Waqf Amendment Bill: 14 बदलावों को JPC से मंजूरी, बोर्ड में होंगे 2 गैर मुस्लिम सदस्य, कैसा होगा कानून?
Waqf Amendment Bill: संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर मौजूदा वक्फ लॉ में 14 बदलावों के साथ मंजूरी दे दी। समिति में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जगदम्बिका पाल के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने 44 संशोधनों का प्रस्ताव रखा था, लेकिन जेपीसी ने इस सभी प्रस्तावों को खारिज कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, अब 14 प्रस्तावित बदलावों पर 29 जनवरी को मतदान होगा और अंतिम रिपोर्ट 31 जनवरी तक जमा जमा की जाएगी।
वक्फ कानून संशोधन को लेकर गठित एक संयुक्त संसदीय समिति ने सोमवार को वक्फ संशोधन विधेयक के मसौदा संस्करण में 14 बदलावों के पक्ष में मतदान किया। रिपोर्ट के मुताबिक, वक्फ लॉ के संशोधन को लेकर 14 प्रस्तावों में वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों का होना अनिवार्य होगा, बिल के मूल मसौदे में भी इसे शामिल किया गया है।

कानून संशोधन के मसौदे के मुताबिक, नामांकित पदेन सदस्यों (मुस्लिम या गैर-मुस्लिम) के बीच अंतर करने का भी प्रावधान होगा। यानी वक्फ परिषद, चाहे राज्य या अखिल भारतीय स्तर की हो,सभी में कम से कम दो या दो से अधिक ऐसे सदस्य होंगे जो इस्लाम धर्म से नहीं होंगे।
इन बदलावों को मिली मंजूरी
वक्फ संशोधन बिल के मूल मसौदे में कई अहम प्रस्ताव शामिल हैं। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कुछ अहम प्रस्तावों को लेकर दावा किया गया है, जिन्हें संयुक्त संसदीय समिति ने मंजूरी दी है। इनमें कुछ प्रस्ताव इस प्रकार हैं-
- राज्य वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में 2 गैर मुस्लिम सदस्य अनिवार्य होंगे, जिसमें बदलाव करते हुए अब पदेन सदस्यों को इससे अलग कर दिया गया है। यानी राज्य और अखिल भारतीय दोनों स्तरों की वक्फ काउंसिल में अब कम से कम 2 गैर-मुस्लिम सदस्यों को बोर्ड में शामिल किए जा सकेंगे।
- कोई वक्फ संपत्ति का निर्धारण राज्य सरकार की ओर नामित अधिकारी करेगा। वक्फ बिल संशोधन के मूल मसौदे के मुताबिक, यह निर्णय लेना जिला कलेक्टर के अधिकर क्षेत्र में होगा।
- वक्फ कानून पूर्वव्यापी रूप से लागू किया जाएगा। शर्त ये है कि वक्फ संपत्ति रजिस्टर्ड हो यानी जो वक्फ संपत्तियां रजिस्टर्ड है उनपर असर नही पड़ेगा। जो पहले संपत्ति पहले से रजिस्टर्ड नहीं है, उनका निर्धारण तय मानकों के अनुरूप होगा।
- वक्फ बोर्ड को संपत्ति दान करने वाले व्यक्ति इस बात का रिकॉर्ड प्रस्तुत करना होगा कि वो पांच वर्ष से इस्लाम का पालन कर रहा है और संपत्ति के दान में किसी तरह की कोई साजिश शामिल नहीं है।












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