कोरोना के कहर के बीच इस साल पड़ेगी हाड़ कंपाने वाली ठंड, IMD ने बताई क्या है वजह

कोरोना के कहर के बीच इस साल पड़ेगी हाड़ कंपाने वाली ठंड , IMD ने बताई क्या है वजह

नई दिल्ली। कोरोना का प्रकोप थमने का नाम ही नहीं ले रहा है और विशेषज्ञों की माने तो ठंड के मौसम में कोरोना संक्रमण और तेजी से फैलेगा। इसी बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने ऐलान किया है कि हर बार की अपेक्षा इस बार हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ेगी। इसके साथ आईएमडी ने वो कारण बताए हैं जिसके कारण इस बार ठंड अधिक पड़ेगी।

IMD के महानिदेशक ने बताई ये खास वजह

IMD के महानिदेशक ने बताई ये खास वजह

भारत के मौसम विभाग (IMD) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बुधवार को कहा कि मौजूदा मौसम की वजह से इस मौसम में सर्दी अधिक हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसा अनुमान नहीं होना चाहिए कि जलवायु परिवर्तन से तापमान में वृद्धि होती है, लेकिन इसके विपरीत, यह अनिश्चित मौसम की ओर हमें ले जाता है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा आयोजित 'कोल्ड वेव रिस्क रिडक्शन' पर एक वेबिनार को संबोधित करते हुए मोहपात्रा ने कहा, "चूंकि कमजोर नी नीना की स्थिति चल रही है, इसलिए हम इस साल और अधिक ठंड की उम्मीद कर सकते हैं। अल नीनो और ला नीना की स्थिति एक प्रमुख भूमिका निभाती है वह "ला नीना (La-Nina)की स्थिति शीत लहर की स्थिति के लिए अनुकूल है, जबकि एल नीनो की स्थिति इसके लिए प्रतिकूल है।

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    शीत लहरों से लोगों की जान को है खतरा

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    महापात्र ने कहा कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार उन राज्यों में से हैं, जहां ज्यादातर ठंड की लहरों से इस बार अधिक मौत हो सकती है। आईएमडी हर साल नवंबर में एक सर्दियों का पूर्वानुमान भी जारी किया है, जो की गंभीर भविष्यवाणी है। बता दें ला नीना प्रशांत जल के शीतलन से संबंधित है, जबकि एल नीनो इसके हीटिंग से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि दोनों कारकों का भारतीय मानसून पर प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, 2020 में नौ प्रतिशत से अधिक वर्षा के साथ सामान्य मानसून से ऊपर देखा गया। पिछले साल सर्दियों के मौसम में लंबे समय तक ठंडी लहरें चली थीं।

    क्या होता है La-Nina और Al Nino

    क्या होता है La-Nina और Al Nino

    बता दें ला-नीना (La-Nina) भी मानसून का रुख तय करने वाली सामुद्रिक घटना है। यह घटना सामान्यतः अल-नीनो के बाद होती है। उल्लेखनीय है कि अल-नीनो (al Nino) में समुद्र की सतह का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है जबकि ला-नीना में समुद्री सतह का तापमान बहुत कम हो जाता है।

    लो प्रेशर एरिया अब हाई प्रेशर में तब्दील हो गया मौसम विभाग ने जारी किया आरेंज अलर्ट

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    बता दें भारतीय मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना हुआ लो प्रेशर एरिया अब हाई प्रेशर में तब्दील हो गया है, जिसकी वजह से सोमवार शाम से हैदराबाद, कर्नाटक और ओडिशा के कई इलाकों में तेज बारिश हो रही है। कर्नाटक, रायलसीमा, दक्षिण कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र एवं मराठवाड़ा के दूरस्थ क्षेत्रों में भी भारी से बेहद भारी बारिश की आशंका है, विभाग ने यहां Orange अलर्ट जारी किया हुआ है। इसके साथ ही विभाग ने कहा है कि मानसून की विदाई अब लेट हो सकती है क्योंकि हवा की गति में बदलाव हुआ है, जिसकी वजह से देश के कई इलाकों में अभी भी भारी बारिश संभव है।

    बंगाल की खाड़ी पर बना डिप्रेशन प्रभावी होते हुए डीप डिप्रेशन बन गया है

    बंगाल की खाड़ी पर बना डिप्रेशन प्रभावी होते हुए डीप डिप्रेशन बन गया है

    वहीं स्काईमेट की रिपोर्ट के अनुसार बंगाल की खाड़ी पर बना डिप्रेशन प्रभावी होते हुए डीप डिप्रेशन बन गया है। जिसकी वजह से अगले 24 घंटों के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश के शहरों में भीषण बारिश होने और तूफानी हवाएं चलने की आशंका है। पूर्वी और पश्चिमी गोदावरी, विशाखापत्तनम, विजयनगरम, श्रीकाकुलम गजपति, गंजाम, कोरापुट, रायगड़ा, मलकानगिरी और पूरी में भी भारी से भारी बारिश की आशंका है, जिसके लिए अलर्ट जारी किया गया है।

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