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PhonePe भारत शिफ्ट होगा ! Walmart को एक अरब डॉलर का टैक्स बिल, भरेगा सरकारी खजाना : रिपोर्ट

PhonePe को भारत में शिफ्ट करने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च किए होंगे। मोटी रकम का अंदाजा इसी बात से होता है कि Walmart को एक बिलियन डॉलर यानी करीब 82.72 अरब रुपये का टैक्स बिल मिला है। एक रिपोर्ट में ये दावा किया गया है।

walmart

डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी PhonePe को भारत शिफ्ट करने में अरबों रुपये के टैक्स बिल दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के हवाले से एनडीटीवी की खबर में बताया गया कि वॉलमार्ट, फ्लिपकार्ट के प्रतिनिधियों ने Walmart को एक बिलियन डॉलर का टैक्स बिल दिए जाने के संबंध में तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। आसान भाषा में इसे ऐसे भी समझा जा रहा है कि भारत सरकार को भारी-भरकम टैक्स मिलेगा। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक 87.72 अरब रुपये का टैक्स नए रिकॉर्ड की तरह है।

कब और क्यों अनिवार्य है भुगतान

कब और क्यों अनिवार्य है भुगतान

खबर के मुताबिक फोन पे को भारत शिफ्ट करने और वॉलमार्ट को अरबों रुपये के टैक्स बिल मामले से परिचित लोगों के अनुसार, वॉलमार्ट इंक और फोनपे के अन्य शेयरधारकों को लगभग 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर टैक्स भरना पड़ेगा। भुगतान तब अनिवार्य है जब डिजिटल पेमेंट कंपनी फोन पे अपना मुख्यालय भारत में ट्रांसफर या शिफ्ट करेगी।

वॉलमार्ट के पास मालिकाना हक

वॉलमार्ट के पास मालिकाना हक

भारतीय करेंसी में करीब 82.72 अरब रुपये का टैक्स बिल फोनपे प्राइवेट के स्थानांतरण और मूल्य में वृद्धि के बाद सामने आया है। मूल संगठन फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेज प्राइवेट का अधिग्रहण करने के बाद अधिकांश स्वामित्व वॉलमार्ट के पास चला गया है।

12 बिलियन डॉलर जुटा रही PhonePe

12 बिलियन डॉलर जुटा रही PhonePe

गौरतलब है कि फ्लिपकार्ट से अलग होने के बाद फोनपे सिंगापुर से भारत में शिफ्ट हुई है। 87.72 अरब रुपये टैक्स बिल की भारी-भरकम रकम के मामले से परिचित लोगों ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, PhonePe जनरल अटलांटिक, कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और अन्य से प्री-मनी वैल्यूएशन पर 12 बिलियन डॉलर धन जुटा रही है।

 भविष्य में 80 अरब रुपये टैक्स...

भविष्य में 80 अरब रुपये टैक्स...

फोनपे के भारत में शिफ्ट होने के मामले को जानने वाले एक शख्स ने कहा, टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट सहित निवेशकों ने भारत में PhonePe के शेयर अब नई कीमत पर खरीदे हैं। इसमें शेयरधारकों पर भविष्य में लगभग 80 अरब रुपये का टैक्स प्रभाव पड़ेगा।

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    एनडीटीवी की रिपोर्ट में कहा गया, वॉलमार्ट, फ्लिपकार्ट और टाइगर ग्लोबल के प्रतिनिधियों ने इस मामले में ईमेल पर पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया। PhonePe प्रवक्ता ने भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक मूल कंपनी ऑनलाइन रिटेलर Flipkart है। इसी की तरह PhonePe अपना मुख्यालय बैंगलोर में शिफ्ट कर रहा है। बिजनेस वर्ल्ड से जुड़े लोगों की राय में भारतीय स्टार्टअप के लिए विदेश से इंडिया शिफ्ट होना असामान्य कदम है।

    सिंगापुर में बिजनेस आसान ! 8000 से अधिक स्टार्टअप शिफ्ट

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    पिछले कई वर्षों में प्रौद्योगिकी कंपनियों ने भारत में अपने अधिकांश संचालन और व्यवसाय के साथ सिंगापुर जाने का विकल्प चुना है। इसका कारण कंपनी की इच्छा के मुताबिक टैक्स सिस्टम, विदेशी निवेश मिलने में आसानी और विदेशी एक्सचेंजों पर सरल प्रक्रियाओं को माना जाता है। इंडिया ब्रीफिंग की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2000 के बाद गत दो दशक में 8,000 से अधिक भारतीय स्टार्टअप सिंगापुर गए हैं।

    स्टार्टअप के सामने फंड की चुनौती

    स्टार्टअप के सामने फंड की चुनौती

    PhonePe के तीन प्रमुख फैसले - भारत में शिफ्ट होना, खुद को फ्लिपकार्ट से अलग इकाई के रूप में तराशना और उच्च मूल्यांकन पर धन जुटाना है। तीनों ऐसे समय में सामने आए हैं जब दुनिया भर की स्टार्टअप फर्में धन जुटाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। इस कारण इनकी कीमत में गिरावट भी हो रही है।

    RBI से अनुमति लेने में परेशानी होगी

    RBI से अनुमति लेने में परेशानी होगी

    PhonePe भारत में स्टॉक मार्केट लिस्टिंग की तैयारी कर रही है। ऐसे में ये फैसला इस डिजिटल भुगतान कंपनी के भविष्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। एक शख्स ने कहा, विदेश में सूचीबद्ध किसी भी भुगतान फर्म को भारत के वित्तीय और बैंकिंग नियामक, भारतीय रिजर्व बैंक से हरी झंडी पाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।

    भारत में स्टार्टअप और यूनिकॉर्न

    भारत में स्टार्टअप और यूनिकॉर्न

    सरकार वर्तमान में भारत में मुख्यालय रखने वाली कंपनियों को विदेशी एक्सचेंजों पर सीधे सूचीबद्ध होने से मना करती है। एशियाई विकास बैंक के अनुसार भारत में 26,000 से अधिक स्टार्टअप हैं, जो इसे दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाता है। अंतिम गणना के मुताबिक इन स्टार्टअप्स में 100 से अधिक का मूल्य करीब एक अरब डॉलर था। मूल्य बढ़ने पर इन्हें यूनिकॉर्न के रूप में जाना जाता है। बहरहाल, अब नजरें वॉलमार्ट पर हैं। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक जब 87.72 अरब रुपये का टैक्स भुगतान होगा तो भारत सरकार के खजाने में मोटा राजस्व आएगा।

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