दंगों का दंश, 22 साल बाद फिर जला सहारनपुर

सबसे पहले दंगों सहारनपुर को 1982 में अपनी चपेट में लिया। उस वक्त मंडी थानांतर्गत चिलकाना रोड पर स्थित मंदिर और मस्जिद के बीच द ीवार निर्माण को लेकर शहर में भारी बवाल हुआ था। कई लोगों की मौत भी हुई थी। दूसरी बार1991 में सहारनपुर को रामनवमी के जुलूस के दौरान शहर को दंगे की मार झेलनी पड़ी। उस वक्त धार्मिक स्थल के निकट बैंड बाजे को लेकर बवाल मचा था। चाकूबाजी और गोलीबारी में कई लोगों की जान गई थी। कई दिन तक शहर में कर्फ्यू लगा रहा।
तीसरी बार 1992 में अयोध्या विवाद को लेकर देश में फैली आग से सहारनपुर भी नहीं बच सका था। लोगों को फिर कर्फ्यू में रहना पड़ा था और अब चौथी बार फिर से सहारनपुर जल उठा है। इस बार जमीन को लेकर दो गुटों के बीच विवाद खड़ा हो गया है।
सहारनपुर में तीन लोगों की हत्या के बाद जिला मजिस्ट्रेट और एसएसपी ने उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने के आदेश दे दिए गए हैं। हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों को राज्य सरकार ने 10 लाख का मुआवज़ा देने का फैसला किया है जबकि घायलों को 50 हज़ार का मुआवज़ा दिया जाएगा।
यूपी के सहारनपुर में हालात पर काबू बनाए रखने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बिगड़ते हालात को देखते हुए पीएसी की 18, सीआरपीएफ की 6, आरएफ और आईटीबीपी की 2-2 टुकड़ियां तैनात की गई हैं। तनाव के बीच शहर में कई दुकानों और वाहनों का आग लगाई, आगजनी में काफी नुकसान हुआ।












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