नरेंद्र मोदी का एक मैसेज और रतन टाटा की नैनो पहुंची गुजरात

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कैसे टाटा पहुंचे गुजरात
मैगजीन ने अपने आर्टिकल की शुरुआत वर्ष 2008 की उस घटना से की है जिसमें नरेंद्र मोदी ने रतन टाटा को एक एसएमएस भेजकर उनसे कहा था कि वह क्यों नहीं अपनी छोटी कार नैना के निर्माण की योजना पश्चिम बंगाल से हटाकर गुजरात में केन्द्रित करते हैं।
उस समय टाटा को बंगाल में नैनो की वजह से एक बडे़ विद्रोह का सामना तक करना पड़ रहा था और इस प्रोजक्ट की वजह से वहां पर दंगे तक शुरू हो गए थे। टाटा ने मोदी की बात मान ली और दो साल से भी कम समय में नैनो प्लांट का संचालन शुरू हो गया।
मैगजीन की ओर से इस घटना को एक अभूतपूर्व घटना के तौर पर करार दिया गया है जिसने देश की सूरत को बदलकर रख दिया। इस आर्टिकल को जोनाथन आर लैंग ने लिखा है।
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गुजरात बना देश का 'इंडस्ट्रीयल पावरहाउस'
जोनाथन के मुताबिक न सिर्फ नैना बल्कि इस तरह के कई उदाहरण देखने को मिल जाएंगे जिसमें मोदी की वजह से गुजरात की किस्मत बदल गई। पिछले 13 वर्षों में यह राज्य देश के 'इंडस्ट्रीयल पावरहाउस' के तौर पर विकसित हो चुका है।
बैरॉन के मुताबिक चीन की तरह गुजरात अब इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सड़क, बंदरगाहों और इलेक्ट्रिक पावर जनरेशन करने वाले प्लांट्स जमकर खर्च कर रहा है। इसके साथ ही साथ वह कई ऐसी योजनाओं को भी संचालित कर रहा है जिसकी वजह से बहुत से नए प्लांट्स यहां पर स्थापित हो रहे हैं।
बैरॉन की मानें तो, 'गुजरात में कई चीजें काफी सहज ढंग से संचालित हो रही हैं जबकि भारत के बाकी हिस्से में ऐसा देखने को ही नहीं मिलता है।'
ऐसे में 63 वर्षींय मोदी से उम्मीद है कि जब वह देश के प्रधानमंत्री के तौर पर आएंगे तो पूरे देश में इस तरह के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में अपनी जान तक लगा देंगे।
मैगजीन में लिखा है कि मोदी और उनकी पार्टी भाजपा इन चुनावों में सबसे लोकप्रिय पार्टी के तौर पर उभर रही है जो कि मई के दूसरे हफ्ते में खत्म होने वाले हैं।
बीजेपी और मोदी की जीत के बाद इस देश में गांधी परिवार की अगुवाई वाली कांग्रेस की वजह से पिछले 10 वर्षों से जो निर्जीवता आई है वह खत्म हो सकेगी, जिसने देश में मौजूद आर्थिक संभावनाओं को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।
चीन से कहीं पीछे भारत
मैगजीन के मुताबिक वर्ष 2006-2008 में भारत को आर्थिक प्रगति में चीन के मुकाबले ही रखा गया था। दोनों देशों की जीडीपी दोहरे अंकों तक पहुंच चुकी थी। ब्रिक देशों की श्रेणी में मौजूद सभी देशों की आर्थिक संपन्नता के कयास लगाए जाने लगे थे।
लेकिन जहां सभी ब्रिक देश आर्थिक प्रगति की राह पर बढ़ते गए, भारत जहां पर महंगाई की दर आठ प्रतिशत पर पहुंच गई जीडीपी पांच प्रतिशत से भी कम हो गई।
भारत चीन के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता था लेकिन आज चीन की जीडीपी दर भारत के मुकाबले चार गुना ज्यादा है और ऐसे में फिलहाल यह सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है।
मोदी की ऊर्जावान, निवेश आधारित नेतृत्व की वजह से भारत, चीन के साथ मौजूद अंतर को कम कर सकता है और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं में बड़ा बदलाव आ सकेगा।
मैगजीन के मुताबिक गुजरात में कोई भी सरकारी परियोजना के लिए मंजूरी सिर्फ इंटरनेट पर ही दे दी जाती है और इसके लिए चाय पर बैठने की कोई जरूरत नहीं होती है। मोदी ने गुजरात में बंदरगाहों, पानी और बिजली का निजीकरण कर डाला है और यह देश के बाकी 28 राज्यों में सिर्फ एक सपना ही है।












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