 (1) के अंतर्गत यह संवैधानिक बाध्यता है।
अभी तक 14 वित्त आयोगों का गठन किया जा चुका है। 14वें वित्त आयोग का गठन 01 अप्रैल, 2015 से शुरू होने वाले पाँच वर्षों की अवधि को कवर करने वाली सिफारिशें देने के लिए 02.01.2013 को गठित किया गया था। 14वें वित्त आयोग ने 15 दिसंबर, 2014 को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था। 14वें वित्त आयोग की सिफारिशें वित्तीय वर्ष 2019-20 तक के लिए वैध है।
यह आयोग जिसे वित्तीय सहायता और अनुदान सहायता का प्रतिशत तय करने के लिए अधिकृत किया गया है। यह आयोग साल 2011 की जनगणना को आधार बनाएगा। यह माल और सेवा कर (जीएसटी) में वृद्धि और सब्सिडी में कमी का फैसला करेगा।












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