JNU हिंसा के विरोध में मुंबई में प्रदर्शन, कई फिल्मी हस्तियां हुईं शामिल
नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में एक बार फिर बवाल जारी है। विश्वविद्यालय परिसर में चेहरे पर नकाब बांधे कुछ लोगों ने जेएनयू कैंपस के अंदर छात्रों और शिक्षकों पर हमला कर दिया। इस हमले में छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष समेत कई छात्र और शिक्षक गंभीर तौर पर घायल हुए हैं। छात्रसंघ ने दावा किया है कि उनकी अध्यक्ष आइशी घोष और कई दूसरे स्टूडेंट्स को ABVP के सदस्यों ने पीटा है।

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जेएनयू हिंसा पर गुलाम नबीं आजाद बोले- जब विश्वविद्यालयों के अंदर के छात्र सुरक्षित नहीं हैं तो कोई भी नहीं है। सरकार ऐसी हिंसा को प्रोत्साहित कर रही है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में भी पुलिस ने पूछताछ के बजाय गोलियां चलाईं। कई घायल हुए, मारे गए और हिरासत में लिए गए। छात्रों की आवाज़ को दबाने के लिए सरकार द्वारा इस तरह की हरकत निंदनीय है।
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने जेएनयू हिंसा पर कहा, यह घटना अराजकता का प्रमाण है। ये सब केंद्रीय राजधानी में भारत की अग्रणी यूनिवर्सिटी में गृह मंत्री, राज्यपाल और पुलिस आयुक्त की निगरानी में हुआ। हम आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने की मांग करते हैं ताकि न्याय मिले। हम यह भी मांग करते हैं कि अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए और तुरंत कार्रवाई हो।
ममता बनर्जी ने कहा, दिल्ली की पुलिस अरविंद केजरीवाल के अधीन नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार के अधीन है। एक तरफ वो भाजपा के गुंडे भेज रहे हैं और दूसरी तरफ पुलिस निष्क्रिय कर रहे हैं। पुलिस क्या करे जब उन्हें उच्च प्राधिकरण से निर्देश मिल रहे हैं। यह फासीवादी सर्जिकल स्ट्राइक है।
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, मैं इस हिंसा की निंदा करता हूं। इसमें कोई शक नहीं है कि इन लोगों को सत्ता द्वारा हरी झंडी दिखाई गई थी। इन्होंने कायरता से अपने चेहरों को ढंका हुआ था और इन्हें जेएनयू में डंडों और रोड के साथ प्रवेश करने दिया गया। एक वीडियो है, जिसमें सबसे बुरी चीज ये दिख रही है कि पुलिस ने इन्हें सुरक्षित मार्ग मुहैया कराया।
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