तो क्या इस साल भी होगी मानसून में झमाझम बारिश? मौसम एजेंसी ने दी खुश करने वाली खबर
कैसा रहेगा इस साल देश में मानसून, मौसम एजेंसी ने दी खुश करने वाली खबर
नई दिल्ली, 22 जनवरी: पिछले मानसून सीजन में हुई सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश के बाद भारतीय मौसम विभाग और निजी एजेंसियों ने इस साल मानसून को लेकर एक अहम भविष्यवाणी की है। मौसम का अनुमान लगाने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने बताया कि मौजूदा मौसम पैटर्न 'ला नीना' के चलते बनी परिस्थितियों की वजह से इस साल देश में दक्षिण पश्चिम मानसून सामान्य रहेगा। फिलहाल ला नीना कमजोर स्थिति में हैं और मई तक इसके न्यूट्रल होने के आसार बन रहे हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो ऐसा लगातार चौथी साल होगा, जब देश में मानसून सामान्य रह सकता है।
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कब कहा जाता है मानसून को सामान्य
स्काईमेट ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि 2020 से 2021 के बीच ला नीना का अध्ययन करने के बाद हम कह सकते हैं कि एक सामान्य मानसून की संभावनाएं बन रही हैं। आपको बता दें कि मानसून के एक सीजन को उस वक्त सामान्य माना जाता है, जब लंबी अवधि की औसत बारिश में 96 से 104 फीसदी तक बारिश रिकॉर्ड की जाती है।

अभी भविष्यवाणी करना जल्दबाजी- IMD
वहीं, भारतीय मौसम विभाग के वैज्ञानिक ओपी श्रीजीत ने बताया, 'मौसम से जुड़े कुछ मॉडल्स के आधार पर अनुमान लगाया जा सकता है कि ला नीना की स्थिति कमजोर पड़ेगी। हालांकि कुछ मॉडल यह भी संकेत दे रहे हैं कि ला नीना मजबूत हो सकता है। इसलिए, अभी इस बारे में भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगा, क्योंकि कुछ अन्य कारक भी है, जिन्हें लेकर अप्रैल-मई तक ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।' भारतीय मौसम विभाग आमतौर पर अप्रैल में मौसम का पूर्वानुमान जारी करता है।

मानसून पर टिकी है कई फसलों की पैदावार
गौरतलब है कि देश में होने वाली कुल बारिश में से 90 फीसदी बारिश मानसून सीजन के दौरान जून से सितंबर के बीच ही होती है और गेहूं, चावल व गन्ने जैसी अहम फसलों की पैदावार इसी मानसून पर टिकी होती है। खाने-पीने के सामान को लेकर जहां दुनियाभर में कीमतें एक दशक के अपने उच्चतम स्तर पर हैं, वहीं भारत में भी महंगाई आम आदमी के लिए एक बड़ी मुसीबत बनी हुई है।

क्या हैं कमजोर मानसून के नुकसान
ऐसे हालात में सामान्य मानसून का अनुमान आर्थिक मोर्चे पर एक राहत भरी खबर है। सामान्य मानसून इस वजह से भी अहम है, क्योंकि हमारे देश की करीब 60 फीसदी आबादी कृषि पर ही निर्भर है। ऐसे में अगर मानसून कमजोर रहता है, तो कम बारिश का असर सीधे तौर पर पैदावार पर पड़ता है और खाद्य तेलों सहित खाने पीने के अन्य सामान का आयात और कीमतें बढ़ने का संकट खड़ा हो जाता है।
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