West Bengal Assembly elections:TMC से महज 3% वोट के फासले को यूं मिटाना चाहती है BJP
नई दिल्ली- West Bengal Assembly elections 2021: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती (Atal Bihari Vajpayee's birth anniversary) यानि 25 दिसंबर से भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly elections)के लिए अपने बूथ-लेवल नेटवर्क को मजबूत करने का अभियान शुरू करने जा रही है। भाजपा मान रही है कि अगर जमीनी स्तर पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) का तिलिस्म तोड़ना है तो जमीनी नेटवर्क को और मजबूत करना ही होगा। पार्टी का यह अभियान फिलहाल तीन दिन चलेगा और इसमें 75,000 से ज्यादा बूथ अध्यक्षों से पार्टी के नेता सीधे संपर्क करेंगे और उन्हें बूथ मैनेजमेंट के लिए जानकारी और साधन दोनों उपलब्ध करवाएंगे।

75,000 से ज्यादा बूथ अध्यक्षों को सक्रिय करने का अभियान
'मेरा बूथ सबसे मजबूत' अभियान के तहत बीजेपी (BJP) के वरिष्ठ नेता पश्चिम बंगाल (West Bengal) में 75,000 से ज्यादा बूथ के पार्टी अध्यक्षों (Booth President) को सम्मानित करेंगे। इस दौरान बूथ अध्यक्षों को एक किट दी जाएगी, जिसमें उनके पद के साथ वाला एक नेम प्लेट होगा। इसके अलावा उस किट में उनके घरों के लिए पार्टी के झंडे, उनके वाहनों के लिए स्टिकर के अलावा मास्क और सैनिटाइजर के साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) की ओर से उनके नाम लिखा एक खत भी होगा, जिसमें इस बात का जिक्र किया जाएगा कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में उनका रोल कितना महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। जानकारी के मुताबिक इस किट में कुल 12 आइटम रखे जाएंगे, जिसमें लोगों को मतदाता सूची (Voter list) में नाम डलवाने के लिए फॉर्म के अलावा उनके इलाके के सभी घरों के बारे में पूरी जानकारी रखने के लिए स्टेशनरी भी होगी।
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जमीनी कार्यक्रता का आत्मविश्वास बढ़ाने का अभियान
इसके बारे में पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अरविंद मेनन (BJP national secretary Arvind Menon)ने ईटी को और विस्तार से बताया, जो कि भाजपा के बंगाल अभियान में अहम भूमिका निभाने वाले नेताओं में से एक हैं। उनके मुताबिक, 'करीब 80 हजार बूथ अध्यक्ष अपने घरों पर झंडा-आरोहण करेंगे। अगले दिन उन्हें उनकी ड्यूटी के बारे में बताया जाएगा। और 27 दिसंबर को सभी बूथ अध्यक्ष पीएम के 'मन की बात' सुनने के लिए लोगों को समूहों में बिठाने का प्रबंध करेंगे। हमें उम्मीद है कि इससे बूथों पर नई ऊर्जा का संचार होगा जो कि पार्टी के चुनावी कार्य की आधारशिला है।' इससे बूथ कमेटियों और कार्यकर्ताओं का हौसला और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। मेनन के मुताबिक इससे बूथ अध्यक्षों में जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी और उन्हें यह भरोसा होगा कि पार्टी उनके साथ खड़ी है। पार्टी को यह भी लगता है कि इस अभियान से वह जमीनी स्तर पर ज्यादा दिखेगी, जिससे वह सशक्त होगी और राजनीतिक हिंसा को भी ज्यादा अच्छे से डील कर सकेगी।

टीएमसी के बूथ मैनेजमेंट को देना है टक्कर
पश्चिम बंगाल (West Bengal) की चुनावी राजनीति को नजदीक से जानने वाले एक्सपर्ट मानते हैं कि वहा दूसरों राज्यों की तुलना में बूथ मैनेजमेंट बहुत ही अहम और पिछले 10 वर्षो में टीएमसी (TMC) ने पूरे राज्य में 77,800 बूथों पर अपने पार्टी कार्यकर्ताओं का बहुत ही मजबूत नेटवर्क तैयार कर रखा है। इसलिए बीजेपी (BJP) अपने बूथ अध्यक्षों को बूथों पर होने वाली किसी भी तरह की धांधली के प्रति कानूनी और संवैधानिक तौर पर ट्रेंड करेगी और उन्हें एक डायरी देगी, जिसमें वो उनके इलाके में होने वाली रोजाना के राजनीतिक घटनाक्रमों को दर्ज करते जाएंगे। 2016 के चुनाव में भाजपा ने वहां सिर्फ 2,000 बूथ ही तैयार किए थे, लेकिन अब दावा है कि 76,000 बूथों पर उसकी कमिटियां हैं। लेकिन, पार्टी मानती है कि कई जगह वह ढीली पड़ी हैं, जिन्हें वह फिर से सक्रिय कर रही है।

3 फीसदी वोट के फासले को मिटाने पर फोकस
दरअसल, भाजपा का सारा आंकलन 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल से मिले परिणामों के आधार पर है। पार्टी को तब 18 सीटें और 40.30% वोट मिले थे। यह इसलिए संभव हुआ था कि पार्टी ने बूथ पर काफी जोर दिया था। अगले तीन महीने में इसलिए पार्टी मुख्य तौर पर बूथ मैनेजमेंट पर ही जोर दे रही है, ताकि टीएमसी को 2019 में मिले 43.30% वोट के फासले को मिटाया जा सके। हर बूथ अध्यक्षों से पार्टी को उम्मीद है कि वह कम से कम 1,000 वोटरों से संपर्क में रहेंगे और उनकी हर संभव कोशिश होगी कि वो उन मतदाताओं को पार्टी से जोड़े रखें और मतदान वाले दिन उन्हें बूथ तक भी लेकर आएं।

'कार्यकर्ताओं के मन से टीएमसी का खौफ निकालने की जरूरत'
बीजेपी की यही रणनीति है कि बूथ अध्यक्षों के जरिए वह लोगों को आगे पार्टी के सभी कार्यक्रमों से जोड़े रखे। उनके लिए पीएम के हर महीने होने वाली मन की बात कार्यक्रम सुनने की व्यवस्था करें, पार्टी के अध्यक्ष और तमाम नेताओं के भाषण उन तक विभिन्न माध्यमों से पहुंचाएं। पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने लीडरशिप को जो सुझाव दिए हैं, उसमें यह बात कही गई है कि लोगों के मन में यह बात पहुंचाने की हर संभव कोशिश हो कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होंगे और टीएमसी के गढ़ वाले बूथों पर भी भाजपा के बूथ कार्यकर्ता बिना तृणमूल के लोगों के डर से अपना काम करते रहें।












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