उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: क्या 100 ‘अनिश्चित’ सांसद NDA की जीत पर लगा देंगे ग्रहण? विपक्ष ने बढ़ाई टेंशन

Vice President Election 2025 (CP Radhakrishnan vs B. Sudershan Reddy): भारत के उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गए हैं। 9 सितंबर को होने वाले इस चुनाव में सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) ने महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल और तमिलनाडु से आने वाले आरएसएस पृष्ठभूमि के नेता सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है। वहीं विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारकर इस मुकाबले को टक्करदार बना दिया है।

कागजों पर आंकड़े एनडीए के पक्ष में साफ दिखाई देते हैं, लेकिन 100 से ज्यादा सांसदों की 'चुप्पी' ने सत्ता पक्ष की नींद उड़ा दी है। सवाल यह है कि क्या ये '100' अनिश्चित सांसद विपक्ष के लिए गेमचेंजर साबित होंगे? आइए संसद के नंबर को समझने की कोशिश करते हैं।

Vice President Election 2025 CP Radhakrishnan vs B Sudershan Reddy

▶️ NDA का दांव सीपी राधाकृष्णन: तमिलनाडु और 'गोंडर कार्ड'

सीपी राधाकृष्णन न सिर्फ आरएसएस से जुड़े वरिष्ठ चेहरा हैं, बल्कि वे तमिलनाडु की गोंडर जाति से आते हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाकर तमिलनाडु में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश की है, जहां अब तक पार्टी को खास सफलता नहीं मिली है।

राधाकृष्णन का गैर-विवादित चेहरा, राज्यपाल के तौर पर अनुभव और कोयंबटूर जैसे संवेदनशील इलाकों में संगठन मजबूत करने की उनकी क्षमता उन्हें एक सुरक्षित विकल्प बनाती है।

▶️ बी. सुदर्शन रेड्डी विपक्ष का "सरप्राइज पैकेज"

विपक्ष ने लंबे मंथन के बाद पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी पर दांव खेला। शुरुआत में आईएसआरओ वैज्ञानिक मायलस्वामी अन्नादुरई और महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी के नाम भी चर्चा में थे। लेकिन आखिरकार रेड्डी को मैदान में उतारा गया।

विपक्ष का कहना है कि यह लड़ाई केवल "उम्मीदवार" की नहीं, बल्कि एक आइडियोलॉजिकल बैटल है। रेड्डी खुद भी लगातार मीडिया से संवाद कर रहे हैं, सांसदों से मिल रहे हैं और हर मंच पर एनडीए उम्मीदवार की 'खामोशी' पर सवाल उठा रहे हैं।

Vice President Election 2025 CP Radhakrishnan vs B Sudershan Reddy

Vice President Election India 2025: : संसद का नंबर गेम, किसके पास कितनी ताकत?

उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले संसद में मौजूदा संख्या और गठबंधनों की ताकत को समझना जरूरी है। आइए एक नजर डालते हैं।

🔹 लोकसभा की कुल सीटें: 543

  • इस समय वर्तमान में लोकसभा की एक 1 सीट (पश्चिम बंगाल की बशीरहाट) खाली है। यानी फिलहाल लोकसभा में 542 सांसद मौजूद हैं।

🔹 राज्यसभा की कुल सीटें: 245

  • इस समय वर्तमान में राज्यसभा में कुल 245 सीटों में से 6 सीटें खाली हैं (4 जम्मू-कश्मीर, 1 झारखंड और 1 पंजाब)। यानी फिलहाल राज्यसभा में 239 सांसद सक्रिय हैं।

🔹 इस तरह दोनों सदनों को मिलाकर वर्तमान में निर्वाचित सांसदों की कुल संख्या 782 है।

🔹जीत के लिए जरूरी आंकड़ा: किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए कुल सांसदों के आधे से अधिक यानी 391 वोट चाहिए।

▶️ गठबंधनों की लोकसभा-राज्यसभा में मौजूदा ताकत

🔹 एनडीए (NDA)

  • लोकसभा में: 293 सांसद
  • राज्यसभा में: 134 सांसद
  • कुल मिलाकर: लगभग 427 सांसदों का समर्थन।

🔹 विपक्ष (INDIA ब्लॉक)

  • लोकसभा में: 249 सांसद
  • राज्यसभा में: 106 सांसद
  • कुल मिलाकर: लगभग 355 सांसदों का समर्थन।

एनडीए के पास इस समय आराम से बहुमत (391 से ऊपर) हासिल करने लायक सांसद हैं। विपक्ष INDIA ब्लॉक सिर्फ 37 सांसदों से बहुमत से पीछे है। लेकिन खेल यहीं दिलचस्प हो जाता है, क्योंकि क्रॉस वोटिंग और 100+ अनिश्चित सांसदों की चुप्पी इस चुनाव को रोमांचक बना रही है।

▶️ 100 सांसदों की "चुप्पी" बनी टेंशन

रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 100 से 130 सांसद ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक खुलकर अपना पत्ता नहीं खोला है। इनमें छोटे दलों, निर्दलीय और कुछ असंतुष्ट सांसद शामिल हैं। हालांकि जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआरसीपी के पास 15 सांसद हैं, जिन्होंने NDA को सपोर्ट करने का वादा किया है। वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने इंडिया ब्लॉक को समर्थन देने का वादा किया है।

विपक्ष इन्हीं 100 सांसदों को साधने में जुटा है। कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के नेता दावा कर रहे हैं कि वे इस 'अनिश्चित' वोट बैंक को अपनी तरफ मोड़कर मुकाबले को रोमांचक बना सकते हैं।

2022 में उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान 56 सांसदों ने वोट नहीं डाला था। यानी इतिहास गवाही देता है कि सभी सांसद वोटिंग में एकजुट नहीं होते। यही डर एनडीए के माथे पर शिकन की वजह है।

अगस्त 2022 में जगदीप धनखड़ ने भारी बहुमत से उपराष्ट्रपति चुनाव जीता था। उस समय एनडीए के पास न सिर्फ नंबर थे बल्कि विपक्ष बिखरा हुआ था। 2025 की तस्वीर अलग है -विपक्ष एकजुट है और NDA के भीतर भी "चुप" सांसदों का सवाल उठ रहा है।

क्या ये 100 सांसद NDA की जीत पर ग्रहण लगाएंगे? या फिर मोदी-शाह-राजनाथ की रणनीति एक बार फिर विपक्ष की चाल को नाकाम कर देगी? 9 सितंबर को तस्वीर साफ होगी, लेकिन अभी के लिए उपराष्ट्रपति चुनाव का रोमांच अपने चरम पर है।

भारत के संसदीय इतिहास पर नजर डालें तो अब तक केवल चार बार उपराष्ट्रपति निर्विरोध चुने गए हैं। 1952 से 1962 तक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन लगातार दो बार निर्विरोध उपराष्ट्रपति बने। 1952 में जनाब शेख खादिर हुसैन ने अपना नामांकन वापस ले लिया था, जिसके बाद राधाकृष्णन अकेले प्रत्याशी रह गए। इसके बाद, 1979 में देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश मो. हिदायतुल्लाह निर्विरोध उपराष्ट्रपति चुने गए।

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